जेलों में पति-पत्नी मुलाकात की अनुमति के लिए दायर की गई याचिका
Advertisement
trendingNow1534119

जेलों में पति-पत्नी मुलाकात की अनुमति के लिए दायर की गई याचिका

तर्क यह दिया गया है कि इस तरह का कदम जेल में कैद लोगों व सलाखों के पीछे बंद जीवनसाथी के मानवाधिकार व मौलिक अधिकारों को पूरा करने के लिए जरूरी है.

.(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय में जेलों में पति-पत्नी मुलाकात की अनुमति की मांग को लेकर एक याचिका दायर की गई है. तर्क यह दिया गया है कि इस तरह का कदम जेल में कैद लोगों व सलाखों के पीछे बंद जीवनसाथी के मानवाधिकार व मौलिक अधिकारों को पूरा करने के लिए जरूरी है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति बृजेश सेठी की खंडपीठ ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार और कारागार महानिदेशक से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दी.

सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अमित साहनी ने वकील एन. हरिहरन के माध्यम से याचिका दायर की. हरिहरन ने अदालत से कहा कि दांपत्य मुलाकातों के अधिकारों से इनकार करना दिल्ली की जेलों में कैदियों के मूलभूत अधिकारों के साथ-साथ मानवाधिकारों के अधिकारों को निष्प्रभावी करना है.

दांपत्य मुलाकात की अवधारणा एक जेल के कैदी को वैध जीवनसाथी के साथ एक विशेष अवधि निजी तौर पर बिताने की अनुमति देता है, जिसके दौरान वे यौन गतिविधियों में भी संलग्न हो सकते हैं.

Trending news