close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जोधपुर का ड्रेनेज सिस्टम मानसून में जनता के लिए बन सकता है बड़ी आफत

आज जोधपुर शहर पूरे प्रदेश का दूसरा बड़ा शहर बन चुका है. इतना बड़ा शहर होने के बावजूद भी शहर की ड्रेनेज सिस्टम व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है.

जोधपुर का ड्रेनेज सिस्टम मानसून में जनता के लिए बन सकता है बड़ी आफत
जोधपुर शहर का एक भी बरसाती नाला अंतिम छोर पर नहीं पहुंचता है

जोधपुर:अगले कुछ दिनों में मानसून दस्तक देने वाला है जहां मानसून कई लोगों के लिए खुशियों की सौगात लाता है तो वहीं जोधपुर वासियों के लिए यह मानसून किसी आफत से कम नहीं है. पिछले मानसून सीजन में भी बरसाती नालों में गिरने से तीन लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था. अभी भी मानसून सीजन सिर पर है, लेकिन नगर निगम की ओर से सभी मानसून नाले के सफाई व्यवस्था पूरी नहीं की जा सकी है, साथ ही ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने की दिशा में भी ठोस कार्रवाई नहीं होने से इस बार का मॉनसून भी जोधपुर वासियों के लिए आफत ला सकता है,

जोधपुर शहर ऐतिहासिक सदियों पूर्व बसे जोधपुर में कुछ दिन पहले ही 561 स्थापना दिवस मनाया था. इतने वर्षों में शहर का लगातार विस्तार हुआ है और आज जोधपुर शहर पूरे प्रदेश का दूसरा बड़ा शहर बन चुका है. इतना बड़ा शहर होने के बावजूद भी शहर की ड्रेनेज सिस्टम व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है. जोधपुर शहर का एक भी बरसाती नाला अंतिम छोर पर नहीं पहुंचता है, जिससे बारिश के दिनों में पूरे शहर में जल प्रलय की स्थिति बन जाती है. 

थोड़ी सी बारिश के बाद शहर पूरी तरह से ठप हो जाता है और शहर की कनेक्टिविटी भी खत्म हो जाती है. खतरनाक पुलिया, जालोरी गेट से फतेहपोल रोड़ जयपुर रोड़, बीजेएस सहित कई इलाके हैं, जहां थोड़ी सी बारिश में ही 4 से 5 फीट पानी बहने लगता है. जिससे वहां रहने वाले लोगों को भारी परेशानी होती है. कहने को तो नगर निगम हर बारिश में करोड़ों रुपए खर्च कर नालों की सफाई करता है लेकिन यह सफाई कार्य भी महज औपचारिकता ही साबित होता है.

शहर के तीन प्रमुख बरसाती नाले हैं और तीनों ही नाले जोजरी नदी से नहीं मिलने के कारण इनका पानी मुख्य सड़कों पर बहता रहता है. शहर का एक बरसाती नाला मिलिट्री क्षेत्र में जमीन नहीं मिलने की वजह से अटका हुआ है. वहीं दूसरा नाला यूनिवर्सिटी की ओर से जमीन नहीं दिए जाने के कारण काम पूरा नहीं हो सका है. हाईकोर्ट ने भी कई बार नगर निगम और जेडीए को सिस्टम सुधारने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है. लोगों का कहना है कि बरसाती नालों की सफाई नहीं होने और सभी बरसाती नालों को अभी तक जोझरी नदी से जुड़ने के कारण बारिश के दिनों में काफी परेशानी हो सकती है.

वहीं महापौर घनश्याम ओझा भी मानते हैं कि बरसाती नालों को जोझरी नदी तक नहीं मिलने के कारण बरसात के दिनों में काफी समस्याएं हो जाती है. उन्होंने कहा कि आर्मी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जमीन नहीं मिलने के कारण ड्रेनेज सिस्टम में सुधार नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के समक्ष निगम अपना पक्ष रखते हुए दोनों एजेंसियों से जमीन दिलाने का आग्रह करेगा.। साथ ही महापौर घनश्याम ओझा ने कहा कि वैसे वासियों से अपील करते हैं कि निगम प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर नालों की सफाई करवाता है, जनता की गाढ़ी कमाई नालों की सफाई में खर्च होती है यदि जनता जागरूक होकर बरसाती नालों में कचरा नहीं डालें और सीवरेज का पानी बरसाती नालों में नही छोड़े तो काफी हद तक निगम का खर्च भी कम होगा और लोगों को परेशानी भी कम होगी.

मानसून सीजन सर पर है निगम की ओर से शहर के 70% नालों की सफाई का दावा किया जा रहा है. निगम का यह दावा कितना सही साबित होता है यह तो मानसून सीजन में पता चलेगा. लेकिन जब तक इन नालों को जोझरी नदी तक नहीं मिलाया जाएगा, तब तक शहर की ड्रेनेज सिस्टम व्यवस्था यूं ही बनी रहेगी.