समझौता ब्लास्ट मामला: पाकिस्‍तानी पीड़‍ितों को मिलेगा गवाही का मौका, फैसला 20 मार्च को
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समझौता ब्लास्ट मामला: पाकिस्‍तानी पीड़‍ितों को मिलेगा गवाही का मौका, फैसला 20 मार्च को

एनआईए ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि एनआईए द्वारा जो 13 पाकिस्तानी गवाहों की लिस्ट दी गयी थी, उसमें अर्ज़ी लगाने वाली पाकिस्तानी महिला राहिला वकील का नाम नहीं है.

 समझौता ब्लास्ट मामला: पाकिस्‍तानी पीड़‍ितों को मिलेगा गवाही का मौका, फैसला 20 मार्च को

पंचकुला: पानीपत के बहुचर्चित समझौता ब्लास्ट मामले में पाकिस्तान की महिला राहिला वकील द्वारा गवाही देने की अर्जी पर एनआईए कोर्ट 20 मार्च को फैसला सुना सकती है. सोमवार को एनआईए कोर्ट में राहिला वकील की अपील पर एनआईए और बचाव पक्ष के वकीलों ने अपना-अपना पक्ष रखा. पाकिस्तानी पीड़ितों को गवाही देने का मौका मिलेगा या नहीं इस पर एनआईए कोर्ट अपना फैसला बुधवार को सुना सकती है.

एनआईए के वकील आरके हांडा ने बताया कि समझौता ब्लास्ट में अपने पिता को खोने वाली राहिला वकील की अर्ज़ी पर सोमवार को एनआईए कोर्ट में बहस हुई. एनआईए ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि एनआईए द्वारा जो 13 पाकिस्तानी गवाहों की लिस्ट दी गयी थी, उसमें अर्ज़ी लगाने वाली पाकिस्तानी महिला राहिला वकील का नाम नहीं है. लेकिन फैसला सुनाए जाने से ठीक पहले वकील मोमिन मालिक के जरिए पाकिस्तानी राहिला वकील राहिला ने सेक्शन 311 के तहत एनआईए अदालत में एक अर्जी दायर की है. एनआईए के वकीलों ने पाकिस्तानी गवाहों का पूरा विवरण और पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग के हवाले से भेजे गए समन का पूरा हवाला कोर्ट में दिया है.

पाकिस्तानी महिला राहिला के एडवोकेट मोमिन मलिक ने कहा कि राहिला ने अर्ज़ी दाखिल कर इस केस में गवाही देने की अनुमति मांगी है. मोमिन मलिक ने अदालत में एक बार फिर तर्क दिया कि पाकिस्तानी पीड़ितों को गवाही का मौका नहीं मिला है. उन्हें समन तामील नहीं हो पाए हैं. इसलिए उन्हें मौका दिया जाना चाहिए। मोमिन मलिक ने कहा कि राहिला वकील के खून का सैंपल लिया गया था और जब यह हादसा हुआ उसे भारत द्वारा वीज़ा भी दिया गया था. इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि राहिला वकील का नाम गवाहों की सूची में शामिल नहीं है. मोमिन मलिक ने कहा इसके अलावा और भी कई गवाहों ने गवाही देने की इच्छा जताई है. आज कोर्ट में राहिला के भारतीय रिश्तेदार भी पहुँचे.

पंचकूला एनआईए कोर्ट बुधवार को यह फैसला सुना सकती है कि पाकिस्तान के पीड़ित परिवारों या गवाहों को गवाही का मौका दिया जाए या फिर इस केस को अंजाम तक पहुंचाया जाए.

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