पहली से 12वीं तक के छात्रों ने ली प्रतिज्ञा, माता-पिता की मर्जी से ही करेंगे शादी

देश के साथ ही पूरी दुनिया के युवा जोड़े आज वेलेंटाइन-डे मान रहे हैं. लेकिन सूरत में इसे कुछ अलग ही तरीके से मनाया जा रहा है. अडाजण इलाके की  प्रेसिडेंसी स्कुल में 600 छात्रों ने अपने मां-बाप की मर्जी के बिना शादी नहीं करने की प्रतिज्ञा की है.

पहली से 12वीं तक के छात्रों ने ली प्रतिज्ञा, माता-पिता की मर्जी से ही करेंगे शादी

चेतन पटेल/ सूरत : देश के साथ ही पूरी दुनिया के युवा जोड़े आज वेलेंटाइन-डे मान रहे हैं. लेकिन सूरत में इसे कुछ अलग ही तरीके से मनाया जा रहा है. अडाजण इलाके की  प्रेसिडेंसी स्कुल में 600 छात्रों ने अपने मां-बाप की मर्जी के बिना शादी नहीं करने की प्रतिज्ञा की है. आज जबकि देशभर में पाश्चात्य संस्कृति का बोलबाला है और प्रेमी- प्रेमिका एक-दूसरे को प्रपोज करते हैं, लेकिन यहां कुछ और ही नजारा नजर आया.

14 फरवरी यानी वेलेंनटाइन डे के दिन युवा अपनी पसंद की लड़की या लड़के को प्रोपोस करते हैं और नए रिलेशनशिप के लिए कमिट होते हैं. वहीं देश में तमाम लोग ऐसें हैं जो इस संस्कृति का जमकर विरोध करते हैं. देशभर में कई जगह आज के दिन प्रेमी जोड़े के अकेले बैठे मिलने पर या एक-दूसरे को वेलेंटाइन विश करने के दौरान कई संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा उनसे मारपीट की जाती है. लेकिन इस सबसे अलग भारतीय संस्कृति और परंपरा को बचाने के लिए एक ऐसी ही पहल सूरत के स्कुल संचालकों द्वारा की गई.

यहां स्कुल के छात्रों के साथ अध्यापकों ने एक अनोखे कार्यक्रम का आयोजन किया. अडाजण इलाके में स्थित प्रेसिडेंसी स्कुल में पढ़ने वाले सभी छात्रों को इकठ्ठा कर 14 फरवरी को प्रतिज्ञा दिलाई गई कि वे अपनी माता -पिता की मर्जी के खिलाफ शादी नहीं करेंगे. इतना ही नहीं उन्होंने कसम खाई कि उनकी शादी अपने परिवार की परवानगी के साथ ही होगी. इसके अलावा छात्र दुनिया में सभी लोगों और संबंधियों से प्यार करेंगे. इस कार्यक्रम में छात्र -छात्राओं ने भी बड़े ही उत्साह से हिस्सा लिया.

कक्षा पहली से बारहवीं तक के छात्र-छात्राएं इस प्रतिज्ञा कार्यक्रम में जुटे. इस दौरान उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे भविष्य में अपने माता-पिता की इच्छा के बिना शादी नहीं करेंगे. इस मौके पर छात्रों, उनके अभिभावक और एनजीओ से जुड़े बच्चों ने स्कुल प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को काफी प्रेरणा दायक और सराहनीय कदम बताया. छात्रों के अभिभावकों ने भी स्कूल प्रशासन की जमकर प्रशंसा की. अभिभावकों ने कहा कि आज के समय में बच्चे कहीं न कहीं पाश्चात्य संस्कृति के संपर्क में आ जाते हैं.
ऐसे में बच्चे भारतीय मूल संस्कृति और परंपराओं को भूल जाते हैं. ऐसे माहौल में प्रशासन की तरफ से यह पहल काफी सराहनीय है.