बारां में गर्मी बढने के साथ गहराया पानी का संकट, लोग पानी खरीदने को मजबूर

जिले में गर्मी को देखते हुए जलदाय विभाग की ओर से अप्रैल से जुलाई तक अभियान चलाकर हैंडपंप दुरुस्त करने का कार्य किया जा रहा है.

बारां में गर्मी बढने के साथ गहराया पानी का संकट, लोग पानी खरीदने को मजबूर
एक दिन में एक टीम द्वारा 2-3 हैंडपंप को दुरुस्त किया जा रहा है.

राम प्रसाद मेहता/बारां: इस साल जिले में अच्छी बरसात होने के बाद भी बारां में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट गहराने लगा है. जिले में जलदाय विभाग के पास 13 हजार हैंडपंप हैं. इनमें से सैकड़ों हैंडपंप में मोटर डालकर लोगों को पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है. आए दिन हैंडपंपों के खराब होने से पेयजल को लेकर परेशानी बढ़ रही है. लेकिन हैंडपंप सही करने के लिए सिर्फ 55 हैंडपंप मिस्त्री हैं, जिससे गांवों में दिक्कत बनी हुई है. 

लोगों की मानें तो पर्याप्त मिस्त्री नहीं होने से ग्रामीण हैंडपंप को दुरुस्त कराने के लिए कार्यालय के चक्कर काटते रहते हैं. जिले में पिछले सरकार के समय प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100-100 हैंडपंप दिए गए थे. इन्हें जहां पर पीने के पानी की समस्या अधिक है, वहां लगाया गया है. इसके बावजूद राहत नहीं मिली है. जिले में ग्रामीण क्षेत्र में 8243 हैंडपंप हैं, शेष शहरी क्षेत्र में हैं. 

जिले में गर्मी को देखते हुए जलदाय विभाग की ओर से हैंडपंप को दुरुस्त करने के लिए अप्रैल से जुलाई तक अभियान चलाकर हैंडपंप दुरुस्त करने का कार्य किया जा रहा है. विभाग के पास 7 डिवीजन में 55 मिस्त्री लगे हुए हैं. इसके लिए जिले में 7 डिवीजन में महज 7 वाहन ही दे रखे हैं. इसके चलते कम संख्या में मिस्त्री होने से एक दिन में एक टीम द्वारा 2-3 हैंडपंप को ही दुरुस्त किया जा रहा है. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में समस्या बनी हुई है. 

जिलें में पेयजल की समस्या को देखते हुए 13 गांव व 13 ढाणियों में जलदाय विभाग की ओर से 36 टैंकर भिजवाए जा रहे हैं. किशनगंज क्षेत्र में 10 निजी ट्यूबवेलों से पानी लेना शुरू कर दिया गया है. गर्मी में हैंडपंप खराब होने की शिकायत भी बढ़ गई है. सुधारने के लिए पर्याप्त मिस्त्री नहीं होने से ग्रामीणों की दिक्कत बढ़ रही है. 

जिलें में कई जगह हाथ के ठेलो पर और बाइकों ओर साइकिलों पर लोग दूर दूर से पानी लाकर प्यास बुझा रहें है. कुओं पर भी पानी भरने के लिए भीड़ लगी होती है. वहीं बारां शहर में कई जगह लोग दो सौ रूपयें प्रति माह में पानी खरीद कर प्यास बुझा रहें है. अटरू कस्बें में 89 करोड़ पेयजल पर खर्च करने के बाद भी लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है जिससे लोग परेशान है .

जलदाय विभाग एक्सईएन केसी मीणा का कहना है कि गर्मी की देखते हुंए कंटेंजेंसी प्लान भेजा है और वह सेंशन भी हो गया है. लेकिन आचार संहिता होने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है. आने वाले समय में जिलें भर में पेयजल संकट और बढ़ेगा. मई और जून माह में भीषण गर्मी के साथ साथ पेयजल संकट बढ़ेगा. लेलिन देखने वाली ये है कि जलदाय विभाग के पेयजल उपलब्ध कराने के दावों से लोगों को कितनी राहत मिलती है.