H1-B वीजा बैन होने से भारतीय कंपनियों पर नहीं होगा ज्यादा असर, ये है वजह

क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि कोरोना के चलते भी कंपनियों के लाभ में कमी आएगी और परिचालन लाभ केवल 23 फीसदी रहने का अनुमान है.

H1-B वीजा बैन होने से भारतीय कंपनियों पर नहीं होगा ज्यादा असर, ये है वजह
फाइल फोटो

मुंबईः अमेरिकी प्रशासन द्वारा एच1-बी वीजा पर रोक लगाने के बाद घरेलू आईटी कंपनियों को करीब 1200 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. इसके साथ ही उनको होने वाले लाभ में 0.25 फीसदी से लेकर 0.30 फीसदी का फर्क पड़ेगा. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने इस बात का अनुमान लगाया है. 

हालांकि अब देशी कंपनियां अमेरिका में लोकल लोगों को जॉब दे रही हैं, क्योंकि सरकार ने पिछले साल से ही वीजा जारी करने में कटौती कर दी थी. पिछले महीने ही ट्रंप प्रशासन ने विदेशियों के लिए वीजा जारी करने पर रोक लगा थी. ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना महामारी के चलते अमेरिका में बेरोजगारी की दर काफी बढ़ गई है. 

कोरोना के चलते कम होगा लाभ
क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि कोरोना के चलते भी कंपनियों के लाभ में कमी आएगी और परिचालन लाभ केवल 23 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि अमेरिकी सरकार के वीजा पर बैन लगाने से भारतीय कंपनियों को उतना असर नहीं पड़ेगा, जितना सोचा जा रहा था. नए वीजा तो जारी नहीं होंगे, लेकिन पुराने वीजा का नवनीकरण होता रहेगा.

39 फीसदी लोगों को नहीं मिला वीजा
2016 में जहां 6 फीसदी लोगों के वीजा अमेरिकी सरकार ने रद्द कर दिए थे, वहीं 2020 में ये 39 फीसदी पहुंच गया था. इससे देश की पांच बड़ी आईटी कंपनियों को केवल पांच फीसदी असर पड़ा है, क्योंकि ये कंपनियां स्थानीय टैलेंट को ही प्राथमिकता दे रही हैं. फिलहाल 60 फीसदी ऐसे लोगों को ही नौकरी पर रखा जा रहा है. 

गौरतलब है कि यूएस ने घोषणा की है कि 24 जून से 31 दिसंबर तक नए यानी पहली बार आने वाले लोग H-1B, H-2B, L-1A, L-1B, J-1 और डिपेंडेंट वीजा के जरिए US नहीं आ पाएंगे. इनकी एंट्री टेंपरेरी तौर पर रोकी गई है. 

फेडेरल रिजर्व, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस ब्रूकिंग्स फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि नॉन इमीग्रेंट वीजा वालों को नापा नहीं जा सकता. हालांकि इस फैसले से अमेरिका में मौजूद 3 लाख एच-1बी वीजा धारक इंडियन को कोई नुकसान नहीं होगा. बल्कि इस फैसले से इनको फायदा होगा, क्योंकि अमेरिका में वर्कर्स की शॉर्टेज हो जाएगी. तो मौजूदा लोगों को ज्यादा सैलरी देनी पड़ेगी. इससे अमेरिका में रह रहे भारतीयों द्वारा भारत में अपने रिश्तेदारों को भेजी जाने वाली रकम बढ़ सकती है. साथ ही इंडिया की तरफ ऑफशोर बिजनेस भी बढ़ सकता है.

अमेरिका हर साल 85,000 H1-B वीजा जारी करता है. जिसमें से 60,000 इंडियन H1-B वीजा लेने में कामयाब हो जाते हैं. जोकि लगभग 70% है. यूएस ने ये जो वीजा पाबंदी लगाई है वो केवल 6 महीने के लिए है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा 30,000 वीजा प्रभावित हो सकते हैं.

सरकारी सूत्रों का मानना है कि इस बार कोरोना की वजह से फैली बेरोजगारी को देखते हुए अमेरिका हर बार की तरह 85,000 वीजा बांटने के पक्ष में पहले से ही नहीं दिख रहा था. यानी ये संख्या अधिकतम 10,000 भी हो सकती है. ऐसे में इंडिया के लोगों को वैसे भी ज्यादा नुकसान नहीं होते दिख रहा था.

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