कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लगाया गुजरात की अनदेखी का आरोप

कांग्रेस के मुताबिक गुजरात के कुछ इलाके सूखा ग्रस्त हुए थे, जिसके लिए केंद्र से 1725 करोड़ सहायता की मांग की थी, जो अभी तक मुहैया नहीं कराई गई

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लगाया गुजरात की अनदेखी का आरोप
केंद्र ने गुजरात के लिए पिछले 2 साल में कोई फंड रिलीज नहीं किया गया

नई दिल्ली: 'केंद्र सरकार की गुजरात को थप्पड़' के स्लोगन 2014 ने चुनाव समय मे गुजरात मे बीजेपी ने काफी प्रचलित किया था. जो फिर एक बार गुजरात विधानसभा गृह में गूंज रहा है. हालांकी फर्क ये है इस बार ये स्लोगन बीजेपी नहीं कांग्रेस बोल रही है. जी हां कांग्रेस की माने तो पिछले 5 वर्षों में गुजरात को केंद्र सरकार ने अन्याय किया है. जिसको आंकड़ो और तथ्यों के साथ कांग्रेस के सदन में रखा.

कांग्रेस की मानें तो 2013 से गुजरात के 14 से ज्यादा सवाल की फाइल केंद्र में पेंडिंग है, जो बीजेपी सरकार होने बावजूद भी पूर्ण नहीं हुए. सबसे चौंकाने वाली बात ये है की राज्य सरकार ने इन मुद्दों को लेकर पिछले 2 वर्ष में कोई मांग तक नहीं की. 2014 के बाद देश भर में अनेक शहरों के नाम बदले गए पर अहमदाबाद का नाम कर्णावती नहीं हुआ जो बहुत पुरानी मांग है. बीजेपी ने भी एक वक्त इस मुद्दे को लेकर काफी हल्ला किया था. पिछले 2 वर्ष में राज्य सरकार ने इस मुद्दे को लेकर एक भी दरखास्त केंद्र में नहीं रखी.

उसी तरह अहमदाबाद को मेट्रो सिटी का दर्जा मिलना चाहिए ये भी एक वक्त की बीजेपी की डिमांड थी पर इस मुद्दे पे भी राज्य सरकार ने पिछले दो वर्ष में कुछ नहीं किया. कांग्रेस ने सदन में ये भी बताया की गुजरात को केंद्र ने मिलने वाली सहायता में भी कमी कर दी है. गुजरात के कुछ इलाके सूखा ग्रस्त हुए थे जिसके लिए केंद्र से 1725 करोड़ सहायता की मांग की थी, जो अभी तक मुहैया नहीं कराई गई.

साथ ही में राष्ट्रीय शहरी आजीविका अभियान अंतर्गत भी 2017-18 में कोई सहाय गुजरात को ना मिली होने का आंकड़े बयान कर रहे है. सरहद में देश के जवान बलिदान दे रहे है उसमें गुजरात के भी सपुतो की शहादत हुई है परंतु वीर मेधमया पुरस्कार 2 वर्ष में एक भी परिवार को दिया नहीं गया. देश भर की जेलों को आधुनिक बनाने के लिए भी केंद्र में से फंड देने का प्रावधान है पर पिछले 2 वर्ष में गुजरात मे इसके लिए कोई फंड रिलीज नहीं किया गया.

वहीं अगर बात करे केंद्र सरकार की तो और के कमी की गई सहाय की तो सबसे बड़ा आंकड़ा पोलिस और अन्य दलों के आधुनिकीकरण के लिए चल रहे राष्ट्रीय अभियान अंतर्गत केंद्र सरकार की सहाय में हुई कमी है. वर्ष 2013-14 में UPA के शासन में 78.43 करोड़ रिलीज किए गए थे, जिसमें 2017-18 में 50% कमी कर के 27.073 करोड़ कर दी गई. जबकि वर्ष 2017-18 और 2018-19 में इसका आवंटन ही नही किया गया. 

इसी तरह क्राइम एन्ड क्रिमीनल सिस्टम डेवलपमेन्ट के लिए भी केंद्र में से रिलीज हो रही सहायता में लगातार कमी की गई है. 2016 में 16.75 करोड़ फंड रिलीज किया गया था जो 2017 में घटा कर सिर्फ 2.39 करोड़ और 2018 में 2.72 करोड़ की गई है. उसी तरह गुजरात की दरियाई सीमा हमेशा आतंकवादियों के निशाने पर रही है. इसा कारण से साल में 2 बार राज्य कक्षा में केंद्रीय समिति से बैठक होनी चहिए जो पिछले 2 वर्ष में एक ही बार हुए, जो कहीं न कहीं बीजेपी की करनी और कथनी पर सवाल खड़े कर रही है.

इन मुद्दों में बात करते हुए विपक्ष नेता परेश धनानी ने कहा था कि बीजेपी सिर्फ चुनावों के समय एक्टिव होती है. केंद्र में भी बीजेपी होने के बाद भी गुजरात को कोई डिमांड पूर्ण नहीं हुई है जो खुद केंद्र का गुजरात को थप्पड़ है. हालांकि इस बात को भाजपा के प्रदेश प्रमुख जीतू वाघनी ने सिरे स्व खारिज कर दिया था और बताया था कि कांग्रेस को गुजरात और उनकी जनता के लिए कुछ कहने का अधिकार ही नहीं है. कांग्रेस से हमेशा गुजरात के विकास में रोड़े ही डाले है इसलिए जनता ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया. लेकिन आंकड़े ये बात स्पष्ट कर रहे है कि आज भी गुजरात के अहम मुद्दों में निर्णय नहीं आया है.