जम्मू कश्मीर में 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम शुरू, ग्रामीणों की शिकायतें दूर करने पहुंच रहे अफसर

कश्मीर के हर जिले में सोमवार (25 नवंबर) को 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम शुरू किया गया. उतरी कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामुला, सेंट्रल कश्मीर के गंदेरबल, श्रीनगर, बडगम, दक्षनी कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई

जम्मू कश्मीर में 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम शुरू, ग्रामीणों की शिकायतें दूर करने पहुंच रहे अफसर
जम्मू कश्मीर में 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम शुरू. फाइल तस्वीर

श्रीनगर: अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने लोगों तक पहुंचने के लिए 'बैक टू विलेज' का दूसरा चरण शुरू किया है. इसका उद्देश्य आम आदमी के सामने आने वाले मुद्दों का समाधान करना और गांवों में विकास की रफ्तार को तेज करना है. शासन को लोगों के घर-घर तक पहुंचाने और पंचायतों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके तहत पांच हजार अफसर जम्मू-कश्मीर में 43000 पंचायतों में जायेंगे और लोगों की शिकायतों को सुनेंगे.

कश्मीर के हर जिले में सोमवार (25 नवंबर) को यह कार्यक्रम शुरू किया गया. उतरी कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामुला, सेंट्रल कश्मीर के गंदेरबल, श्रीनगर, बडगम, दक्षनी कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई.

कार्यक्रम में पंचायतों को मज़बूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के प्रयासों की रफ़्तार को तेज करना शामिल है. सभी क्षेत्र में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के विचार को लागू करने और लागू करने के लिए सरकारी अधिकारियों को गांवों में जाना होगा. यह कोशिश जम्मू कश्मीर के दूर-दराज़ इलाकों तक पहुंचने का भी है, जहां अधिकारी एक दिन और एक रात बिताएंगे ताकि हालात का लेखा-जोखा पूरी तरह से हासिल कर सकें.

गांवों के लोगों का कहना है कि वे 'बैक टू विलेज' के कार्यक्रम से खुश तो हैं, मगर काम होना चाहिए. हालांकि वे उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार कुछ बेहतर होगा. हर जिले में लोग 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम में पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं. अधिकारियों ने भी लोगों को सुना और उनसे सलाह ली और उन्हें सलाह दी.

दरबार में आए सरपंच समीर भट ने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि पंचायतें सशक्त हैं. सत्ता संसद और विधानसभा के गलियारों से लेकर आम आदमी तक आ रही है. एक स्थानीय होने के नाते, मैं यहां के मुद्दों और समस्याओं को जानता हूं, जिसके बारे में मैंने अधिकारियों को कहा और अधिकारियों ने धैर्य से सुना है.'

स्थानीय निवासी नजीर अहमद ने कहा, 'मैं आशान्वित हूं और अधिकारियों ने वादा किया है कि वे हमारे मुद्दों को सुनने के लिए एक महीने के बाद फिर से आएंगे. मुझे उमीद है कि इस बार कुछ ज़रूर होगा.'

सरकार का कहना है कि वे केंद्र की लाभदायक योजनाओं के बारे में आम जनता को शिक्षित करके ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को दोगुना करने का प्रयास कर रही है. यह कार्यक्रम श्रीनगर में भी हुआ जहां भारी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया. इस मौके पर जिला डिप्टी कमिश्नर भी मौजूद रहे. जिला डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी ने काफी ध्यान से लोगों की शिकायतों को सुना और उन्हें आश्वासन दिलाया कि जल्द ही सबकी शिकायतों का निवारण होगा.

डीसी शाहिद चौधरी ने इस अवसर पर कहा, 'हम लोगों के बीच पहुंचकर बातचीत करते हैं, जिसका मकसद यह है कि लोगों और प्रशासन के बीच किसी प्रकार की दूरी न रहे. लोगों के सुझाव और शिकायतों को सुना गया.'   

'बैक टू विलेज -2' 25 से 30 नवंबर तक का आयोजन किया जा रहा है. इसके ज़रिये लगभग 27 हज़ार करोड़ रुपए खर्च कर गावों में विकास की रफ़्तार को तेज़ किया जायेगा.

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