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कोटा मेडिकल कॉलेज में दवा खरीद में गड़बड़झाले की गूंज विधानसभा तक पहुंची!

कोटा का मेडिकल कॉलेज प्रशासन के दवा व सर्जिकल आइटम के लोकल स्तर पर हुए टेंडर पर सवाल उठ रहा है.

कोटा मेडिकल कॉलेज में दवा खरीद में गड़बड़झाले की गूंज विधानसभा तक पहुंची!
कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा ने इस मामले को विधानसभा में उठाया.

कोटा/मुकेश सोनी : मेडिकल कॉलेज कोटा में दवा खरीद में गड़बड़झाले की गूंज विधानसभा तक पहुंच गई है. स्थानीय बीजेपी विधायक सन्दीप शर्मा ने सदन में इस मामले को उठाया है. इस दौरान विधायक शर्मा ने मामले की गम्भीरता से जांच करवाने की मांग की है. साथ ही मेडिकल कॉलेज कोटा की ऑडिट करवाने की भी मांग की है. इधर सदन में मामला उठने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन बैकफुट पर आ गया है. बताया जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन अभी भी मामले की लीपापोती में लगा है.

जी मीडिया की खबर का हुआ असर

आपको बता दें कि, कोटा का मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दवा व सर्जिकल आइटम के लोकल स्तर पर टेंडर की थी. जिसमें कई गड़बड़झाले सामने आ रहे है.  जी मीडिया पर प्रमुखता से खबर दिखाने के बाद बीजेपी विधायक संदीप शर्मा ने विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉक्टर गिरीश वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की ऑडिट जांच की मांग की है. शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये पूरा मामला बेहद गम्भीर है. सरकार के ही अधिकारी-कर्मचारी निजी फर्मो के साथ मिलकर सरकारी पैसों की लूट कर रहे हैं. 

कॉलेज प्रशासन ने कहा संबंधित फर्म पर होगी कार्रवाई

 इस संबंध में प्राचार्य गिरीश वर्मा ने कहा, ''जिस फर्म ने दवा सप्लाई नहीं की है, जो मरीजो को जिन वैकल्पिक माध्यम से दवा उपलब्ध करवाई गई है. उन दोनों की राशि में जो अंतर आएगा, उस डिफरेंस की सम्बंधित फर्म से वसूली की जाएगी. इसके अलावा जिन्होंने टेंडर होने के बाद भी दवा सप्लाई नहीं की उनकी जानकारी अधीक्षकों से मांगी है  ताकि सम्बंधित फर्म पर कार्रवाई हो सके.''

कमिशनखोरी के और भी मामलों पर उठना है पर्दा

मामला उजागर होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्राचार्य सहित "जिम्मेदारों" ने चुप्पी साध ली है. इससे पहले भी कमीशनखोरी के खेल में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आंखे मूंद ली थी. जिसका फायदा उठाकर एक फर्म ने तो कम गुणवत्ता की करीब 62 हजार दर्द निवारक जेल अस्पतालों में सप्लाई कर दी. इस मामले में भी कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्य कमेटी को जांच सौंपी थी. बताया जा रहा है की दर्द निवारक जेल में हुई गड़बड़ी की जांच कमेटी ने पांच दिन पहले पूरी कर चुकी है. जिसकी रिपोर्ट प्राचार्य को सौंपी जा चुकी है.