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12वीं क्लास में बेटा हुआ फेल तो मां हो गई परेशान, फांसी लगा कर दे दी जान

जम्मू एवं कश्मीर के सांबा जिले में मंगलवार को बेटे के कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होने के बाद उसकी मां ने खुदकुशी कर ली. 

12वीं क्लास में बेटा हुआ फेल तो मां हो गई परेशान, फांसी लगा कर दे दी जान
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

जम्मू: जम्मू एवं कश्मीर के सांबा जिले में मंगलवार को बेटे के कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होने के बाद उसकी मां ने खुदकुशी कर ली. पुलिस ने बताया कि महिला कि पहचान सांबा जिले के तालूर गांव की नीलम देवी के रूप में हुई है. पुलिस अधिकारी ने कहा, "परिवार के लोगों और पड़ोसियों ने बताया कि बेटे के कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होने के बाद वह अशांत हो गई थी जिसके बाद उसने खुदकुशी करने के लिए जहर खा लिया."

एग्जाम टाइम: बच्चों को कैसे करें तनावमुक्त
सबकुछ अभिभावकों के ऊपर है कि वे अपने-अपने स्तरों पर कुछ ऐसी व्यवस्था करें कि बच्चों के अंदर इस दौरान कोई अतिरिक्त तनाव पैदा न होने पाये और यदि हो भी जाता है, तो उसे कम किया जाए. इसके लिए कुछ इस तरह के तरीके अपनाए जा सकते हैं-

1. माता-पिता को चाहिए कि परीक्षा के इस पूरे दौर में और खासकर परीक्षा वाले दिन अपना अधिक से अधिक समय बच्चों को दें. साथ ही लगातार बच्चों से बातचीत भी करते रहें. बेहतर होगा कि उनकी पढ़ाई के बारे में कम से कम बातें की जाएं.

2. पेपर कैसा बना, चाहे वह बुरे से बुरा ही क्यों न हुआ हो, कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें. उसे आप सामान्य तरीके से लेते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन करने की हरसंभव कोशिश करें. बच्चे को यह एहसास कराना जरूरी है कि यदि पेपर खराब हो गया है, तो इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि जिन्दगी खराब हो गई है. यह सब केवल बोलकर ही नहीं, बल्कि अपने हाव-भाव से भी किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे हमारे कहने पर विश्वास कर सकें. वे स्वयं को अपराधी समझने से बच सकें. इससे वे हल्का महसूस करेंगे.

इस दौरान बच्चों पर विशेष रूप से ध्यान दिये जाने की जरूरत होती है. कोशिश यह होनी चाहिए कि वे कम से कम अकेले रहें. उदास होने की स्थिति में तो उसे अकेला बिल्कुल भी न छोड़ें. अपनी तरफ से हर वह कोशिश करें, जो उनकी उदासी को कम कर सकें.

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3. परीक्षा के दौरान बच्चे दबाव में रहते हैं. इसलिए उनका व्यवहार सामान्य नहीं रह जाता. इसलिए उनके गुस्से और चिड़चिड़ाहट को अन्यथा न लें. उस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया करने की बजाए शान्त रहना बेहतर होता है.

4. बच्चों की दो बातों का विशेष रूप से ध्यान रखें- उनकी भूख और उनकी नींद. भूख का अर्थ ज्यादा से ज्यादा खिलाने से नहीं है. देखना यह होगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उसने खाना बिल्कुल बन्द कर दिया है. जहां तक नींद का सवाल है, वह सबसे अधिक जरूरी है. उसे अधिक से अधिक सोने के लिए प्रोत्साहित करें. यदि उसे नींद नहीं आ पा रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेने में हिचक नहीं करनी चाहिए.