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आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन

मसूद अजहर को लेकर सुरक्षा परिषद के सदस्यों से लगातार बातचीत चल रही है. भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इस मुद्दे पर पूरा साथ है.

आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन
भारत को उम्मीद है कि अमेरिकी संसद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमेशा साथ देता रहेगा.

नई दिल्ली/वाशिंगटन: पुलवामा हमले के बाद भारत के उठाये कदमों का अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस में पूरा समर्थन है. आतंक के खिलाफ लड़ाई में वह भारत के साथ खड़े हैं. जहां तक पाकिस्तान की ओर से कार्रवाई का सवाल है कि केवल आतंकी संगठनों के नाम वगैरह बदल दिए जाते हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है. मसूद अजहर को लेकर सुरक्षा परिषद के सदस्यों से लगातार बातचीत चल रही है. भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इस मुद्दे पर पूरा साथ है.

पाकिस्तान की ओर से F-16 फाइटर प्लेन के इस्तेमाल किए जाने का मामला विदेश सचिव विजय गोखले के अमेरिकी दौरे के दौरान अमेरिकी प्रशासन के सामने उठाया गया. इस दौरान कहा गया कि पाकिस्तान ने F16 का भारत के खिलाफ हमला करने के लिए इस्तेमाल किया था. उम्मीद है कि अमेरिकी सरकार कुछ समय में सार्वजनिक तौर पर इसे लेकर अपना पक्ष रखेगी.

मसूद अजहर के मामले में चीन को आश्वस्त करने के लिए समय चाहिए वह लें, हम इंतजार करेंगे. इस संबंध में चीन और पाकिस्तान के भी आपस में कुछ मुद्दे हैं, लेकिन जिस तरह से हमने विंग कमांडर अभिनंदन के मामले में हमने कोई डील नहीं किया उसी तरह इस मामले में हम सुरक्षा परिषद के किसी भी सदस्य (चीन) से कोई डील नहीं करने वाले हैं.

अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की कोशिश में अमेरिका
उधर, ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब चीन के साथ गहन ‘सद्भावना’ वार्ता कर रहे हैं, ताकि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति में वैश्विक आतंकवादी घोषित करने को लेकर कोई समझौता किया जा सके. इस मामले के जानकार लोगों के अनुसार अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव की भाषा को लेकर भी चीन से बातचीत कर रहे हैं.

चीन ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति में पेश प्रस्ताव को बुधवार को अपने वीटो के अधिकार के माध्यम से चौथी बार बाधित कर दिया था. इस प्रस्ताव को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने पेश किया था. 

इन तीनों देशों ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश-ए-मोहम्मद के हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के कुछ दिनों बाद प्रस्ताव पेश किया था. इस हमले में सीआरपीएस के 40 जवान शहीद हो गए थे.