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झुंझुनू को मिला नि:संतान दंपत्तियों के लिए सरकारी अस्पताल, कई घरों में आईं खुशियां

डॉ. स्मिता तोमर पिछले 8 साल से सरकारी सेवा में है लेकिन बीते दो साल में उन्होंने सरकारी अस्पताल में काफी कुछ बदलाव किया है. जिस कारण वह आज पूरे राजस्थान में पहचानी जाने लगी हैं.

झुंझुनू को मिला नि:संतान दंपत्तियों के लिए सरकारी अस्पताल, कई घरों में आईं खुशियां
प्रतीकात्मक तस्वीर

झुंझुनू/ संदीप केड़िया: देशभर में ऐसी कई महिलाएं हैं जो मां न बन पाने के कारण काफी सारी परेशानियों को झेलती हैं. समाज से लेकर अपने परिवार तक में उन्हें काफी कुछ सहन करना पड़ता है. हालांकि, आज के वक्त में कई शहरों के बड़े अस्पतालों में इसका इलाज है लेकिन अब भी छोटे शहरों में इसका इलाज नहीं है. वहीं झुंझुनू के एक सरकारी अस्पताल में एक महिला डॉक्टर की बदौलत कई महिलाओं का निसंतान्ता का इलाज किया जा रहा है.

दरअसल, डॉ. स्मिता तोमर पिछले 8 साल से सरकारी सेवा में है लेकिन बीते दो साल में उन्होंने सरकारी अस्पताल में काफी कुछ बदलाव किया है. जिस कारण वह आज पूरे राजस्थान में पहचानी जाने लगी हैं. उन्होंने अपने काम के इतने सालों में बहुत सी महिलाओं को देखा जो बच्चा न होने के कारण काफी परेशान रहती हैं. महिलाओं को उनकी इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए उन्होंने कई प्रयास किए जिसके बाद झुंझुनू के सरकारी अस्पताल में इसका इलाज शुरू किया गया और आज दो दर्जन से अधिक महिलाओं की गोद में खुशियां आ गई हैं. 

कुछ दिन पहले ही डॉ. स्मिता तोमर ने इन निसंतान दंपतियों का सम्मान किया और उनके साथ अपने अनुभव शेयर किए तो सामने आया कि 18 साल से लेकर आठ साल तक सूनी रहने के बाद उन महिलाओं की गोद में खुशियां आईं. वे दंपत्ति डॉ. स्मिता तोमर को दुआएं देने में पीछे नहीं थी. बगड़ के ही पिंकी-मुकेश ने बताया कि हम सात साल से निसंतानता का दंश झेल रहे थे. दिल्ली तक इलाज भी कराया आखिर बगड़ सीएचसी की डॉ. स्मिता तोमर से इलाज लिया तो उन्हें बेटी पैदा हुई. इसी तरह मंजू लीलाधर ने बताया कि वो 15 साल से निसंतानता का दर्द लिए जगह जगह भटके लेकिन गोद सुनी ही रही. उन्होंने तो बच्चा होने की आस ही छोड़ दी थी. लेकिन डॉ. स्मिता तोमर से इलाज लिया तो हमें 15 साल बाद सन्तान की प्राप्ति हुई. इसी तरह कई महिलाओं ने अपने अच्छे अनुभव शेयर किए.

आपको बता दें कि बगड़ का सामुदायिक अस्पताल सेवाओं के मामले में भी प्रदेश भर में अपनी पहचान रखता है. गत दिनों ही अस्पताल को प्रदेश का दूसरा सबसे श्रेष्ठ अस्पताल चुना गया. इसमें भी डॉ. स्मिता तोमर द्वारा दिए जा रहे इलाज का सहयोग है. वहीं यहां का स्टाफ भी काफी सहयोग करता है. जिसके कारण हर क्षेत्र में अस्पताल अपनी पहचान बनाता जा रहा है. 

डॉ. स्मिता तोमर ने बताया कि यदि निसंतानता से जुड़ी दवा भी मुफ्त दवा योजना में शामिल हो जाती है तो यह लाखों रुपए का इलाज सरकारी अस्पतालों में एकदम से फ्री हो जाएगा. जिसके लिए उन्होंने सरकार को चिट्ठी भी लिखी है. आपको यहां यह भी बता दें कि सम्भवत: राज्य की पहली और एकमात्र सीएचसी है जहां पर इनफर्टिलिटी के शिकार दम्पतियों के लिये सेवा उपलब्ध है. डॉ. स्मिता तोमर मेडिसीन, आईयूआई और आईवीएफ, तीनों ही पद्धतियों से इलाज करती है.