पंजाब (Punjab) में अगले साल असेंबली चुनाव होने हैं. इससे पहले पार्टी (Punjab Congress) में विद्रोही स्वर लगातार तेज हो रहे हैं. अब मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं.
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चंडीगढ़: पंजाब (Punjab) में अगले साल असेंबली चुनाव होने हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाए जाने के बाद भी पार्टी (Punjab Congress) में विद्रोही स्वर थमते नजर नहीं आ रहे हैं. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के बाद मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने भी अब अपनी पार्टी पर निशाना साधा है.
मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने रविवार को कहा कि उन्होंने पार्टी की प्रदेश इकाई (Punjab Congress) में इस तरह की अराजकता कभी नहीं देखी. उन्होंने सवाल किया कि क्या पार्टी को लगता है कि लोग प्रतिदिन इस तरह की चीजें होने से निराश नहीं होते हैं. मनीष तिवारी ने पंजाब में पार्टी नेताओं की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ अप्रिय भाषा के इस्तेमाल पर अप्रसन्नता जताई.
तिवारी ने रविवार कई ट्वीट करके 2015 की बेअदबी की घटनाओं, नशीले पदार्थ की समस्या और बिजली खरीद समझौते जैसे मुद्दों पर जांच की प्रगति पर सवाल उठाए. उन्होंने एक साक्षात्कार में उनके संदर्भ को लेकर कांग्रेस महासचिव हरीश रावत पर भी निशाना साधा.
उन्होंने कहा, ‘आपने (रावत) मुझे इस साक्षात्कार में संदर्भित किया था, मैं आपका तब से सम्मान करता हूं, जब मैं नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआई) का नेतृत्व करता था और आप कांग्रेस सेवादल का नेतृत्व करते थे. हालांकि, कांग्रेस में मेरे 40 वर्षों से अधिक के समय में मैंने ऐसी अराजकता कभी नहीं देखी, जो आज पंजाब में चल रही है.'
मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने सिद्धू पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, ‘एक प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की बार-बार खुली अवहेलना की जा रही और बच्चों की तरह सहकर्मी एक-दूसरे के साथ सार्वजनिक रूप से झगड़ते हैं. एक-दूसरे के खिलाफ अप्रिय भाषा का इस्तेमाल करते हैं. पिछले पांच महीनों से, यह पंजाब कांग्रेस बनाम पंजाब कांग्रेस है. क्या हमें लगता है कि पंजाब के लोग प्रतिदिन होने वाली इस तरह की चीजों से निराश नहीं होते हैं?’
उन्होंने कांग्रेस की ओर से अपनी पंजाब इकाई में गुटबाजी समाप्त करने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति के गठन को निर्णय की एक गंभीर त्रुटि करार दिया. उन्होंने कहा, ‘विडंबना यह है कि जिन लोगों ने दूसरों के उल्लंघन करने और पथभ्रष्ट होने की सबसे अधिक शिकायत की, वे दुर्भाग्य से खुद उल्लंघनकर्ता थे और हैं. इतिहास में यह दर्ज किया जाएगा कि उस समिति के गठन का निर्णय एक गंभीर त्रुटि थी, जिसने कथित और वास्तविक शिकायतें परोक्ष तौर पर सुनी.’
उन्होंने कहा, ‘उन मुद्दों पर कहां प्रगति हुई है, जिसने इन विधायकों और अन्य को आंदोलित किया--मादक पदार्थ, बिजली पीपीए, अवैध रेत खनन. क्या आंदोलन आगे बढ़ा है?’
बताते चलें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नए सीएम बन चुके हैं. वहीं पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) की कमान क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के पास है. उन्हें उम्मीद थी कि कैप्टन के हटने पर सीएम की कुर्सी मिलेगी लेकिन वह चन्नी के पास चली गई. इसके बाद से वह रह-रहकर अपनी ही पार्टी पर निशाना साध रहे हैं.
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इसी बीच पंजाब (Punjab) के डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच की जाएगी कि क्या पाकिस्तानी पत्रकार आलम के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध हैं. वहीं सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि राज्य में एक भी अधिकारी की तैनाती अरूसा आलम को ‘पैसे या तोहफे’ दिए हुए बिना नहीं हुई.
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