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सूरत आगः प्रारंभिक जांच में नगर निगम, बिल्डर की ओर से खामी पाई गई

प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर आई है कि बिल्डर ने 'प्रभाव शुल्क' के भुगतान के साथ संरचना को मान्यता देने के लिए अर्जी दी तो यह बात छिपा ली कि उन्होंने तीन मंजिला कॉम्पलेक्स में चौथी मंजिल का निर्माण भी किया है.

सूरत आगः प्रारंभिक जांच में नगर निगम, बिल्डर की ओर से खामी पाई गई
फाइल फोटो

गांधीनगरः सूरत की भीषण आग की घटना की प्रारंभिक जांच में स्थानीय नगर परिषद के अधिकारियों और बिल्डरों की ओर से कई तरह की त्रुटि की बात सामने आ रही है. शहर के तक्षशिला कॉम्पलेक्स में लगी इस आग में  एक कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले 22 छात्रों की मौत हो गयी थी.जांच में पाया गया है कि कोचिंग क्लास की संरचना भी आग जैसी घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील थी. इसमें छत काफी नीचे था और कुर्सियों की जगह बैठने के लिए टायर का इस्तेमाल किया जा रहा था.

प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर आई है कि बिल्डर ने 'प्रभाव शुल्क' के भुगतान के साथ संरचना को मान्यता देने के लिए अर्जी दी तो यह बात छिपा ली कि उन्होंने तीन मंजिला कॉम्पलेक्स में चौथी मंजिल का निर्माण भी किया है.

एक शीर्ष नौकरशाह के मुताबिक संबंधित अधिकारी ने बिल्डर के प्रस्ताव को मंजूरी देते वक्त खुद बिल्डिंग का दौरा नहीं किया था.

सूरत हादसे के बाद कांग्रेस ने सख्त अग्नि सुरक्षा मानकों को लागू किए जाने की मांग की
बता दें कि गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धनानी ने सोमवार को सख्त अग्नि सुरक्षा मानदंडों को लागू करने की मांग की. उन्होंने यह मांग पिछले दिनों सूरत में एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से 22 छात्रों की मौत होने की पृष्ठभूमि में की है. कांग्रेस नेता ने मांग की कि राज्य सरकार सूरत की घटना की व्यापक जांच करे. उन्होंने कहा कि वे राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान अग्नि सुरक्षा का मुद्दा उठाएंगे. धनानी ने फोन पर पीटीआई से कहा कि हम सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहेंगे कि राज्य के सभी स्कूलों, कोचिंग कक्षाओं, अस्पतालों, व्यावसायिक इमारतों और होटलों में अग्नि सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू किया जाए.

उन्होंने कहा कि नगर निकायों को ऐसे परिसरों की नियमित जांच करनी चाहिए और आग से सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं करने वाले परिसरों को बंद किया जाना चाहिए. गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि कई शहरों में, किंडरगार्टन, प्ले-स्कूल और कोचिंग कक्षाएं रिहायशी परिसरों में चलाई जा रही हैं जबकि कानून में इसकी अनुमति नहीं है.

उन्होंने कहा कि रिहायशी क्षेत्रों में ऐसी व्यावसायिक गतिविधियों को तुरंत बंद करने की जरूरत है.