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अनंतनाग में CRPF पर हुए हमले में हुआ था स्टील बुलेट का इस्तेमाल

कश्मीर में तैनात जवानों के खिलाफ फिदायीन हमले के लिए पाकिस्तान की आईएसआई जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को चीन में बने स्टील बुलेट मुहैया करा रही है.

अनंतनाग में CRPF पर हुए हमले में हुआ था स्टील बुलेट का इस्तेमाल
फाइल फोटो- PTI

नई दिल्लीः अनंतनाग में इस महीने 12 जून को सीआरपीएफ पर हुए हमले में स्टील बुलेट का इस्तेमाल आतंकियो ने किया था. जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की जवाबी करवाई में हमले में शामिल एक आतंकी मारा गया था और उसके पास से  एके 47 राइफल भी बरामद हुई थी. जांच के दौरान हमले के जगह स्टील बुलेट के कई राउंड्स मिले है. स्टील बुलेट ने कई जवानों के बुलेट प्रूफ जैकेट को भेद दिया था जिसकी वजह से कई जवान घायल हो गए थे . अनंतनाग आतंकी हमले में  सीआरपीएफ के  5 जवान के साथ साथ जम्मू कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी शहीद हुए थे.

कश्मीर में तैनात जवानों के खिलाफ फिदायीन हमले के लिए पाकिस्तान की आईएसआई जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को चीन में बने स्टील बुलेट मुहैया करा रही है. खुफिया सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अपने हर हमले में स्टील बुलेट का इस्तेमाल किया है. इन बुलेट की सबसे खास बात यह होती है कि ये जवानों के बुलेट प्रूफ जैकेट को बड़े आराम से भेद सकती हैं. 
जांच एजेंसियों के मुताबिक पुलवामा आत्मघाती हमले से लेकर के त्राल में हुए आतंकी हमलों में भी जैश-ए-मोहम्मद ने इन स्टील बुलेट का इस्तेमाल किया था.

जैश -ए-मोहम्मद ने हर बड़े हमले में स्टील बुलेट का इस्तेमाल किया है. यह बुलेट एके-47 राइफल से भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. आतंकी अपनी मैगजीन में 2-3 स्टील बुलेट का कॉन्बिनेशन रखते हैं और जरूरत पड़ने पर वह हमारे जवानों पर हमले करते हैं. कई बार यह बुलेट आर्मड बुलेट को भी भेद  सकती है. साल 2017 में 27 दिसंबर को जम्मू कश्मीर के लेथपुरा में हुए आत्मघाती हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने स्टील बुलेट का इस्तेमाल किया था. कश्मीर में पहली बार आतंकियों की साजिश की जानकारी इसी हमले से पता चली थी.

एजेंसी के मुताबिक आतंकियों के स्टील बुलेट यानी आर्मड पायरसिंग बुलेट के ख़तरे को बड़ी गंभीरता से जांच की जा रही है. वीआईपी के सुरक्षा में बुलेट प्रूफ गाड़ियों का इस्तेमाल होता है और ऐसे में आतंकियों की अब इस नई रणनीति को देखते हुए वीआईपी सुरक्षा की दोबारा समीक्षा हो रही है.कश्मीर में तैनात एक और अधिकारी ने हमें बताया कि पिछले साल दिसंबर में पुलवामा में ही एक जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर नूर मोहम्मद तंत्रे यानी पीर बाबा का एनकाउंटर किया गया था. एजेंसियों को शक है कि कश्मीर में स्टील बुलेट लाने वाला कोई और नहीं बल्कि नूर मोहम्मद तंत्रे है.

नूर मोहम्मद तंत्रे ने स्टील बुलेट की खेप को जैश-ए-मोहम्मद के बाकी आतंकियों तक पहुंचा दिया, जो कश्मीर में मौजूद हैं. इन आतंकियों को यह बताया गया है कि किस तरीके से और कब इन स्टील बुलेट का इस्तेमाल सुरक्षाबलों के खिलाफ करना है. जैश-ए-मोहम्मद अक्सर सुरक्षा एजेंसियों के कैंप में हमले के दौरान भी इन स्टील बुलेट का इस्तेमाल कर रहा है. पूरी दुनिया भर में ऐसी बुलेट बैन है, लेकिन अब आतंकियों तक इन बुलेट की पहुंच हो गई है. आतंकी इन स्टील बुलेट का इस्तेमाल एके-47 राइफल से भी कर रहे हैं. अभी तक सुरक्षाबलों के पास जो बुलेट जैकेट और शील्ड हैं स्टील बुलेट को झेलने के लिए नाकाफी हैं.

दुनिया के कई देशो में स्टील बुलेट जिसे आर्मर पिएर्सिंग बुलेट यानि एपी बुल्लेट्स भी कहा जाता है  पूरी तरह से बैन है ऐसे में पाकिस्तान चोरी छुपे दुनिया के उन देशो से इन स्टील बुलेट की खरीद कर रहा है जो चोरी छुपे इसके व्यापर में शामिल हैं..ख़ुफ़िया एजेंसीज की इस रिपोर्ट से सुरक्षा चिंता बढ़ गई है .

ख़ुफ़िया एजेंसीज को शक है कि अनंतनाग में हुए सीआरपीएफ पर हमले का मास्टरमाइंड आतंकी मुश्ताक़ अहमद जरगर है. अनंतनाग में हुए हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए थे. इस हमले की जिम्मेदारी अल उमर मुजाहिदीन (एयूएम )नाम के संघटन ने ली है जिसका हेड मुश्ताक़ अहमद ज़रगर है. ख़ुफ़िया एजेंसीज जो शक है कि पाकिस्तान की आईएसआई की मदद से ज़रगर ने जैश और हिजबुल के आतंकियो से हमला कराया है.

केंद्रीय सुरक्षा में तैनात एक अधिकारी के मुताबिक अल उमर मुजाहिदीन का कश्मीर में नेटवर्क नही के बराबर है और हो सकता है कि उसने इस हमले के लिए जैश और हिजबुल की मदद ली हो. देखा जाए तो इस साल 14 फरवरी को पुलवामा में हुए सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में जिसमे 40 जवान शहीद हो गए थे उसके बाद सीआरपीएफ पर अब तक का ये सबसे बड़ा हमला हुआ है .

मुश्ताक़ अहमद ज़रगर कश्मीर आतंकी है जिसे इंडियन एयरलाइन्स आईसी 814 की हाईजैकिंग के बदले भारत ने रिहा किया था. ज़रगर के साथ जैश का चीफ मौलाना मसूद अजहर और उमर सईद शेख को भारत ने रिहा किया था. ज़रगर के बारे में ख़ुफ़िया एजेंसीज को शक है कि वो बालाकोट के जैश  टेरर कैम्प में भी आतंकियो की ट्रेनिंग में शामिल रहा है. भारत ने पुलवामा हमले के बाद बालाकोट के इसी कैम्प पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था.