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राजस्थान के देवस्थान के 41 मंदिरों की संपत्तियों पर हुआ कब्जा, विभाग बेखबर

देश की राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र के औरंगाबाद, गुजरात के द्वारका, उत्तरप्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाना, एटा, बनारस, उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तरकाशी में है ये संपत्तियां. 

राजस्थान के देवस्थान के 41 मंदिरों की संपत्तियों पर हुआ कब्जा, विभाग बेखबर
दूसरे राज्यों में विभाग के अधीन 41 मंदिरों की संपत्तियां है.

जयपुर: राजस्थान का देवस्थान विभाग अपने भगवानों को भुलाए बैठा है. जिन आराध्य देवों को देवस्थान विभाग अपने कागजों में नजरअंदाज किए हुए है उनकी अचल संपत्ति अरबों रूपयों में है. देश के कई प्रमुख शहरों की प्राइम लोकेशन पर यह अचल संपत्ति स्थित है. विभाग के मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की सजगता ने भूले बिसरे आराध्य की देहरी पर फिर से राजस्थान सरकार पहुंचने की तैयारी में है. मकसद इन देवस्थानों पर पूजन से अधिक अपने संपत्तियों पर हक जताना है.

भगवान के स्थान से अनजान देवस्थान, सुनने में जरूर अजीब लग रहा होगा लेकिन ये सच है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग की दूसरे राज्यों में भी बेशकीमती जमीनें हैं. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र के औरंगाबाद, गुजरात के द्वारका, उत्तरप्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाना, एटा, बनारस, उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तरकाशी में ये संपत्तियां है. अरबों-खरबों रुपए की बेशकीमती जमीनों का खुद देवस्थान विभाग के पास ही पूरा हिसाब नहीं है.

वहीं राज्य के बाहर स्थित संपत्तियों की अफसरों से खोजखबर ली तो सामने आया कि दूसरे राज्यों में विभाग के अधीन 41 मंदिरों की संपत्तियां है जो अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर रियासतकाल से बने मंदिरों के मालिकाना हक में आती है. आजादी के बाद राजा-महाराजाओं और सरकार के बीच हुए कोवनेंट में दर्ज इन मंदिरों की संपत्तियों का मालिकाना हक अब देवस्थान विभाग के पास है. पर देखरेख के अभाव में ज्यादातर संपत्तियों पर कब्जे हो गए लेकिन अब देवस्थान विभाग के पास इन संपत्तियों के निस्तारण के दो विकल्प है. पहला यह कि सरकार सभी मंदिरों के अधीन आने वाली जमीन-मकान-दुकानों के कब्जे खाली करवाकर नीलामी करे या जिनके कब्जे में ये संपत्तियां हैं, उनको ही इनका बाजार मूल्य पर बेचान किया जाए.

खबर के मुताबिक दिल्ली के जंतर-मंतर सहित महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी व उत्तराखंड में 41 मंदिरों में 29 की संपत्तियों का रिकॉर्ड ही विभाग के पास नहीं है. मामला सामने आने के बाद मंत्री विश्वेंद्रसिंह ने देवस्थान आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी बनाकर मौके पर भेजें और रिपोर्ट तैयार करें. बाद में संपत्तियों पर सरकार के स्तर पर फैसला किया जाएगा. 

राजस्थान से बाहर के मंदिरों में राजस्थान देवस्थान संपत्ति की बात करें तो मथुरा में 16 भूखंड, औरंगाबाद में 6 भूखंड, बनारस में 9, उत्तरकाशी में 4, एटा में 1, अमरावती में 1, दिल्ली में 1, गुजरात के द्वारका में 1, हरिद्वार में 1, नैनीताल में 1 भूखंड हैं. जबकि ऐसी संपत्तियां जिनका रिकार्ड उपलब्ध है उसमें दिल्ली के जंतर-मंतर में 2066 वर्ग मीटर, अमरावती में 2 भूखंड, 86574 वर्ग फीट जमीन, मथुरा के बरसाना 4 एकड़ कृषि भूमि, वृंदावन में 85039 वर्ग फीट, यवतमाल में 29.18 एकड़, उत्तरकाशी में 18 दुकानें और 22 हजार 500 वर्गफीट जमीन, औरंगाबाद में 3.51 एकड़ जमीन है. 

देवस्थान विभाग के अफसर एक तरफ ठाकुरजी के भोग के लिए बजट नहीं होने और तंगहाली का हवाला देकर पल्ला झाड रहे हैं. वहीं दूसरे राज्यों में अरबो रूपए की संपत्ति अफसरों की लापरवाही के कारण खुर्द बुर्द होती जा रही है.