पुलवामा हमले के आक्रोश बीच राजनाथ बोले- समय आएगा जब लोगों की आकांक्षा पूरी होगी

सिंह ने कहा कि पुलवामा घटना के बाद "ऐसा मूड अभी भी नहीं है कि कोई भी उत्साह के साथ किसी भी कार्यक्रम में भाग ले सकता है."

पुलवामा हमले के आक्रोश बीच राजनाथ बोले- समय आएगा जब लोगों की आकांक्षा पूरी होगी
केंद्रीय गृहमंत्री सिंह ने कहा, "समय आएगा जब लोगों की भावनाओं, उनकी उम्मीदों...उन अपेक्षाओं की पूर्ति होगी."

नई दिल्ली: पुलवामा आतंकवादी हमले को लेकर देश में व्याप्त आक्रोश के बीच केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि ‘‘समय आएगा’’ जब लोगों की इच्छा और उम्मीदें ‘‘पूरी’’ होगी. दिल्ली के वेस्ट टू वंडर पार्क के उद्घाटन के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि पुलवामा घटना के बाद "ऐसा मूड अभी भी नहीं है कि कोई भी उत्साह के साथ किसी भी कार्यक्रम में भाग ले सकता है."

सिंह ने कहा, "लेकिन, मैं बहुत आश्वस्त हूं और मैं आपको आश्वासन देना चाहता हूं कि समय आएगा जब लोगों की भावनाओं, उनकी इच्छाओं, उनकी उम्मीदों...उन अपेक्षाओं की पूर्ति होगी."

केन्द्रीय मंत्री ने हालांकि अपने बयान पर विस्तार से जानकारी नहीं दी. भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच उनका यह बयान आया है. गौरतलब है कि गत 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. 

'भारत के वीर' के तहत 20 करोड़ से अधिक का दान
14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के लिए शुरू की गई पहल 'भारत के वीर' के तहत अब तक 80,000 लोगों ने 20 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया है. यह आंकड़ा बीते सोमवार तक का है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अप्रैल 2017 में भारत के वीर वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया था. बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार भी इस पहल में शामिल थे.

सरकार ने कहा कि इस पहल के तहत 46 करोड़ रुपये जमा हुए जिसमें से अधिकांश राशि का वितरण हो चुका है. तकनीकी रूप से नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर द्वारा समर्थित और भारतीय स्टेट बैंक चालित इस बेवसाइट व ऐप के जरिए कोई अपनी इच्छा से चयनित वीरों के नाम वित्तीय मदद दे सकते हैं या आमतौर पर संग्रहित राशि में अपना योगदान दे सकता है. किसी भी जवान विशेष या उनके रिश्तेदार को कोई अधिकतम 15 लाख रुपये का दान दे सकता है. 

15 लाख रुपये से अधिक की राशि दूसरे जवान या भारत के वीर के खाते में जमा की जाती है. इस कॉर्पस यानी संग्रहित धन का प्रबंधन प्रख्यात व्यक्तियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जाता है जो समान रूप से केंद्रीय सैन्य पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों के परिवारों को उनकी जरूरत के आधार पर वितरित करने का फैसला लेते हैं. 

सीएपीएफ में गृह मंत्रालय के तहत आने वाले असम राइफल्स (एआर), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) शामिल हैं.