मुंबई: बॉम्बे हॉस्पिटल जाने वाली सड़क के नामकरण पर विवाद, डॉ. बीके गोयल मार्ग करने की है मांग

बाम्बे हॉस्पिटल के तमाम डॉक्टर्स और कर्मचारी चाहते  हैं कि इस सड़क को दिवंगत डॉक्टर बी के गोयल का नाम दिया  जाए.

मुंबई: बॉम्बे हॉस्पिटल जाने वाली सड़क के नामकरण पर विवाद, डॉ. बीके गोयल मार्ग करने की है मांग
डॉक्टर गोयल देश-विदेश के कई नामचीन हॉस्पिटल से जुड़े रहे हैं..

मुंबई: किसी सड़क का नाम किसके नाम पर होना चाहिए. एक ऐसे मसीहा के नाम पर जो सचमुच गरीब मरीजों के लिए भगवान से कम नहीं था, जिसे भारत सरकार ने पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से नवाज़ा या फिर एक ऐसे शख्स के नाम पर जिसका उस जगह से कोई लेना-देना नहीं है. जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉम्बे हॉस्पिटल के चीफ कार्डियोलोजिस्ट डॉक्टर बीके गोयल बनाम नाना चूड़ासमा की. बॉम्बे हॉस्पिटल को जाने वाली सड़क के नामकरण को लेकर इनमें कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है. 

मुंबई के मेट्रो स्ट्रीट से बॉम्बे हॉस्पिटल को जाने वाली करीब 600 मीटर की छोटी सी सड़क को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है. बॉम्बे हॉस्पिटल के तमाम डॉक्टर्स और कर्मचारी चाहते  हैं कि इस सड़क को दिवंगत डॉक्टर बी के गोयल का नाम दिया  जाए. उनकी मांग गलत भी नहीं है क्योंकि इस हॉस्पिटल में डॉक्टर बके गोयल ने मरीज़ों की सेवा करते पूरी जिंदगी बता दी. डॉक्टर गोयल इस अस्पताल के चीफ कॉर्डियोलोजिस्ट थे. पिछले साल 20 फरवरी को निधन से एक दिन पहले भी उन्होंने 22 एंजियोग्राफी कर मरीज़ों को नई जिंदगी दी. यही नहीं डॉक्टर गोयल गरीब मरीजों के लिए तो किसी मसीहा से कम नहीं थे. इसलिए उनके बेटे राहुल गोयल की गुज़ारिश है कि बीएमसी इस सड़क को डॉक्टर बीके गोयल का नाम देकर सम्मान दे.
 
डॉक्टर गोयल देश-विदेश के कई नामचीन हॉस्पिटल से जुड़े रहे हैं. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से लेकर डॉक्टरों के संगठन में भी वो ऊंचे पदों पर रहे हैं. मेडिकल खासकर कार्डियोलोजी के क्षेत्र में उनका काफी योगदान रहा है. उनके योगदान को ही देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पहले पद्मश्री से नवाज़ा फिर पद्मभूषण से सम्मानित किया और बाद में पद्मविभूषण का पुरस्कार दिया. वो मुंबई के शेरिफ भी रहे. पिछले साल 20 फरवरी को जब उनका देहांत हुआ तो पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. इसलिए बॉम्बे हॉस्पिटल के तमाम डॉक्टर्स और कर्मचारी चाहते हैं कि इस सड़क को डॉक्टर बीके गोयल का नाम देने से बेहतर कोई नाम हो ही नहीं सकता.

लेकिन अपने राजनीतिक रसूख के चलते शायना एनसी इस सड़क को अपने पिता का नाम देना चाहती हैं. इस बारे में ज़ी मी़डिया ने शायना एनसी का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि डॉक्टर गोयल ने 1967 से बॉम्बे हॉस्पिटल में कुछ नहीं किया. हमने डिवाइडर को वेरिफाई किया और आज तक उन्होंने प्रपोजल भी नहीं दिया कि रोड लेनिंग करनी है. बीएमसी को मेरा पत्र पंहुचा दो महीने पहले जब मेरे पिता नाना चूड़ासमा का देहांत हुआ. ये पत्र हमने नहीं दिया बल्कि शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने दिया. मुंबई शहर में मेरे पिता जी का भी योगदान है. इसलिए उसमें कुछ गलत नहीं है. फिलहाल अब बीएमसी को तय करना है कि इस सड़क के नाम का सबसे ज्यादा हकदार कौन है.