जयपुर: बिड़ला तारामंडल में लोगों ने देखा सूर्य ग्रहण का नजारा, अब 559 साल बाद बनेगा संयोग

साल 2019 का तीसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण पर 296 साल बाद दुर्लभ संयोग बना जब धनु राशि में छह ग्रह मौजूद रहे.   

जयपुर: बिड़ला तारामंडल में लोगों ने देखा सूर्य ग्रहण का नजारा, अब 559 साल बाद बनेगा संयोग
जयपुर के बिड़ला तारामंडल में लोगों ने देखा सूर्य ग्रहण

दीपक गोयल, जयपुर: साल 2019 का तीसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) पर 296 साल बाद दुर्लभ संयोग बना जब धनु राशि में छह ग्रह मौजूद रहे. ऐसा दुर्लभ संयोग 7 जनवरी 1723 को हुआ था और अब ऐसा संयोग 559 साल बाद 2578 में बनेगा. अगला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 21 जून 2020 को दिखाई देगा. राजधानी जयपुर में भी लोगों ने साल के अंतिम सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) के नजारे को देखा. धार्मिक मान्यता के कारण सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) के दौरान मंदिरों के पट बंद रहे. 

साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) सुबह 8 बजकर 13 मिनट पर शुरू होकर 10 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहा. सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) का नजारा देखने का बहुत लोगों में क्रेज रहा. जयपुर में सूरज को अंधकार में डूबते हुए 51 प्रतिशत हिस्से को लोगों ने देखा. इस साल का सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) इसलिए भी खास है क्योंकि 296 साल पहले साल 1723 को भी सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) में एक ही राशि में छह ग्रह मौजूद रहे थे. वृद्धि योग और मूल नक्षत्र में हो रहे इस ग्रहण के दौरान गुरुवार और अमावस्या का विशेष संयोग भी रहा.

इस दिन मूल नक्षत्र में 4 ग्रह रहे. वहीं धनु राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु रहे. इन 6 ग्रहों पर राहु की पूर्ण दृष्टि भी रही. इनमें 2 ग्रह यानी बुध और गुरु अस्त रहे. इन ग्रहों के एक राशि पहले (वृश्चिक में) मंगल और एक राशि आगे (मकर में) शुक्र स्थित है. जयपुर में ग्रहण की अवधि 2:42 घंटे ही रहा. सुर्यग्रहण के दौरान जहां कई जगह मंत्रों के जाप किए गए, वहीं कहीं लोगों सुर्यग्रहण देखने बिड़ला तारामंडल पहुंचे. बच्चे, बढ़े और बुजुर्ग सभी लोग ग्रहण देखने पहुंचे. सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) का सूतक बुधवार रात 8 बजे के बाद से शुरू हो गया, जिसकी वजह सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है. साथ ही तमाम मंदिरों के पट भी बंद कर दिए गए हैं. भक्तों के दर्शन के लिए मदिरों के पट सुबह 11 के बाद खुलें. मंदिर के पुजारियों ने ग्रहण के दौरान लोगों को जांप और हवन करने की सलाह दी.

जयपुर स्थित बिड़ला तारामंडल में सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) देखने के लिए सुबह-सुबह शहरवासी पहुंचे और ग्रहण का अद्भुत नजारा देख खुश हुए. बिड़ला तारामंडल के सहायक निदेशक संदीप भट्टाचार्य का कहना है कि राजधानी जयपुर में इसका असर 2  घंटे से ज्यादा का रहा. इस ग्रहण में सिर्फ सूरज का मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है जबकि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित रहता है. यह साल का तीसरा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) है, लेकिन खंडग्रास सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) के रूप में यह साल का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) माना जाएगा. 

यह ग्रहण एक खास खगोलीय घटना है. इससे पहले इस साल 6 जनवरी और 2 जुलाई को आंशिक सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) लगा था. खंड ग्रास का अर्थ अर्थात वह अवस्था जब ग्रहण सूर्य या चंद्रमा के कुछ अंश पर ही लगता है. अर्थात चंद्रमा सूर्य के सिर्फ कुछ हिस्से को ही ढंकता है. यह स्थिति खण्ड-ग्रहण कहलाती है. जबकि संपूर्ण हिस्से को ढंकने की स्थिति खग्रास ग्रहण कहलाती है. 

सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) तब होता है जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चंद्रमा द्वारा आवृत्त हो जाए. सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाने से उत्पन्न हुई खगोलीय घटना के चलते सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाने के कारण सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक सूतक में बच्चों, वृद्धजन और मरीजों को छोड़कर भोजन निषेध है. भट्टाचार्य ने बताया कि साल 2020 में कुल छह ग्रहण लगने वाले हैं, जिनमें पहला चंद्रग्रहण 10 जनवरी को और अंतिम ग्रहण 15 दिसंबर को लगेगा. इनमें दो सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) व चार चंद्र ग्रहण हैं. साल का तीसरा ग्रहण सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 21 जून को लगेगा. सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 21 जून की सुबह 9:15 से शुरू होगा. इस ग्रहण को भारत, दक्षिण पूर्वी यूरोप और एशिया में देखा जाएगा.

बहरहाल, वैज्ञानिक ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना मानते हैं. सरल शब्दों में कहें तो इस घटना के तहत जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य में आ जाता है जिससे सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती है इस घटना को ही सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) कहा जाता है तो वहीं धार्मिक मान्यताएं भी अपना तर्क प्रस्तुत करती हैं. ज्योतिषों के अनुसार ग्रहण से सिर्फ प्रकृति पर ही फर्क नहीं पड़ता बल्कि मानव जाति पर भी इसका प्रभाव पड़ता है.