MP में नहीं मिल रहे टैंकर: 7 दिन में चाहिए 700 टन ऑक्सीजन, जानिए कैसे मैनेज करेंगे सीएम शिवराज

खबर के मुताबिक सरकार द्वारा शनिवार को भी एक टैंकर एयरलिफ्ट कराया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एक्टिव केसों की संख्या का जो अनुमान लगाया गया था, उससे वह काफी तेजी से बढ़ रहा है.

MP में नहीं मिल रहे टैंकर: 7 दिन में चाहिए 700 टन ऑक्सीजन, जानिए कैसे मैनेज करेंगे सीएम शिवराज

भोपाल: बढ़ते कोरोना संक्रमितों की वजह से ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई है. मौजूदा समय में मध्य प्रदेश सरकार के पास 70 ऑक्सीजन टैंकर हैं. सरकार को 7 दिन बाद 700 टन ऑक्सीजन की व्यवस्था करनी है. साथ ही इतनी ही ऑक्सीजन दूसरे राज्यों से भी मंगानी है. जिसके लिए तीन गुना टैंकर की जरूरत पड़ेगी. इसलिए सरकार अब वक्त बचाने के लिए जहाज से ऑक्सीजन टैंकर मंगा रही है. इसी क्रम में शुक्रवार को इंदौर से एक टैंकर जामनगर के लिए एयरलिफ्ट कराया गया है.

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खबर के मुताबिक सरकार द्वारा शनिवार को भी एक टैंकर एयरलिफ्ट कराया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एक्टिव केसों की संख्या का जो अनुमान लगाया गया था, उससे वह काफी तेजी से बढ़ रहा है. इसी तरह से केस बढ़ते तो 23 अप्रैल को 72 हजार 386 केस होते. लेकिन यह 87 हजार से अधिक हो गए. जबकि इस आंकड़े पर मप्र को 27 अप्रैल तक पहुंचना था.

इसी को देखते हुए मंत्री अरविंद भदौरिया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व इस मंत्रालय के सचिव से मुलाकात की. इस दौरान ऑक्सीजन की उलब्धता को लेकर भी चर्चा की गई. सरकारी सूत्रों की मानें तो राज्यों को ऑक्सीजन के अलॉटमेंट के साथ ही अब टैंकरों की उपलब्धता को भी जल्द ही केंद्र सरकार अपने हाथ में लेगी. इसके लिए केंद्र सरकार ऑक्सीजन आयात करने के साथ ही दूसरे देशों से टैंकर भी बुलाने की तैयारी कर रही है. 

प्रदेश सरकार की तरफ से ऑक्सीजन जुटाने के लिए बने प्रदेश स्तरीय टॉस्क फोर्स के सदस्य व औषधि नियंत्रक पी नरहरि ने शुक्रवार को अजीबो-गरीब ट्वीट किया था. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि जान बचाने के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई ज्यादा कैसे कर दें. लिक्विड ऑक्सीजन से भरे टैंकर 50 किमी प्रतिघंटा से ज्यादा की रफ्तार से नहीं चल सकते हैं. हम इनकी स्पीड कैसे बढ़ा दें. इसलिए अब समय बचाने के लिए टैंकरों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है.

वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई चर्चा के बाद कहा था कि प्रदेश में ऑक्सीजन बचाने के लिए 'ऑक्सीजन ऑडिट' की व्यवस्था की गई है. इसके लिए सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन के किफायती उपयोग के लिए कहा गया है. 

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आपको बता दें कि प्रदेश के वर्तमान में जो हालात हैं, उसके हिसाब से तुरंत 30 से 50 टैंकर तुरंत चाहिए. तभी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है. वहीं, प्रदेश में बेड और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइपलाइन का भी कार्य शुरू हो गया है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जिला अस्पतालों के 2 हजार 302 बैड्स में से 603 बिस्तरों तक की पाइप लाइन बिछ गईं हैं.

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