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गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद: पत्रकार छत्रपति के बेटे ने कहा- सजा से संतुष्ट हूं

साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा भुगत रहे गुरमीत राम रहीम को अब ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.

गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद: पत्रकार छत्रपति के बेटे ने कहा- सजा से संतुष्ट हूं
16 सालों के बाद रामचंद्र छत्रपति के परिवार को इंसाफ मिला.

सिरसा: हरियाणा के सिरसा में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोषियों को सजा सुनाई. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम, किशन लाल, निर्मल सिंह और कुलदीप सिंह को रामचंद्र छत्रपति की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है. कोर्ट के फैसले के बाद अब गुरमीत सिंह और उसके तीनों अन्यायी यानि निर्मल सिंह, कुलदीप और कृष्ण लाल सारी उम्र जेल की सलाखों के पीछे रहेंगे और उन्हें ताउम्र जेल में बितानी होगी. अदालत ने अपने फैसले में चारों अपराधियों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना अदा न करने की सूरत में उन्हें दो-दो साल अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. सीबीआई अदालत ने आर्म्स एक्ट के तहत भी कृष्ण लाल और निर्मल सिंह को तीन-तीन साल की सजा और 5-5 हजार जुर्माना किया है.

साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा भुगत रहे गुरमीत राम रहीम को अब ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा. पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने वीरवार को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के मर्डर केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गुरमीत राम रहीम और तीन दूसरे अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुना दी है.

सीबीआई के अधिवक्ता एचपीएस वर्मा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच के फैसले के तहत चारों दोषियों को सारी उम्र जेल में रहना होगा. उन्होंने कहा कि गुरमीत राम रहीम की सजा पहले से चल रही 20 साल की सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी. सीबीआई के अधिवक्ता ने बताया कि आर्म्स एक्ट के तहत किशन लाल और निर्मल सिंह को 3-3 साल की अतिरिक्त सजा दी गई औऱ 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है. उन्होंने कहा जुर्माना नही भरने पर इन दोनों को 3-3 महीने की सज़ा अतिरिक्त काटनी होगी.

छत्रपति रामचंद्र के बेटे अंशुल और उसके परिवार में पिता के हत्यारों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए 16 साल से भी ज्यादा संघर्ष किया है. पंचकूला की सीबीआई अदालत से फैसला आने के बाद अंशुल छत्रपति संतुष्ट नजर आए उन्होंने कहा कि राम रहीम और उनके तीन गुर्गों ने उनके पिता की जो हत्या की थी उस मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है और वे संतुष्ट हैं. इसके साथ ही अंशुल छत्रपति ने यह भी कहा कि अब इस फैसले पर कोई अपील नहीं करना चाहते. वहीं राम रहीम के पूर्व ड्राइवर और इस मामले में गवाही देने वाले खट्टा सिंह ने भी कहा कि आखिरकार न्याय की जीत हुई है. उन्होंने कहा कि जो लोग उनको झूठा बताते थे कोर्ट के फैसले ने साबित कर दिया है कि वह झूठे नहीं थे बल्कि राम रहीम गुनहगार था.

अखबार निकालते थे रामचंद्र
रामचंद्र छत्रपति सिरसा में पूरा सच नाम का दैनिक अखबार निकालते थे. उन्होंने 2002 में अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा की गतिविधियों पर खबरें लिखीं. रेप पीड़ित साध्वी ने अपने साथ हुई घटना का खुलासा करते हुए जो चिट्ठी लिखी थी. उस चिट्ठी को छत्रपति ने अपने अखबार में छापा और राम रहीम के खिलाफ एक तरह से जंग छेड़ दी थी. 2002 में एक गुमनाम चिट्ठी को अपने अखबार में प्रकाशित किया था. इस चिट्ठी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भी भेजा गया. जिस पर संज्ञान लेते हुए 24 सितंबर 2002 को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया. सीबीआई जांच के आदेश के एक महीने बाद यानि 24 अक्टूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर सिरसा में जानलेवा हमला हुआ था. छत्रपति को घर के बाहर दो शूटर्स ने 5 गोलियां मारी थी. 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. तबसे परिवार इंसाफ के लिये अदालती जंग लड़ रहा है और अब 16 सालों के बाद उन्हें इंसाफ मिला.