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अगले महीने रेपो रेट में कमी नहीं करेगा RBI, तीसरी तिमाही में हो सकती है कमी

अमेरिकी वित्तीय सर्विस और निवेश कंपनी गोल्डमैन साक्श की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा के समय नीतिगत ब्याज दर को वर्तमान स्तर पर ही बनाए रख सकता है.

अगले महीने रेपो रेट में कमी नहीं करेगा RBI, तीसरी तिमाही में हो सकती है कमी

मुंबई : अमेरिकी वित्तीय सर्विस और निवेश कंपनी गोल्डमैन साक्श की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा के समय नीतिगत ब्याज दर को वर्तमान स्तर पर ही बनाए रख सकता है. रिपोर्ट के अनुसार तेल कीमतों और मानसून की संभावना को ले कर व्याप्त अनिश्चितताओं के साथ साथ नीतिगत निर्णयों का असर धीमा रहने और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक नीतिगत दर पर फिलहाल यथा स्थिति बनाए रख सकता है.

6 जून को होगी मौद्रिक नीति की घोषणा
आरबीआई चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा छह जून को करेगा. रिपोर्ट में कहा गया है, 'हमें लगता है कि आरबीआई जून की बैठक में वर्तमान नीतिगत दरों को बनाए रखेगा.' रिजर्व बैंक फरवरी से दो बार में रेपो दर कुल मिला कर 0.50 प्रतिशत कम कर चुका है. यह दर इस समय 6 प्रतिशत है. केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंको को इसी दर पर एक दिन के लिए धन उधार देता है.

बैंकों ने लोन के रेट में मामूली कटौती की
नीतिगत दर में कमी के बावजूद बैंकों ने कर्ज की दर में औसतन केवल 0.05 प्रतिशत तक की ही कटौती की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत दर में कटौती के असर का धीमा होना हमारे इस तर्क का महत्वपूर्ण आधार है कि रिवर्ज बैंक जून में नीतिगत दरों को वर्तमान स्तर पर बनाए रखेगा. अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत थी. अनुमान है कि वर्ष 2019-20 में यह बढ़ कर 3.9 प्रतिशत तक जा सकती है. वर्ष 2018-19 में औसत खुदरा मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत रही.

चालू तिमाही में क्रूड ऑयल के भाव में तेजी के आसार
भारतीय मौसम विभाग ने इस साल मानसून सामान्य रहने की भविष्यवाणी की है लेकिन निजी एजेंसी स्काईमेट ने कहा कि गर्मियों में एल नीनो का प्रभाव 60 प्रतिशत से ऊपर है. इससे मानसून कमजोर रह सकता है. ईरान में तेल का उत्पादन कम होने और अन्य उत्पादक देशों में उनकी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल तेज करने को लेकर अनिश्चितता से चालू तिमाही में कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने रह सकते हैं.

रपट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में आगे चल कर आर्थिक वृद्धि में तेजी आ सकती है और यह 7.4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. 2018-19 में इसके 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक 2019 की तीसरी तिमाही में रेपो में 0.25 प्रतिशत की और कटौती कर सकता है क्यों की मुद्रास्फीति संभवत: 4 प्रतिशत के आस पास सीमित रहेगी, आर्थिक वृद्धि 7.7 प्रतिशत से नीचे रहेगी और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भी मौद्रिक नीति को लेकर नरम रुख बनाए रख सकता है.