लोकसभा चुनाव 2019: राजस्थान के पाली में क्या बीजेपी को हरा पाएगी कांग्रेस?

राजस्थान की पाली लोकसभा सीट की बात करें तो मौजूदा वक्त में यहां बीजेपी के प्रेम प्रकाश चौधरी सांसद हैं. 

लोकसभा चुनाव 2019: राजस्थान के पाली में क्या बीजेपी को हरा पाएगी कांग्रेस?
2009 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस के नए चेहरे बद्रीराम जाखड़ ने यहां जीत हासिल की थी.

पाली: देशभर में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर 2019 की शुरुआत से ही सभी सियासी दल चुनावी मोड में आ गए हैं. और राजस्थान की बात करें तो हाल ही में यहां विधानसभा चुनाव खत्म हुए हैं और इस वजह से राज्य में चुनावी सरगर्मी लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगी. एक तरफ राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद पार्टी के हौसले बुलंद है तो वहीं मामुली मत प्रतिशत से पिछड़ने के कारण बीजेपी भी बाजी पलटने की फिराक में है. 

दिसंबर 2018 में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में 200 सीटों में से 99 सीटों के साथ कांग्रेस ने राजस्थान की सत्ता में वापसी की. वहीं बीजेपी 73 सीटों के साथ विपक्ष में है. वैसे तो सूबे में इस तरह का ट्रेंड रहा है कि जिस पार्टी की सरकार विधानसभा में बनती है, लोकसभा में भी उसी दल का दबदबा रहता है. यही कारण है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीती बीजेपी ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 25 सीटों पर कब्जा जमा लिया लेकिन बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने अलवर और अजमेर सीट पर वापसी कर ली.

इसी बीच राजस्थान की पाली लोकसभा सीट की बात करें तो मौजूदा वक्त में यहां बीजेपी के प्रेम प्रकाश चौधरी सांसद हैं. उन्होंने साल 2014 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस की मुन्नी देवी गोदारा को 3,99,039 वोटों से हराकर जीति थी. पीपी चौधरी को इस चुनाव में 7,11,772 वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस के मुन्नी देवी गोदारा को मात्र 3,12,733 वोटों पर संतोष करना पड़ा था. 

वहीं 2009 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस के नए चेहरे बद्रीराम जाखड़ ने यहां जीत हासिल की थी. उस वक्त बद्रीराम जाखड़ ने इस सीट पर 1 लाख 96 हजार 291 मतों से चुनाव जीता था.  राजस्थान का पाली अपने कपड़ा व्यवसाय के लिए पूरे भारत में मशहूर है, इसे पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा बसाया गया था.

राजस्थान की पाली लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा क्षेत्र हैं. जिनमें भोपालगढ़, औंसिया, बिलाडा, लूणी, सरदारपुरा, मेड़ता सिटी, खीवंसर और पाली शामिल है. इस क्षेत्र में हार-जीत जातिगत आधार पर मतों में होने वाले धुव्रीकरण पर निर्भर करती रही है. भोपालगढ़, बिलाडा, औंसिया में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक आबादी जाटों की है और शेष मतदाता अन्य जातियों के हैं.