क्या दिवाली पर जलाने को मिलेंगे ग्रीन पटाखे? सरकार ने दिया बड़ा बयान

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने सोमवार को ग्रीन पटाखे तैयार करने का दावा किया. लेकिन, बाजार में इसके उपलब्ध होने के सवाल पर उन्होंने क्या कहा, पढ़ें उनका जवाब.

क्या दिवाली पर जलाने को मिलेंगे ग्रीन पटाखे? सरकार ने दिया बड़ा बयान
केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि देश में पटाखा कारोबार करीब छह हजार करोड़ का है.

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े त्योहार दिवाली के कुछ ही दिन बचे हैं. दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये को देखकर केंद्र सरकार ने ग्रीन पटाखों को लेकर एक बयान जारी किया है. बयान में दावा किया गया कि ऐसी तकनीक तैयार कर ली गई है, जिससे ग्रीन पटाखे मौजूदा पटाखों के मुकाबले 30 फीसद तक सस्ते होंगे और करीब 50 फीसद प्रदूषण कम करेंगे. सरकार की ओर से यह बयान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की ओर से आया है.

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे फोड़ने के लिए रात आठ बजे से 10 बजे तक का समय तय करने संबंधी अपने आदेश में बदलाव किया है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें अपने हिसाब से पटाखे फोड़ने के लिए दो घंटे का समय तय कर सकती है. पिछली सुनवाई में देश की सबसे बड़ी अदालत ने शाम आठ से रात 10 बजे तक पटाखे फोड़ने का समय निर्धारित किया था, लेकिन अब राज्य सरकारें अपने हिसाब से तय करेगी कि वह कौन से दो घंटे निर्धारित करना चाहती है. कोर्ट ने कहा कि अगर सुबह-शाम दोनों समय पटाखे की परंपरा है, तो दोनों वक्त 1-1 घंटा दिया जा सकता है. ग्रीन पटाखे जलाने की शर्त केवल दिल्ली-NCR में लागू होंगे. देश के बाकी हिस्सों में सामान्य पटाखे फोड़े जा सकेंगे.

लेकिन क्या इस इस बार दिवाली पर ग्रीन पटाखे चलाने को मिलेंगे?
इसके लिए अभी कुछ और इन्तजार करना होगा, क्योकि अभी इसके वाणिज्यिक उत्पादन की मंजूरी मिलनी बाकी है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने सोमवार को पत्रकारों से चर्चा में ग्रीन पटाखे तैयार करने का दावा किया. लेकिन, बाजार में इसके उपलब्ध होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब देना मुश्किल होगा.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैंने अपना काम कर दिया है. बाकी अब पटाखा बनाने वाली कंपनियों व उन एजेंसियों को भी आगे आना होगा, जो लाइसेंस आदि देने का काम करती हैं." हालाँकि, उन्होंने पटाखा बनाने वाली कुछ कंपनियों के साथ उन्होंने इसे लेकर संपर्क करने का दावा किया. एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में पटाखा कारोबार करीब छह हजार करोड़ का है. इसमें करीब पांच लाख लोग काम करते हैं. ऐसे में इस पूरे कारोबार को रातोरात ग्रीन तकनीक में बदलना संभव नहीं है. लेकिन बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

उन्होंने बताया कि सीएसआईआर ( वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ) के वैज्ञानिकों ने नौ महीनों की कड़ी मेहनत के बाद इसे तैयार करने में सफलता हासिल की है. उन्होंने आने वाले दिनों में ई - पटाखों से जुडी तकनीक लॉन्च करने का दावा किया। उन्होंने बताया कि इस दिशा में निरी ( राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संसथान ) और सीएसआईआर के दुसरे संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। इस बीच इस पूरी परियोजना का नेतृत्व कर रही निरी की वैज्ञानिक डॉक्टर साधना ने बताया कि करीब तीन हफ्ते के लम्बे परीक्षण के बाद इसे पूरी तरह से खरा पाया गया है.