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मस्कट में बंधकों की रिहाई के लिए सक्रिय हुई राजस्थान सरकार

नियमानुसार दो साल बाद डूंगरराम ने कम्पनी अधिकारियों से भारत आने की बात कही तो उन्होंने वीजा वहीं बढ़ाने का आश्वासन देकर रोक लिया. इसके बाद कम्पनी ने न तो वीजा बढ़ाया और न ही वतन वापस भेजा. 

मस्कट में बंधकों की रिहाई के लिए सक्रिय हुई राजस्थान सरकार
डूंगरराम के साथ ही इस कम्पनी में 13 अन्य भारतीय हैं

जयपुर: मस्कट में बंधक राजस्थान के डूंगरराम मेघवाल सहित 14 भारतीय वतन वापसी को तरस रहे हैं. इन्हें न तो भोजन दिया जा रहा है और न ही अन्य जरूरी सुविधाएं. हालत यह है कि इनके वीजा की अवधि खत्म हो गई है और वो मस्कट में बंधक के रूप में जीवन गुजार रहे हैं. डूंगरराम के पिता चेतनराम ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर बेटे सहित सभी 14 भारतीयों को मुक्त कराकर वतन वापसी कराने की गुहार की है. 

राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ मैणासर निवासी चेतनराम मेघवाल का 37 वर्षीय बेटा डूंगरराम करीब चार साल पहले ब्याज पर रकम लेकर मजदूरी के लिए ओमान गया था. डूंगरराम ने 19 अगस्त 2015 को हुसैन फादील एंड पार्टनर नामक कम्पनी में काम करना शुरू किया. नियमानुसार दो साल बाद डूंगरराम ने कम्पनी अधिकारियों से भारत आने की बात कही तो उन्होंने वीजा वहीं बढ़ाने का आश्वासन देकर रोक लिया. इसके बाद कम्पनी ने न तो वीजा बढ़ाया और न ही वतन वापस भेजा. 

डूंगरराम के साथ ही इस कम्पनी में 13 अन्य भारतीय हैं, जिनके साथ भी यही धोखा हुआ है. कम्पनी ने दो वर्ष बाद वेतन देना बंद कर दिया और जरूरी सुविधाएं भोजन, पानी आदि बंद कर दिया. परिजनों का आरोप है कि डूंगरराम व उसके साथियों ने भारतीय दूतावास में गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. उनका वीजा खत्म हो चुका है और पासपोर्ट कम्पनी के पास है. कम्पनी मालिक फरार बताया जा रहा है.वो दाने दाने को मोहताज हो गए हैं और कई बार तो भूखे सोने को मजबूर हैं. 
 
इधर डूंगरराम के पिता चेतनराम, मां किशना देवी व पत्नी रुकमणी ने उसकी वतन वापसी के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा. इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र को अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को कार्रवाई के लिए भेजा गया. गृह विभाग से डूंगराम व उनके साथियों की वतन वापसी के लिए केंद्रीय विदेश सचिव को लिखा जा रहा है. अब देखना यह है कि राज्य सरकार के प्रयास से डूंगरराम व उसके साथियों की वतन वापसी हो पाती है या नहीं.