जेपी इंफ्राटेक : कर्जदाताओं ने एनबीसीसी से संशोधित बोली पर स्पष्टीकरण मांगा

जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infratech) के कर्जदाताओं ने गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीसीसी से कर्ज में डूबी रीयल्टी कंपनी के अधिग्रहण को लेकर उसकी संशोधित बोली में प्रस्तावित विभिन्न राहत और छूट संबंधी प्रस्तावों पर स्पष्टीकरण मांगा.

जेपी इंफ्राटेक : कर्जदाताओं ने एनबीसीसी से संशोधित बोली पर स्पष्टीकरण मांगा

नई दिल्ली : जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infratech) के कर्जदाताओं ने गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीसीसी से कर्ज में डूबी रीयल्टी कंपनी के अधिग्रहण को लेकर उसकी संशोधित बोली में प्रस्तावित विभिन्न राहत और छूट संबंधी प्रस्तावों पर स्पष्टीकरण मांगा. सूत्रों ने यह कहा. कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) की फिर 14 मई को बैठक होगी जिसमें एनबीसीसी की संशोधित बोली पर आगे चर्चा की जाएगी.

संशोधित पेशकश पर चर्चा के लिये समिति की बैठक हुई
एनबीसीसी की संशोधित पेशकश पर चर्चा के लिये समिति की गुरुवार को बैठक हुई. इससे पहले, कर्जदाताओं ने ऋण शोधन कार्यवाही के तहत मतदान के जरिये 3 मई को मुंबई की कंपनी सुरक्षा रीयल्टी की बोली को खारिज कर दिया था. बैठक के दौरान कर्जदाताओं और घर खरीदारों के प्रतिनिधियों ने एनबीसीसी के वरिष्ठ अधिकारियों से कंपनी के प्रस्तावों के बारे में कई स्पष्टीकरण मांगे. ये सवाल मुख्य रूप से राहत उपायों और छूट से संबंधित हैं जिसका कंपनी ने प्रस्ताव किया है.

13 मई तक लिखित में सवालों का जवाब मिलेगा
सूत्रों के अनुसार एनबीसीसी से यह भी पूछा गया कि वह कैसे जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिये वित्त पोषण करेगी. कंपनी के अधिकारियों ने सभी सवालों के जवाब दिये. बैठक में यह निर्णय किया गया कि कर्जदाता शुक्रवार तक एनबीसीसी को लिखित में सवाल देंगे और कंपनी 13 मई तक उसका जवाब देगी.  कर्जदाता और मकान खरीदारों की 14 मई को बैठक होगी जिसमें आगे चर्चा की जाएगी.

3 मई को सुरक्षा रीयल्टी की याचिका खारिज कर दी
गौरतलब है कि कर्जदाताओं ने 3 मई को सुरक्षा रीयल्टी की याचिका खारिज कर दी थी. एनबीसीसी की पेशकश पर संबंधित विभागों की जरूरी मंजूरी के अभाव विचार करने से मना करने के बाद मुंबई की कंपनी एकमात्र बोलीदाता रह गयी थी. एनबीसीसी ने 26 मई को अपनी बोली खारिज होने के बाद आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय समेत सरकारी विभागों से जरूरी मंजूरी हासिल की. जेपी इंफ्राटेक के अंतरिम समाधान पेशेवर अनुज जैन ने कर्जदाताओं से कहा था कि एनबीसीसी की बोली सशर्त और गैर-बाध्यकारी है. उसके बाद कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया.