मोरनी गैंगरेप केस: पुलिस ने WhatsApp पर कराई आरोपी की शिनाख्त, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

डीजीपी यादव ने कोर्ट को जानकारी दी कि जिन अधिकारियों ने इस तरह की कार्यवाही की थी उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं. 

मोरनी गैंगरेप केस: पुलिस ने WhatsApp पर कराई आरोपी की शिनाख्त, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
फाइल फोटो

चंडीगढ़: मोरनी गैंगरेप मामले पर पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हरियाणा के डीजीपी मनोज यादव हाई कोर्ट में पेश हुए. इस दौरान कोर्ट में व्हाट्सएप पर आरोपी की शिनाख्त करवाने पर पुलिस अधिकारियों को सफाई देनी पड़ी. वहीं, डीजीपी ने हाई कोर्ट को जानकारी दी कि मामले की जांच के लिए नई एसआईटी का गठन किया गया है और जिन जांच अधिकारियों ने व्हाट्सएप पर आरोपी की शिनाख्त करवाई थी उनपर जांच कर कार्यवाही के आदेश दे दिए है. मामले की अगली सुनवाई 3 अप्रैल को होगी.

इस बीच मोरनी के बहुचर्चित गैंग रेप मामले में एक आरोपी की व्हाट्सएप पर शिनाख्त करवाए जाने के मामले में हरियाणा के डीजीपी को हाईकोर्ट में पेश होकर सफाई देनी पड़ी. याचिकाकर्ता के वकील सुखविंदर सिंह नारा ने बताया कि बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा के डीजीपी मनोज यादव ने कोर्ट में पेश होकर इसके लिए माफी मांगी. 

डीजीपी यादव ने कोर्ट को जानकारी दी कि जिन अधिकारियों ने इस तरह की कार्यवाही की थी उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं. उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी. डीजीपी ने हाईकोर्ट को बताया कि जांच के लिए नई एसआईटी का गठन कर दिया गया है और वह शीघ्र ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंप देंगे. डीजीपी ने इस मामले में अब तक की गई जांच की रिपोर्ट भी कोर्ट में दी. सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई 3 अप्रैल तक स्थगित करते हुए डीजीपी को अगली सुनवाई पर जांच रिपोर्ट देने को कहा.

बता दें कि इस मामले के 40 आरोपियों में से एक आरोपी अजय कुमार द्वारा एडवोकेट सुखविंदर सिंह नारा के जरिये अपनी नियमित जमानत की मांग को लेकर दायर याचिका में आरोपी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसका नाम इस मामले में दर्ज एफआईआर में था ही नहीं, न ही पीड़ित या अन्य किसी भी आरोपी ने उसका नाम लिया था. इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने सिर्फ पीड़िता को व्हाट्सएप के जरिये उसकी फोटो दिखा उसे नामजद कर गिरफ्तार कर लिया था. जबकि किसी भी कानूनी प्रावधान के तहत व्हाट्सएप के जरिये शिनाख्त करवाए जाने का कोई नियम ही नहीं है. 

इस मामले में आरोपी के वकील सुखविंदर सिंह नारा ने डीजीपी द्वारा पेश किए गए जवाब पर हैरानी जताते हुए कहा कि एक तरफ डीजीपी अपने जवाब में कह रहे हैं कि जांच अधिकारी राजेश कुमारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं लेकिन दूसरी तरफ डीजीपी ने हाईकोर्ट में अपने जवाब में यह भी कहा कि नई एसआईटी गठित कर दी है लेकिन उस एसआईटी में जांच अधिकारी राजेश कुमारी को भी शामिल किया गया है. नारा ने कहा डीजीपी ने कोर्ट को यह भी बताया कि मधुबन पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में, आरोपियों की शिनाख्त कैसे की जाए इसके लिये पुलिस को ट्रेनिंग भी दी जाएगी.

वहीं, मोरनी गैंगरेप की पीड़िता बुधवार को चीफ जस्टिस के पास दरख्वास्त लेकर पहुंची. पीड़िता हाथ में बैनर लिए हाई कोर्ट पहुंची उन्होंने कहा पुलिस उनपर केस वापिस लेने का दबाब बना रही है और उसके पति की जमानत के लिए भी पुलिस पैसे मांग रही है. हालांकि, डीजीपी द्वारा बनाई नई एसआईटी पर उन्होंने संतुष्टि जताई है. उन्होंने कहा अगर एसआईटी निष्पक्षता से जांच करेगी तो उन्हें इंसाफ मिल सकेगा. पीड़िता ने चीफ जस्टिस के नाम एक पत्र भी लिखा है. गौरतलब है हाईकोर्ट ने ही इस मामले को लेकर स्वत: संज्ञान लिया था.