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बदल सकता है इंश्‍योरेंस क्‍लेम करने का नियम, आश्रितों को किश्तों में मिलेगा पैसा

अगर आपने भी अपना या अपने परिवार के किसी मेंबर का इंश्योरेंस करा रखा है तो यह खबर आपके काम की है. दरअसल उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में बीमा कंपनियों से इंश्योरेंस क्लेम का पैसा हर महीने किश्तों में मिलें.

बदल सकता है इंश्‍योरेंस क्‍लेम करने का नियम, आश्रितों को किश्तों में मिलेगा पैसा

नई दिल्ली : अगर आपने भी अपना या अपने परिवार के किसी मेंबर का इंश्योरेंस करा रखा है तो यह खबर आपके काम की है. दरअसल उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में बीमा कंपनियों से इंश्योरेंस क्लेम का पैसा हर महीने किश्तों में मिलें. इंश्योरेंस रेग्युलेटर (IRDAI) की समिति की तरफ से सुझाव दिया गया है कि हर महीने किश्तों में मुआवजा मिलने से आश्रितों के लिए लंबी मियाद तक एक नियमित आय का जरिया मुहैया हो पाएगा. ऐसा हुआ तो बीमा कंपनियों पर भी एक मुश्त मुआवजा देने का बोझ भी कम होगा.

परिवार को लंबे समय तक मिलेगी मदद
आईआरडीएआई की सिफारिशों पर अमल के बाद नया नियम लागू होता है तो उम्मीद की जा रही है कि बीमा कंपनियां प्रोडक्ट्स की शर्तों में इसी आधार पर बदलाव करेंगी. इस बारे में जी मीडिया संवाददाता ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के प्रोडक्ट हेड पुनीत साहनी से बातचीत की. उन्होंने बताया कि आईआरडीए की कमेटी ने सुझाव दिया है कि एकमुश्त क्लेम की राशि वाले भुगतान को किश्तों में किया जाएगा. ऐसा होता है तो लंबी मियाद तक पॉलिसी होल्डर के परिवार को राहत मिल सकती है.

इंश्योरेंस कंपनियों का ज्यादा खर्चा नहीं बढ़ेगा
कंपनियों का भी मानना है कि इस तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं और इसमें इंश्योरेंस कंपनियों के लिए ज्यादा खर्चा नहीं बढ़ेगा. अगर नया नियम लागू होता है तो पर्सनल एक्सीडेंट और लाइफ इंश्योरेंस कवर की रकम आश्रितों को किश्तों में मिलेगी. दूसरी तरफ बीमा कंपनियों पर भी एकमुश्त भुगतान का दबाव कम होगा. हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि पॉलिसी में एकमुश्त या किश्तों में पैसा लेने का विकल्प मिलेगा.

कमेटी की तरफ से यह सुझाव कई ऐसे मामलों को देखने के बाद दिया गया है जिनमें पॉलिसी होल्डर के परिवार को लंबी अवधि तक पैसे की जरूरत होती है. अभी पॉलिसी होल्डर की मौत के बाद उसके आश्रितों को कंपनियों की तरफ से एकमुश्त पैसा दे दिया जाता है. इससे पहले यह भी खबर आई थी कि इंश्यारेंस कंपनियां आपके मोबाइल नंबर को ही इंश्यारेंस पॉलिसी का नंबर बना सकती हैं.