मराठा आरक्षण कानून को बॉम्बे हाईकोर्ट में AIMIM के विधायक ने दी चुनौती

एआईएमआईएम वि‍धायक इम्तियाज जलील ने औरंगाबाद में  कहा, बिना चर्चा विधानमंडल में मराठा आरक्षण को पास क‍िया गया ,ये हमें मंजूर नहीं है.

मराठा आरक्षण कानून को बॉम्बे हाईकोर्ट में AIMIM के विधायक ने दी चुनौती

व‍िशाल कारोले, औरंगाबाद : एआईएमआईएम के विधायक इम्तियाज जलील नें मराठा आरक्षण के खिलाफ बॉम्बे हाइकोर्ट में याचिका दायर की है. इसको लेकर शनि‍वार को औंरगाबाद में भूमिका स्पष्ट करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मराठा आरक्षण के हम खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई उसका विरोध करते हैं. इम्तियाज जलील ने मराठा समाज को आरक्षण देते वक्त अपनाई गई प्रक्रिया के मुसलमान समाज के लिए अन्यायपूर्ण होने का दावा किया.

 

उन्‍होंने कहा, मराठा आरक्षण को लेकर एक रिपोर्ट आई, जो महाराष्ट्र सरकार ने स्वीकार की. महाराष्ट्र विधानमंडल में बिना चर्चा किए मराठा आरक्षण बिल पास किया गया. ये सही नहीं है. महाराष्ट्र विधानमंडल में मराठा समाज का प्रतिनिधित्व ज्‍यादा है. इसके बावजूद बिना चर्चा विधानमंडल में मराठा आरक्षण पर सहमति‍ दी गयी ,ये हमे मंजूर नही है.

मुसमानों को आरक्षण मिले, इसलिए सच्चर आयोग, रंगनाथन आयोग, महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग नें रिपोर्ट दी. लेकिन किसी ने इस पर विचार नही किया. कांग्रेस के कार्यकाल में ये आयोग बने थे, लेकिन कांग्रेस ने मुसलमानों को आरक्षण देनें पर ध्यान नहीं दिया. गायकवाड    आयोग नें मराठा समाज को आरक्षण देने की सिफारिश की तो उसे तत्काल मंजूर किया गया. जितनी जरुरत आरक्षण की मराठा समाज को है उतनी मुसलमानों को भी है.

इम्तियाज जलील ने सवाल उठाते हुए कहा, मुसलामानों पर कब तक अन्याय सहन करते रहेंगे. मराठा आरक्षण को लेकर नया कानून जो महाराष्ट्र सरकार ने बनाया है वो कानून के अनुकूल नहीं. मराठा समाज के आंकड़े और मुसलमान समाज के आंकड़े याचिका में बॉम्बे हाइकोर्ट मे रखे गए हैं. इसके तहत मुसलमानों को भी आरक्षण मिले ये मांग कोर्ट के सामने रखी है. महाराष्ट्र सरकार के आरक्षण कानून को कोर्ट में चुनौती दी गई है. जमात ए हिंद संगठन ने किसी याचिका को वापस लिया गया था. इसमें एक बड़े नेता का दबाव है. सरकार हमें न्याय देनें में विफल रही है तो कोर्ट का ही विकल्प हमारे पास था. अब कोर्ट में लड़ाई लडेंगे और मुसलमानों को न्याय मिलेगा.