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परिवारवाद की राह पर चलीं मायावती, भाई और भतीजे को पार्टी में दी बड़ी जिम्मेदारी

बसपा सुप्रीमो की ओर से बुलाई गई बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए. बीएसपी कार्यकर्ता रामजी गौतम को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाए गए हैं. पार्टी के वरिष्‍ठ नेता दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाने का फैसला लिया गया. 

परिवारवाद की राह पर चलीं मायावती, भाई और भतीजे को पार्टी में दी बड़ी जिम्मेदारी
आनंद कुमार और आकाश आनंद की फाइल फोटो.

लखनऊ: बीएसपी सुप्रीमो मायावती रविवार (23 जून) को संगठन की अहम बैठक की. इस बैठक में देशभर के प्रदेश अध्यक्षों के साथ वरिष्ठ पदाधिकारियों को बुलाया गया. बैठक के दौरान मायावती ने कई अहम फैसले लिए हैं. बसपा सुप्रीमो ने अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है. वहीं, भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्‍ट्रीय संयोजक) की जिम्मेदारी दी है. 

बसपा सुप्रीमो की ओर से बुलाई गई बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए. बीएसपी कार्यकर्ता रामजी गौतम को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाए गए हैं. पार्टी के वरिष्‍ठ नेता दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाने का फैसला लिया गया. वहीं, गिरीश चंद्र को लोकसभा में मुख्य सचेतक बनाने का फैसला लिया गया है. 

जनता दल सेक्‍युलर से बसपा में शामिल हुए दानिश अली को पार्टी ने अमरोहा से प्रत्‍याशी बनाया था. बैठक के दौरान देशभर में बसपा का विस्तार करने, नई रणनीति बनाने, उत्तर प्रदेश उपचुनाव की तैयारियों और पार्टी में बदलाव को लेकर चर्चा हुई. 

मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार और भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में अहम पद देने के बाद, ये साफ कर दिया है कि पार्टी में उनके अपनों की दखल बढ़ने वाली है. इसके साथ ही यूपी में 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की रणनीति के साथ ही कई अहम बातों पर चर्चा की गई और फैसले लिए गए. 

बीएसपी चीफ के ऐलान के बाद आकाश आनंद अब पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए काम करेंगे. कहा जा रहा है कि पुरानी पद्धति पर काम कर रही बीएसपी में आकाश के आने के बाद से कई बदलाव आए. लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती की बैठक में पहुंचे नेताओं से मीटिंग हॉल में जाने से पहले मोबाइल, पेन, बैग और कार की चाबी जमा करा लिए गए. 

बसपा ने लोकसभा चुनाव में इस बार पिछले चुनाव की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया है. बसपा ने इस बार 10 सीटें जीती हैं. यूपी को छोड़कर देश के अन्य राज्यों में उसे कोई सफलता नहीं मिली है. मायावती 18 जून को लखनऊ वापस लौटी हैं. इसके बाद से वह लगातार संगठन की गतिविधियों पर मंथन कर रही हैं. आपको बता दें बीएसपी सुप्रीमो मायावती केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रही है. लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के लेकर कई बार निशाना साधा है.