रायपुरः ईओडब्ल्यू को सौंपी गई ई-टेंडरिंग मामले की जांचईओडब्ल्यू

छत्तीसगढ़ सरकार ने सीएजी (कैग) की रिपोर्ट में ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में पारदर्शिता के अभाव की जानकारी मिलने के बाद मामले को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दिया है. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने 4601 करोड़ रूपए की निविदाओं के दौरान ई-खरीद प्रणाली में पारदर्शिता के अभाव की जानकारी के बाद इसकी जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा है. अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से प्राप्त प्रतिवेदन को पटल पर रखा था.

रायपुरः ईओडब्ल्यू को सौंपी गई ई-टेंडरिंग मामले की जांचईओडब्ल्यू
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कैग से प्राप्त प्रतिवेदन को पटल पर रखा था.(फाइल फोटो)

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने सीएजी (कैग) की रिपोर्ट में ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में पारदर्शिता के अभाव की जानकारी मिलने के बाद मामले को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दिया है. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने 4601 करोड़ रूपए की निविदाओं के दौरान ई-खरीद प्रणाली में पारदर्शिता के अभाव की जानकारी के बाद इसकी जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा है. अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से प्राप्त प्रतिवेदन को पटल पर रखा था.

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उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में पारदर्शिता का अभाव पाया गया है. वहीं विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत के कारण अनुचित निविदा प्रथाओं के बारे में भी जानकारी मिली है. रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के दौरान आमंत्रित 4601 करोड़ रूपए मूल्य की 1921 निविदाओं में राज्य सरकार के 17 विभागों ने 74 कम्प्यूटरों का उपयोग अपने निविदा विवरण अपलोड करने के लिए किया था. वहीं इन कम्प्यूटरों का उपयोग एक या अधिक निविदाकारों ने अपने निविदा को अपलोड करने के लिए किया था.

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अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 477 निविदाकारों, जिन्होंने कम से कम एक सरकारी अधिकारी के साथ इन कॉमन कम्प्यूटरों का उपयोग किया था, उन्हें 961.26 करोड़ रूपए का कार्य सौंपा गया था. अधिकारियों के अनुसार इससे यह संकेत मिलता है कि निविदाकार और निविदा प्रक्रिया से संबंधित अधिकारी पूर्व से ही एक दूसरे के निकट संपर्क में थे. वहीं कई निविदाकारों द्वारा समान प्राथमिक ईमेल आईडी के उपयोग से संपूर्ण प्रणाली अविश्वसनीय हो जाती है. अधिकारियों ने बताया कि सीएजी की रिपोर्ट के बाद राज्य शासन ने इस मामले की जांच कराने का फैसला किया है. इसलिए इस मामले को ईओडब्ल्यू को सौंप दिया गया है.