राजस्थान: ठेकेदारों पर नकेल कसेगा जलदाय विभाग, घटिया काम पर कटेंगे पैसे

तकनीकी मुख्य अभियंता दिनेश कुमार सैनी का कहना है कि अक्सर यही देखा जाता है कि ठेकेदार टेंडर तो ले लेते हैं, लेकिन या तो वे काम बीच में छोड़कर चले जाते हैं या फिर काम में गुणवत्ता नहीं होती

राजस्थान: ठेकेदारों पर नकेल कसेगा जलदाय विभाग, घटिया काम पर कटेंगे पैसे
फाइल फोटो

जयपुर: जलदाय विभाग ने ठेकेदारों की कार्यशैली और गुणवत्ता को सुधारने के लिए नए नियम लागू किए हैं. अब यदि ठेकेदार काम बीच में छोड़कर चला जाता है या फिर घटिया काम करता है तो ठेकेदार द्धारा जमा एडिशनल परर्फोमेंस सिक्योरिटी राशि से वसूला जाएगा. ठेकेदारों को वर्कआर्डर के एग्रीमेंट से पहले सिक्योरिटी राशि जलदाय विभाग को जमा करवानी होगी. 

अक्सर देखा जाता है कि ठेकेदार प्रोजेक्ट्स में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, जिसके चलते जलदाय विभाग को भारी नुकसान झेलना पडता है, लेकिन नए नियमों के बाद अब ये नुकसान विभाग की जेब से नहीं, बल्कि ठेकेदार की जेब से वसूला जाएगा. यदि जलदाय विभाग के इंजीनियर ठेकेदार के कामकाज से संतुष्ठ हैं या प्रोजेक्ट का काम संतोषजनक हुआ है तो उसे 40 फीसदी जमा परर्फोमेंस सिक्योरिटी राशि लौटाई जाएगी. नए नियम लागू होने के अब उन ठेकेदारों को झटका लगा है जो सिर्फ कांट्रेक्ट चाहने के लिए निर्धारित कीमत से कम राशि पर ही काम करने को राजी हो जाते हैं. कम राशि पर काम करने के लिए तैयार होने में ठेकेदारों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही मिलीभगत की आशंका बनी रहती है.

कितना देना होगा एडिशनल परफार्मेंस सिक्योरिटी
नए सकुर्लर के मुताबिक 10 लाख या उससे अधिक राशि के कामकाज पर एडिशनल परफार्मेंस सिक्योरिटी लागू होगा. इस सर्कुलर के मुताबिक अगर कोई ठेकेदार निविदा में न्यूनतम दर डालते हुए निविदा के कामकाज के लिए विभाग की ओर से तय कुल एस्टीमेटेड कोस्ट से 85 फीसदी से कम राशि पर काम करने को तैयार हो जाता है तो उसे अब एडिशनल परर्फोंमेंस सिक्योरिटी राशि जमा करवानी होगी. यह राशि कामकाज की कुल लागत की 85 फीसदी से कम राशि के बीच के अंतर की 40 फीसदी राशि होगी. अभी कांट्रेक्टर को सिर्फ 10 फीसदी परर्फोमेंस सिक्योरिटी देने का ही प्रावधान है. 

अभी पीडब्ल्यूडी, जेडीए में ठेकेदारों से नियमानुसार एडिशनल परर्फोमेंस राशि ली जाती है. ताकि काम बीच में छोड़ने या गलत करने पर इसे जब्त कर नुकसान की कुछ भरपाई की जा सके.