राजस्थान में फिर शुरू हुआ गुर्जर आंदोलन, 4 ट्रेनें रद्द और 7 का मार्ग बदला

गुर्जर समुदाय के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला नें सवाई माधोपुर में आरक्षण आंदोलन करते हुए कहा है कि 'हम 5% आरक्षण चाहते हैं

राजस्थान में फिर शुरू हुआ गुर्जर आंदोलन, 4 ट्रेनें रद्द और 7 का मार्ग बदला
पहली बार राज्य सरकार 2008 में गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाई थी

सवाई माधोपुर: राजस्थान में आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज द्वारा आज (शुक्रवार) की सुबह चेतावनी देने के बाद सवाई माधोपुर से गुर्जरों द्वारा आंदोलन की शुरुआत कर दी गई है. बता दें कि प्रदेश में गुर्जर समाज द्वारा सरकार को 4 बजे तक का वक्त दिया था. साथ ही उन्होने सरकार को यह अल्टीमेटम दिया था कि यदि सरकार शुक्रवार तक 5 फीसदी आरक्षण का नोटिफिकेशन जारी नहीं करती है तो गुर्जर आंदोलन करेंगे.

गुर्जर आंदोलन के कारण जयपुर जाने वाली 4 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. 7 ट्रेनों का मार्ग बदल द‍िया गया है. गुर्जर समुदाय के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला नें सवाई माधोपुर में आरक्षण आंदोलन करते हुए कहा है कि 'हम 5% आरक्षण चाहते हैं. सरकार ने मेरे अनुरोध का जवाब नहीं दिया. इसलिए, मैं एक आंदोलन करने जा रहा हूं. सरकार को आरक्षण देना चाहिए, मुझे नहीं पता कि वह कहां से देते हैं?

बता दें कि आंदोलन की चेतावनी के बाद से ही रेलवे और जिला प्रशासन ने गुर्जर बाहुल्य जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी थी. रेलवे ने आरपीएफ की कंपनी भेजना शुरू कर दी थी. दौसा, अजमेर, जयपुर हाईवे, आगरा हाईवे, करौली, भरतपुर, भीलवाड़ा, शेखावाटी इलाकों में आरपीएफ की कंपनियां भेजी जा रही थी. दूसरी और जिला प्रशासन भी पूरी तरह से संतर्क थी.

इसके अलावा आईबी भी लगातार गुर्जर आंदोलन से पहले अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हुई थी. इधर सरकार कानूनी राय लेकर रास्ता निकालने की कोशिश में जुटी हुई है. सरकार लॉ विभाग और कानूनी जानकारों से राय लेकर संभवत: सुप्रीम कोर्ट जा सकती है. पिछली सरकार में लगी एसएलपी पर गहलोत सरकार सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग कर सकती है. एसबीसी आरक्षण विधेयक-2012-17 को 9 दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था. उस पर पिछली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP लगा रखा है.

खबर के मुताबिक गहलोत सरकार SLP पर जल्द सुनवाई करने के लिए प्रार्थना पत्र सुप्रीम कोर्ट में दे सकती है. जिसके माध्यम से 50% से बाहर आरक्षण की तय समय सीमा को ले जाने की अनुमति ली जा सकती है. केंद्र सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण दिए जाने के बाद इसका दायरा 60 फीसदी हो चुका है, लेकिन राजस्थान में सवर्ण आरक्षण लागू नहीं होने की वजह से अभी तक दायरा 50 फीसदी है. फिलहाल गुर्जरों को मॉर बैकवर्ड क्लास के जरिए 1 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. गुर्जरों ने सरकार से 50 फीसदी के बाहर आरक्षण देने की मांग की है.

बता दें कि पहली बार राज्य सरकार 2008 में गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाई थी. जिसमें कुल आरक्षण 68 प्रतिशत हो गया था. इस विधेयक के अनुसार ईबीसी को 14, 5 प्रतिशत एसबीसी, 21 प्रतिशत ओबीसी, 16 प्रतिशत एससी, 12 प्रतिशत एसटी को आरक्षण देने का प्रावधान रखा गया था. लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए रोक लगाया कि उसमें आरक्षण प्रतिशत तय सीमा को पार कर रहा है. 

वहीं, 2008 में कोर्ट के स्टे के बाद राज्य सरकार 2012 में भी इसका नोटिफिकेशन लाई थी. जिसमें गुर्जर समेत एसबीसी की पांचों जातियों को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. लेकिन इसे भी कोर्ट में चैलेंज किया गया और कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी. जबकि 2015 में भी राज्य सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाई थी. लेकिन कोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट को सही नहीं माना और आरक्षण को खारिज कर दिया. 

इसके बाद 2018 में राजस्थान सरकार गुर्जर आरक्षण के लिए विधेयक लेकर आई थी. विधेयक सदन में पास भी हो गया. लेकिन कुछ दिनों बाद ही हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी. जिसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई, लेकिन वहां भी कोर्ट ने आरक्षण 50 प्रतिशत ज्यादा होने पर इसके लागू होने पर रोक लगा दी. कोर्ट की रोक के बाद गुर्जरो को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार ने मोर बैकवर्ड क्लास(More Backward Class) बनाया, जिसमें उनके लिए 1% आरक्षण का प्रावधान किया गया. 

अब राजस्थान में नई सरकार के आते ही गुर्जरों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. इससे पहले भी वसुंधरा सरकार के आखिरी में गुर्जरों ने आंदोलन की धमकी दी थी, लेकिन जब तक गुर्जर आंदोलन करते तब तक राज्य में आचार संहिता लग चुकी थी.