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कोटा में प्रशासन की लापरवाही से बढ़ी धनिया मंडी किसानों की परेशानी

किसानो की संख्या ज्यादा होने पर यहां कई बार किसानों की फसल समय पर नहीं बिक पाती. ऐसे में किसानों को फसल बेचने के लिए दो-दो दिनों तक रुकना पड़ता है. 

कोटा में प्रशासन की लापरवाही से बढ़ी धनिया मंडी किसानों की परेशानी
कई बार मंडी के विस्तार की मांग उठाई लेकिन समस्या जस की तस है.

कोटा: रामगंजमंडी में स्थित कृषि उपजमंडी ने एशिया की सबसे बड़ी धनिया मंडी के रूप में अपनी पहचान तो बनाई लेकिन मंडी में व्याप्त अव्यवस्थाएं यहां आने वाले किसानों की परेशानी बढ़ा रही है. मंडी का परिसर छोटा पड़ने लगा है तो सड़क पर वाहनों के जमावड़े से आये दिन जाम की स्थिति लोगों की नियति बन चुकी है. हर साल सरकार को करोड़ो रूपये का राजस्व दे रही धनिया मंडी की सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर सरकार की भी नजर इनायत नहीं हो रही. 

रामगंजमंडी में जिलेभर से हजारों किसान अपनी उपज लेकर आते है. यहां धनिया की उपज की आवक अधिक होती है. सीज़न में धनिए की आवक बम्पर हो जाती है. सीज़न में प्रतिदिन 50 हज़ार से अधिक धनिये की बोरियों की आवक होती है. जिससे मंडी यार्ड फूल हो जाता है. मंडी में उपज बेचने आने वाले किसानों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है लेकिन यहां सुविधाओ में इजाफा नहीं हो रहा. ऐसे में यहां आने वाले किसानों को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है. किसानों के साथ क्षेत्र के नेताओ ने भी कई बार मंडी के विस्तार की मांग उठाई लेकिन समस्या जस की तस है. 

किसानो की संख्या ज्यादा होने पर यहां कई बार किसानों की फसल समय पर नहीं बिक पाती. ऐसे में किसानों को फसल बेचने के लिए दो-दो दिनों तक रुकना पड़ता है. इस दौरान किसानों के उपज से भरे वाहनो की लंबी कतार लग जाती है. जिसके कारण मंडी के बाहर सड़क पर ज़ाम तक के हालात बन जाते है. ज़ाम के चलते शहर में आमजन भी परेशान होता है. कृषि उपज मंडी में सीज़न में यार्ड छोटे पड़ने के चलते वाहनों को बाहर भी अन्य स्थानों पर खड़ा करना होता है. जिसमे साबू मैदान, खेराबाद खेल मैदान में सेकड़ो धनिये से लदे वाहनों को खड़ा करना होता है. धनिया मंडी में समीप के मध्य्प्रदेश के गांवो से भी बड़ी तादाद में धनिया आता है. 

रामगंजमंडी की मंडी में आने वाले उच्च क्वालिटी के धनिया की महक यहां व्यपारियों को भी आकर्षित करती है. धनिए को खरीदने के लिए देश ही नहीं विदेश की मसाला कम्पनी के प्रतिनिधि भी आते हैं. मंडी में सीजन में सुबह से नीलामी शुरू होती है. जो देर रात्रि तक चलती है. ऐसे में दूर दराज से आने वाले किसानों को रात्रि में भी मंडी में रखना होता है. मंडी यार्ड काफी छोटा पड़ता है. मंडी विस्तार के लिए सरकार ने समीप की भूमि को मंडी विस्तार के लिये आवंटित किया हुआ है. परंतु भूमि पर किसी और का कब्ज़ा होने से मामला कोर्ट में विचाराधिन हैं. 

शहरवासियों का कहना है कि कृषि उपज मंडी को शहर के बाहर बनवाई जाए. ताकि इसका क्षेत्रफल भी बढ़ेगा और ज़ाम लगने से जो शहर के लोगो को समस्या होती है उससे निजाद भी मिलेगी. कृषि उपज मंडी में बिजली के कम वोल्टेज आने की भी बड़ी समस्या है. शहर के मध्य होने से बिजली के वोल्टेज भी पर्याप्त मात्रा में नहीं आते है. किसानों के अनुसार भरपुर सीजन में काफी परेशनी होती है. सीजन के समय धनिये को एक दूसरे के ठेर के समीप खाली करवाया जाता हैं. जिसके कारण आपस मे धनिया मिल जाता है.