कश्‍मीर में बर्फबारी के कारण पानी को भी तरसे लोग, महि‍लाओं को मीलों चलना पड़ रहा पैदल

बर्फ़बारी के कारण दर्जनों इलाके अब भी कटे हुए हैं. पीने के पानी के लिए मह‍िलाओं को रोजाना मीलों पैदल चलना पड़ता है.

कश्‍मीर में बर्फबारी के कारण पानी को भी तरसे लोग, महि‍लाओं को मीलों चलना पड़ रहा पैदल

श्रीनगर : कश्मीर में पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में हुई भीषण बर्फबारी ने लोगों की ज़िन्दगी बेहाल कर दी है. मैदानी इलाकों में धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर लोट रही है मगर पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी लोगों के लिए अभी भी मुसीबत बनी हुई है. उत्तरी कश्मीर जहां सब से ज्‍यादा बर्फ जमा हुई है. वहीं कुपवाड़ा, उडी, बांदीपोरा के दूरदराज़ इलाकों में इस बर्फ के बाद मौसम खुलने से ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया है. इसके कारण कई जगहों पर पानी की पाइप जमने के कारण टूट चुकी है. अब इन इलाकों पानी की किल्‍लत ऐसी है कि गांव की महिलाओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर पीने का पानी लाना पड़ता है. महिलाओं को सिर पर पानी के बर्तन उठा कर इस कड़ाके की ठंड में पीने का पानी जुटाना पड़ता है. वह आरोप लगा रही हैं कि प्रशासन इन इलाकों की कोई सुध नहीं ले रहा है.

बांदीपोरा के रहने वाली मरियम कहती हैं, "आज कई दिन हुए बर्फ पड़े हुए. हमें बहुत मुश्किल हो रही है. अगर हमने अग्रीमेंट किया है तो पानी क्यों नहीं मिलेगा." इसी इलाके में नुज़हत कहती है "हमें यहां पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है पानी की बहुत किल्‍लत है. बाहर निकलना  मुश्किल हो रहा है. सरकार खराब पाइप को जल्द से जल्द ठीक करे. ताकि हमें पीने के लिए पानी मिले."

वहीं कुपवाड़ा के ऊपरी इलाकों में सड़कों पर अब भी इतनी बर्फ जमी हुई है कि गाड़ी तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है. इलाके के लोगों का आरोप है कि प्रशासन का कोई भी कर्मचारी या अधिकारी इन इलाकों में अब तक नहीं पहुंचा है. कुपवाड़ा ही नहीं बारामूला के उड़ी सेक्टर के चरुंदा गांव में भी यही मंज़र है. यहां करीब 2 फीट से ज्यादा बर्फ अभी भी सड़कों पर मौजूद है यहां के लोगों का कहना है कि जब से मौसम खराब हुआ तब से यहां रोड बंद है. अगर ऐसे में कोई बीमार पड़े तो उसे घंटों पैदल सफर कर मरीज को चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है. लोग जिला प्रशसन से गुहार लगा रहे हैं की जल्द इन इलाकों में कम शुरू किया जाए.