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बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्र में लगी 'ई-मित्रा प्लस' मशीनें बनी खिलौना

सरकार के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ई-मित्र प्लस मशीने आम जन की परेशानी कम करने के लिए लगाई गयी थी. 

बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्र में लगी 'ई-मित्रा प्लस' मशीनें बनी खिलौना
लेकिन वर्तमान हालात ये है कि ये किसी भी उपयोग नहीं आ रही हैं.

बीकानेर: प्रदेश के बीकानेर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में लगी ई-मित्रा प्लस मशीनें अब खिलौना बन चुकी हैं. ग्राम पंचायतों व राजकीय कार्यालयों में लगी मशीनों पर जमी धूल और कंपनी के द्वारा मशीनों को एक्टिवेट न करने के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ो की लागत से लगी उन ई मित्र प्लस मशीनों को जो अभी तक एक्टिवेट नहीं हुई है. 

सरकार के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ई-मित्र प्लस मशीने आम जन की परेशानी कम करने के लिए लगाई गयी थी. लेकिन वर्तमान हालात ये है कि ये किसी भी उपयोग नहीं आ रही हैं. इसका मुख्य कारण संचालको द्वारा इसे एक्टीवेट ही नहीं करना और ना ही जनता को इसके बारे में कोई जानकारी मुहैया कराना. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के हर ग्राम पंचायत व सरकारी कार्यालयों में ये मशीने रखी गई है लेकिन ये एक्टीवेट नहीं होने के कारण केवल और केवल एक खिलौना बनी हुई हैं.

बीकानेर जिले में एक वर्ष पहले सरकार के द्वारा 395 ई मित्र प्लस मशीने ग्राम पंचायत व सरकारी कार्यालयों मे लगाई गई है. लेकिन आभी तक 324 मशीन ही एक्टीवेट हो पाई है. मजे की बात तो ये उसमे से 294 मशीने रनिंग में होने का दावा विभाग बड़े गर्व से कर रहा है, लेकिन धरातल पर इसकी वास्तविकता उलट है. मशीने एक्टिव चाहे हो गई हो लेकिन प्रचार प्रसार की कमी कहे या विभाग की उदासीनता आज ये मशीने मात्र दिखावा बन कर रहा गई है. हालात का सही जायजा लिया जाए तो ग्रामीण क्षेत्र तो दूर की बात उपखण्ड मुख्यालयों के सरकारी कार्यालयों में मशीने गत्ते के बॉक्स में पैक पड़ी है.

क्षेत्र के जागरूक लोगों का कहना है कि सरकार के लाखों रुपए लगाने के बाद भी इन मशीनों का सदुपयोग नहीं हो रहा है और ना ही किसी को इसका उपयोग लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है. जिससे यह एक खिलौना बन कर रह गई है और सरकारी व ग्राम पंचायतों में पड़ी धूल फांक रही है. वहीं खाजूवाला ब्लॉक के इंचार्ज इंद्रजीत प्रजापत ने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा ई-कनेक्ट कम्पनी को मशीने लगाने व देखरेख करने का टेण्डर दिया गया है, लेकिन कम्पनी के द्वारा इनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं.

इसके साथ ही साल में दो बार विधानसभा व लोकसभा चुनाव आ जाने के कारण इन मशीनों को एक्टिवेट करने में देरी हुई. इसके साथ ही दो मशीनें दंतोर व डंडी में एक्टिवेट होने के बाद वोल्टेज के कारण जल गई. यहां तक कि जनवरी 2018 में जली हुई मशीन की शिकायत कंपनी को की गई ती लेकिन आज तक इन मशीनों का किसी तरह का सुधार नहीं किया गया है.