close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

रिलायंस ने भुगतान के लिए जमा किए 131 करोड़, एरिक्सन का लेने से इनकार

रिलायंस कम्युनिकेशंस (Rcom) ने स्वीडन की दूरसंचार उपकरण कंपनी एरिक्सन (Ericsson India) के 550 करोड़ रुपये के बकाये के एक हिस्से के भुगतान के लिए उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में 131 करोड़ रुपये जमा किए हैं.

रिलायंस ने भुगतान के लिए जमा किए 131 करोड़, एरिक्सन का लेने से इनकार

नई दिल्ली : रिलायंस कम्युनिकेशंस (Rcom) ने स्वीडन की दूरसंचार उपकरण कंपनी एरिक्सन (Ericsson India) के 550 करोड़ रुपये के बकाये के एक हिस्से के भुगतान के लिए उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में 131 करोड़ रुपये जमा किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को आंशिक भुगतान का निर्देश दिया था. एरिक्सन ने अनिल अंबानी और दो अन्य के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दायर की है. आरकॉम के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, कि आरकॉम ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 131 करोड़ रुपये जमा किए हैं. कंपनी ने अपने परिचालन के लिए रखे धन में यह रकम जामा की है.

जवाब के लिए 4 हफ्ते का समय मिला था
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी और अन्य को एरिक्सन इंडिया प्राइवेट लि. की अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया था. न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अगुवाई वाली पीठ ने अंबानी और अन्य से नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. इससे पहले आर कॉम की तरफ से पेश वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने न्यायालय से एरिक्सन इंडिया के बकाये के भुगतान के संबंध में 118 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी.

एरिक्सन के वकील का राशि स्वीकार करने से इनकार
हालांकि, एरिक्सन के वकील ने यह राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और कहा कि 550 करोड़ रुपये की पूरी बकाया राशि जमा की जानी चाहिए. इस पर पीठ ने आर कॉम को रजिस्ट्री में इस राशि का डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने का निर्देश दिया था. गौरतलब है कि एरिक्सन इंडिया ने 550 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का कथित तौर पर पालन नहीं करने पर शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

एरिक्सन ने याचिका में अनिल अंबानी और दो अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग करने के साथ ही उन्हें बकाया भुगतान करने तक सिविल जेल में हिरासत में रखने की भी मांग की है. इसके अलावा उसने अनिल अंबानी, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के चेयरमैन सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड की चेयरपर्सन छाया विरानी के देश छोड़ने पर रोक लगाने की भी गृह मंत्रालय से मांग की है. उच्चतम न्यायालय ने 23 अक्टूबर के आदेश में रिलायंस कम्युनिकेशंस को 15 दिसंबर तक बकाया भुगतान करने को कहा था.