अदालत ने धोया वतन से गद्दारी का दाग, अब नई जिंदगी के लिए संघर्ष

फ़रहत का नाम 2016 में उस वक़्त सुर्खियों में आया था, जब दिल्ली की क्राइम ब्रांच की टीम ने समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे मुनव्वर सलीम के सरकारी आवास से उनको गिरफ़्तार किया था.

अदालत ने धोया वतन से गद्दारी का दाग, अब नई जिंदगी के लिए संघर्ष

नई दि‍ल्‍ली: कोर्ट के आदेश के कागज़ दिखाकर फ़रहत ये बताते हुए रोने लगते हैं कि जब अक्टूबर 2016 में उनको दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गिरफ़्तार किया तो उनकी माँ ज़िंदा थी, लेकिन सितंबर 2018 में जब अदालत ने उनकी बेगुनाही पर मुहर लगाकर बाइज़्ज़त बरी किया तब उनकी माँ दुनिया को अलविदा कह चुकी थीं. माँ ने बेटे को दुनिया में पाकिस्तानी जासूस का इल्जाम लगाकर जेल में जाते हुए देखा, लेकिन उसके दामन से दाग हटता हुआ ना देख पाई.

फ़रहत का नाम 2016 में उस वक़्त सुर्खियों में आया था, जब दिल्ली की क्राइम ब्रांच की टीम ने समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे मुनव्वर सलीम के सरकारी आवास से उनको गिरफ़्तार किया था. फ़रहत, पूर्व सांसद मुनव्वर सलीम के निजी सचिव थे और उनके साथ ही सरकारी आवास में रहा करते थे. फ़रहत पर इल्ज़ाम लगाया गया था, कि पाकिस्तानी दूतावास के एक राजनयिक ने उनका नाम लिया था, वो उनके लिए जासूसी करता है, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई थी. हालांकि दो साल तक तिहाड़ में रहे फ़रहत के खिलाफ अदालत में क्राइम ब्रांच आरोप लगाने लायक भी सबूत नहीं जुटा पाई, जिसके बाद अदालत ने कहा कि फ़रहत पाकिस्तानी जासूस नहीं बल्कि बेगुनाह हैं और अदालत ने उन्हें बाइज़्ज़त बरी कर दिया.

दो साल तक पाकिस्तानी जासूस होने का दाग दामन पर लेकर जीने वाले फ़रहत की ज़िंदगी में अदालत के आदेश से नई राह तो खुली, लेकिन मुल्क के साथ गद्दारी के इल्जाम ने उनके परिवार को बदनामी का बड़ा दाग  दे दिया. परिवार की भूखों मरने की नौबत आ गई गुजारा करना मुश्किल हो गया. माँ समाजिक तानों और बदनामी को बर्दाश्त ना कर सकी और चल बसी.

फ़रहत को बाइज़्ज़त बरी हुए करीब 8 महीने हो चुके हैं, लेकिन उनकी ज़िंदगी का संघर्ष लगातार जारी है. फ़रहत अपनी मुश्किलों को बयां करते हुए बताते है कि जेल जाने के बाद परिवार आर्थिक तौर पर टूट गया. आज भी हालात ये हैं कि नौकरी नहीं है, और कोई जल्दी से यकीन तक नहीं करता, क्योंकि जब गिरफ्तारी हुई थी तब मीडिया ने उन्हें पहले दिन से ही पाकिस्तान का जासूस कहकर पुकारा था, और टीवी अखबारों में तस्वीरें दिखाई थी, लेकिन बाइज़्ज़त बरी होने के बाद उनकी खबर को सही से जगह भी नहीं दी गयी.

फ़रहत का सम्बंध उत्तरप्रदेश के कैराना से है, वो कैराना में नामित पार्षद रह चुके हैं और वक़्फ़ बोर्ड में भी उनके पास पद रहा है. फ़रहत कहते है कि क्राइम ब्रांच ने जिन तीन लोगों के साथ उनका रिश्ता दिखाया था वो उनको जानते तक नहीं और जिस पाकिस्तानी राजनयिक के आरोप पर उनकी गिरफ़्तार की बात कही गयी थी उनको भारत सरकार ने बिना बयान दर्ज किए ही पाकिस्तान भेज दिया था. अदालत ने भी तमाम बातों को सुना समझा और इंसाफ किया."

सपा के पूर्व सांसद मुनव्वर सलीम का पिछले दिनों निधन हो गया जिनके निजी सचिव के तौर पर फ़रहत काम किया करते थे इसलिए तमाम मुश्किलो से पार पाकर फ़रहत फिर से ज़िंदगी की शुरुआत करने जा रहे है, और दिल्ली में आकर नए तरीके से उनका संघर्ष जारी है, क्योंकि अतीत की बदनामी के दाग अदालत ने धो दिए है, अब उन्हें उम्मीद है हालात भी पहले जैसे हो जाएंगे.

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