यमुना के किनारे बसे शहरों का होगा कायापलट, जानिए कौन-कौन से जिलों को मिलेगा फायदा

कार्यकारी समिति ने गंगा नदी में जलीय जीवन को फिर से बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है. 

यमुना के किनारे बसे शहरों का होगा कायापलट, जानिए कौन-कौन से जिलों को मिलेगा फायदा
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: नमामि गंगे के तहत यमुना नदी के किनारे बसे शहरों के लिए 1387.71 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन :एनएमसीजी: ने फिरोजाबाद, इटावा, बागपत और मेरठ के लिए सहायक नदियों पर परियोजनाओं को भी मंजूरी दी. इससे संबंधित कार्यकारी समिति ने 15 फरवरी को आयोजित अपनी 20वीं बैठक में 1387.71 करोड़ रुपये की लागत वाली जलमल निकासी बुनियादी ढांचागत और अन्य परियोजनाओं को मंजूरी दी.

इसके तहत यमुना नदी के किनारे बसे शहरों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इन परियोजनाओं में जलमल शोधन संयंत्रों (एसटीपी) का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, जलमल शोधन संयंत्रों और अन्य बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी प्रणालियां शामिल हैं. कार्यकारी समिति द्वारा इटावा में 140.6 करोड़ रुपये की लागत वाली जलमल बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई.

नमामि गंगे की कार्यकारी समिति द्वारा फिरोजाबाद में 51.08 करोड़ रुपये की लागत वाली जल मल बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है.  इनमें दो नालों की निकासी, दो सीवेज पम्पिंग केन्द्रों का निर्माण करना, मुख्य सीवर लाइनों का निर्माण करना और अन्य विकास कार्य शामिल हैं.

बागपत में जलमल निकासी से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए उत्तर प्रदेश के बागपत शहर में 77.36 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है. कार्यकारी समिति ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में जलमल से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 681.78 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी. 

आगरा में 317.2 करोड़ रुपये की लागत वाली सीवरेज बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को मंजूरी दी है. कार्यकारी समिति ने उत्तर प्रदेश के चुनार शहर में मल गाद के प्रबंधन और प्रदूषण में कमी के लिए 2.70 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को मंजूरी दी है.  इसका कार्यान्वयन विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र (सीएसई) द्वारा किया जाएगा.

गंगा नदी में जलीय जैव विविधता का पुनरुत्थान करना नमामि गंगे कार्यक्रम के महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्रों में से एक है. कार्यकारी समिति ने गंगा नदी में जलीय जीवन को फिर से बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है.