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श्रद्धा सुमन सेवा समिति के सदस्य 300 से अधिक दिवंगतों की अस्थि का करेगी विसर्जन

यहां से वहां इलाहाबाद जाएंगे और पवित्र गंगा नदी में गंगा दशहरे के दिन  इन अस्थियों का विसर्जन करेंगे . खंडवा में भी अज्ञात लोगों का अंतिम संस्कार करने वाली पूर्णिमा सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति के सदस्यों में इनका अभिनंदन किया. 

श्रद्धा सुमन सेवा समिति के सदस्य 300 से अधिक दिवंगतों की अस्थि का करेगी विसर्जन
20 वर्षों में 16000 अज्ञात लोगों की अस्थियों को देश की विभिन्न पवित्र नदियों में प्रवाहित कर चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

इंदौरः कहते हैं जिसका कोई नहीं होता उसका भगवान होता है , इसी तरीके से मरने के बाद भी जिसका कोई नहीं होता उनकी अस्थियों के विसर्जन के लिए भी समाज में कोई न कोई होता ही है. ऐसे ही इंदौर की श्रद्धा सुमन सेवा समिति है जो अज्ञात मरे हुए लोगों की अस्थियों का विसर्जन देश की पवित्र नदियों में करती हैं. आज इस समिति के सदस्य 300 अज्ञात लोगों की अस्थियों को लेकर खंडवा पहुंचे. यहां से वहां इलाहाबाद जाएंगे और पवित्र गंगा नदी में गंगा दशहरे के दिन  इन अस्थियों का विसर्जन करेंगे . खंडवा में भी अज्ञात लोगों का अंतिम संस्कार करने वाली पूर्णिमा सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति के सदस्यों में इनका अभिनंदन किया. 

इंदौर की श्रद्धा सुमन सामाजिक सेवा समिति  का 16 सदस्य दल खंडवा पहुंचा. उनके हाथों में एक बड़ा कलश था जिसमें 300 ऐसे लोगों की अस्थियां थी  जिनका कोई नहीं था. ऐसे अज्ञात लोगों का अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी अस्थियों को इकट्ठा करके यह समिति पवित्र नदियों में विसर्जित करती है. जिससे उनकी आत्मा को शांति मिल सके. इंदौर की यह समिति पिछले 20 वर्षों से  यह काम कर रही है और इन 20 वर्षों में 16000 अज्ञात लोगों की अस्थियों को देश की विभिन्न पवित्र नदियों में  प्रवाहित कर चुकी है. यह समिति लावारिस, अज्ञात और उन ज्ञात लोगों की अस्थियों का भी विसर्जन करती हैं जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होती है. उनका उद्देश्य होता है कि नर्मदा जयंती पर नर्मदा नदी और गंगा दशहरे पर गंगा नदी में इन अस्थियों को पूरे विधि-विधान से विसर्जित किया जाए जिससे आत्मा को शांति मिले .

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खंडवा में भी अज्ञात लाशों का अंतिम संस्कार करने वाली पुर्व निमाड़ सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के सदस्यों ने इंदौर से आई इस कलश यात्रा  के सदस्यों का सार्वजनिक अभिनंदन किया. खंडवा की समिति का कहना है कि ऐसे लोग जिनका कोई नहीं होता उनका धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करना समाज का दायित्व है और अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन करना उससे भी बड़ा सामाजिक कर्तव्य है . जन्म लेने वाली प्राणी की आत्मा को शांति मिले इस हेतू पवित्र नदियों में उनकी अस्थियों का विसर्जन मनुष्यता को पूर्णता प्रदान करता है.