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एशिया की पहली दिव्यांग योग टीम, नन्हे दिव्यांग योगी बने देश की शान

दांतों तले उंगलियां दबा देने पर मजबूर कर देने वाले इन स्टेप्स को खुली आंखों के साथ करना भी काफी मुश्किल होता है. ऐसे में बंद आंखों के साथ इसे मुमकिन कर दिखाना किसी चमत्कार से कम नहीं है.

एशिया की पहली दिव्यांग योग टीम, नन्हे दिव्यांग योगी बने देश की शान
हेमंत शर्मा बताते है कि 'इन बच्चो में जज़्बा बहुत ज़्यादा है, सीखने से कभी नही हटते इनको देख कर मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है, ये लोग पूरी दुनिया के लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं.

नई दिल्ली: योग आज के समय में हर कोई जानता है और करता भी है. लेकिन, योग के जिन आसनों को करने में अच्छे-अच्छे लोग मुश्किल में पड़ जाते हैं, उन आसन को आसानी से कर लेते हैं ये नन्हे दिव्यांग योगी. दिल्ली में रहने वाले बच्चों की यह भारत की पहली नेत्रहीन 'एक्रोबेटिक योग' टीम है, जो सभी को पहली नज़र में हैरान कर देती है. बिना रोशनी के जीवन के रंगों को देखना नामुमकिन है, लेकिन अन्धकार में जीते इन बच्चों का जीवन योग से रोशन हो रहा है.

दरअसल, ये बच्चे करते है- एक्रोबेटिक योग. यह एक्रोबेटिक योग एक ऐसी कला है, जिसमें दो लोगों की आपसी समझ और बीच का तालमेल बेहद ज़रूरी होता है और इन बच्चों को बंद आंखों के साथ एक-दूसरे पर भरोसा करना होता है. इस टीम के कप्तान जुनेद बताते हैं कि हम देख तो नही पाते पर छू कर स्टेप्स समझ जाते है और अपने लोगों के साथ तालमेल बैठा लेते हैं. भरत नाम के टीम मेंबर बताते है कि मेरे माता-पिता को पहले क्या करूंगा ज़िन्दगी में, इसका डर  था पर अब योग के सीखने के बाद वो और मैं दोनों खुश हैं. 

 

दांतों तले उंगलियां दबा देने पर मजबूर कर देने वाले इन स्टेप्स को खुली आंखों के साथ करना भी काफी मुश्किल होता है. ऐसे में बंद आंखों के साथ इसे मुमकिन कर दिखाना किसी चमत्कार से कम नहीं है. इन बच्चों ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि दिव्यांगों की छठी इंद्री (छठा सेंस) उनकी कमी की सारी कसर पूरी कर देती है. इन बच्चों को एक्रोबेटिक योग में महारत दे रहे है योगा टीचर हेमंत शर्मा. हेमंत की मेहनत के कारण इन बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है और इनकी कलाबाज़ियों को समाज में सम्मान मिल रहा है.  

हेमंत शर्मा बताते है कि इन बच्चो में जज़्बा बहुत ज़्यादा है, सीखने से कभी नही हटते इनको देख कर मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है, ये लोग पूरी दुनिया के लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं. इन बच्चों का एक्रोबेटिकोक योग इनके जीवन का अन्धकार मिटा चुका है और साथ ही दुनिया में सम्मान भी दिला रहा है. ये स्पेशल एक्रोबेटिक टीम फर्स्ट नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड, अनमोल अवॉर्ड के साथ-साथ फर्स्ट योगा ओपन नेशनल चैम्पियनशिप, दिल्ली स्टेट योगा चैम्पियनशिप जैसी बहुत सी प्रतियोगिताओं में सामान्य वर्ग के छात्रों को कड़ी टक्कर दे चुकी है.