अटल को दुखी देख दिलीप कुमार ने लगाई थी PAK PM की क्लास, शत्रुघ्न को पड़ी थी लताड़

फिल्मों से अटल बिहारी वाजपेयी को इतना लगाव था कि उन्होंने हेमा मालिनी की 'सीता और गीता' को 25 बार देखा था. यह बात खुद हेमा मालिनी ने एक कार्यक्रम के दौरान कही थी.

अटल को दुखी देख दिलीप कुमार ने लगाई थी PAK PM की क्लास, शत्रुघ्न को पड़ी थी लताड़
फोटो साभार : इंस्टाग्राम

नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की आज (25 दिसंबर) जयंती है. वाजपेयी सिर्फ राजनीति में ही नहीं कविताओं और फिल्मों में भी खासी रुचि रखते थे. उनके और बॉलीवुड हस्तियों के किस्से काफी मशहूर हैं. फिल्मों से वाजपेयी को इतना लगाव था कि उन्होंने हेमा मालिनी की 'सीता और गीता' को 25 बार देखा था. यह बात खुद हेमा मालिनी ने एक कार्यक्रम के दौरान कही थी.हेमा ने इसी किस्से का जिक्र करते हुए बताया था कि जब वह अटल बिहारी वाजपेयी से पहली बार मिलने पहुंचीं तो वह हिचकिचा रहे थे. वहां मौजूद एक महिला ने बताया कि अटल जी आपके बड़े प्रशंसक है. आपको अचानक सामने पाकर हिचकिचा रहे हैं और आपकी फिल्म 'सीता और गीता' उन्होंने 25 बार देखी है.

अटल को दुखी देख दिलीप कुमार ने लगा दी नवाज शरीफ की क्लास
यही नहीं अटल बिहारी वाजपेयी के दिलीप कुमार से भी बहुत अच्छे रिश्ते थे. अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा के बाद ऐसा लग रहा था कि दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्ते हो जाएंगे, लेकिन करगिल में घुसपैठ के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई. अटल उस समय नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ से बहुत नाराज थे. अटल ने नवाज शरीफ को फोन किया था और दिलीप कुमार से भी उनकी बात करवाई थी. दिलीप ने कहा था कि आपने अमन का समर्थक होने की बात कही थी, हम आपसे जंग की उम्मीद नहीं करते. तनाव के हालात में भारतीय मुसलमान बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं, इसलिए हालात काबू में करने की मेहरबानी कीजिए. पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने अपनी किताब 'नीदर ए हॉक नॉर ए डव' में दिलीप कुमार वाले इस किस्से का ज़िक्र किया है.

भरी रैली में शत्रुघ्न को कर दिया था शर्मिंदा
एक बार वाजपेयी पटना के गांधी मैदान में एक रैली को संबोधित कर रहे थे और लोग उन्हें बहुत आदर से सुन रहे थे. इसी बीच शत्रुघ्न मंच पर पहुंच गए. भीड़ ने शत्रुघ्न के लिए नारे लगाने शुरू कर दिए. वाजपेयी से भाषण छोटा करने की डिमांड की गई. शत्रुघ्न के समर्थक लगातार उनके लिए नारे लगा रहे थे. इसके बाद वाजपेयी ने मंच से कहा कि मैं जानता हूं कि ये मंच बिहारी बाबू के लिए है, लेकिन बिहारी बाबू भी जानते हैं कि ये मंच अटल बिहारी के लिए है. इसके बाद भीड़ शांत हो गई. शत्रुघ्न ने माफी मांगी और अपने समर्थकों से शांत रहने को कहा. शत्रुघ्न और अटल का ये किस्सा काफी मशहूर है. राजनीति के जानकार बड़े चाव से इस किस्से को सुनाते हैं.