ZEE जानकारी : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका को भारत रत्न

प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं. 2012 से 2017 तक वो देश के राष्ट्रपति रहे

ZEE जानकारी : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका को भारत रत्न

आज सबसे पहले.. हम आज की सबसे बड़ी ख़बर का विश्लेषण करेंगे. और खबर ये है कि केन्द्र सरकार ने इस बार के भारत रत्न सम्मान का ऐलान कर दिया है. 

इस बार भारत रत्न सम्मान तीन शख्सियतों को दिया गया है. 

इनमें पहला नाम है - पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 
दूसरा नाम है - स्वर्गीय नानाजी देशमुख . जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता और समाज सेवक थे. 
और तीसरा नाम है - स्वर्गीय भूपेन हज़ारिका, जो एक संगीतकार और गायक थे. 

सबसे ज्यादा आश्चर्य प्रणब मुखर्जी के नाम को लेकर है. क्योंकि प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं. 2012 से 2017 तक वो देश के राष्ट्रपति रहे. उन्होंने जीवनभर बीजेपी और RSS के विरोध की राजनीति की. लेकिन 2012 में वो देश के राष्ट्रपति बन गए. 

प्रणब मुखर्जी अचानक से चर्चा में तब आए जब राष्ट्रपति के पद से पदमुक्त होने के बाद वो RSS के एक समारोह में नागपुर चले गए थे. 7 जून 2018 को प्रणब मुखर्जी ने RSS के मंच से देशभक्ति और राष्ट्रवाद की परिभाषा देश को समझाई थी. 

82 वर्ष के प्रणब मुखर्जी ने अपने जीवन के 40 वर्ष कांग्रेस पार्टी को समर्पित किए हैं . UPA के शासन में ही वो देश के राष्ट्रपति बन गये. 

लेकिन फिर उन्होंने RSS के समारोह में हिस्सा लिया. उस वक्त कांग्रेस के कम से कम 30 बड़े नेताओं ने प्रणब मुखर्जी से गुज़ारिश की थी कि वो नागपुर ना जाएं, लेकिन प्रणब मुखर्जी नहीं माने. 

वो गए और बाकायदा वहां भाषण भी दिया. उस दिन भी हमने आपको ये बताया था कि प्रणब मुखर्जी के इस कदम का भारत की राजनीति पर प्रभाव पड़ेगा. 

और ऐसा ही हुआ. आज भारत सरकार ने प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दे दिया. 

भारत रत्न को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए. लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि सरकार ने लोकसभा चुनावों से ठीक पहले तीन-तीन भारत रत्न देकर राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है. 

क्योंकि ये बात तय मानी जा रही है कि बीजेपी की सीटें इस बार कम हो रही हैं. और ऐसे में बीजेपी की नज़र पश्चिम बंगाल पर भी हैं. क्योंकि पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं. जिसमें बीजेपी के पास कुल 2 सीटें हैं. यहां ममता बनर्जी का डंका बजता है. इसलिए अगर बीजेपी को पश्चिम बंगाल की लोकसभा सीटों में सेंध लगानी है, तो हो सकता है कि इसमें प्रणब मुखर्जी बीजेपी की मदद करें. 

नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को महाराष्ट्र के परभानी ज़िले में हुआ था. वो एक सामाजिक कार्यकर्ता थे. इसके अलावा नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ से भी जुड़े रहे. 
वो कहते थे कि "मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूं". इस लक्ष्य पर चलते हुए नानाजी देशमुख ने भारत के कई गांवों की तस्वीर बदल दी. नानाजी देशमुख ने भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट को, अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं बस गये. 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. 27 फरवरी 2010 को 93 वर्ष की उम्र में नानाजी देशमुख का निधन हो गया था. और उनकी इच्छा के मुताबिक निधन के बाद उनके शरीर के अंगों का दान कर दिया गया था. 

महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीटें हैं. जिनमें से बीजेपी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 23 सीटें मिली थीं. 

भारत के पूर्वोत्तर राज्य... असम के रहने वाले भूपेन हज़ारिका को ज़्यादातर लोग एक गायक के रूप में जानते हैं लेकिन उनकी प्रतिभा को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं किया जा सकता. वो एक ऐसे विलक्षण कलाकार थे...जो गीत लिखते भी थे ..उन्हें संगीत भी देते थे और गाते भी थे . भूपेन हज़ारिका... Assamese भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति के अच्छे जानकार भी थे . पूरी दनिया में Assamese भाषा को पहचान दिलाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है . भारत सरकार ने भूपेन हज़ारिका को भारत रत्न देकर पूरे असम का दिल जीतने की कोशिश की है . 

भूपेन हज़ारिका अपने करियर में करीब 1 हज़ार से ज़्यादा गीतों को अपनी आवाज़ दी और 15 से ज़्यादा पुस्तकें लिखी . आप में से बहुत कम लोगों को ये जानकारी होगी कि संगीत के क्षेत्र में आने से पहले वो पत्रकारिता भी कर चुके थे . वो मासिक पत्रिका अमर प्रतिनिधि और प्रतिध्वनि के संपादक रह चुके हैं . 

भारत की सबसे पवित्र नदी....गंगा की दुर्दशा पर भूपेन हज़ारिका ने एक गीत गाया था जिसके बोल थे ...गंगा तू बहती है क्यों .. जब भी उनकी बात होती है.. ये गीत याद आ जाता है.

पूर्वोत्तर भारत में कुल 25 लोकसभा सीटें हैं. और अकेले असम में ही कुल 14 लोकसभा सीटें हैं. जिनमें से पिछली बार बीजेपी ने 7 सीटें जीती थीं. 

भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है...जिसे 1954 में शुरू किया गया था...ये सम्मान उन लोगों को दिया जाता है...जिन्होंने मानवता के लिए किसी भी क्षेत्र में महान सेवा का भाव दिखाया हो.. और देश के लिए कुछ किया हो...भारत रत्न देते समय... नस्ल, क्षेत्र, भाषा, या स्त्री पुरुष का कोई भेदभाव नहीं किया जाता...लेकिन इतिहास में कई मौके ऐसे आए हैं जब इस सम्मान पर सवाल उठे हैं. बार बार देश की जनता के मन में ये सवाल आया है कि क्या ये सम्मान राजनीतिक है ? हमने भारत रत्न सम्मान पर गहरा रिसर्च किया है.. हम कुछ बिंदुओं की तरफ आपका ध्यान खींचना चाहते हैं.. 

आपको जानकर हैरानी होगी कि 1954 से लेकर 2019 तक सबसे ज़्यादा भारत रत्न नेताओं को मिले हैं...अब तक 22 नेताओं को ये सम्मान मिला है, जिनमें से 16 नेता कांग्रेस के हैं.

जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी...दो ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं... जिन्होंने भारत रत्न के लिए ख़ुद अपने नाम की सिफारिश की थी..इन दोनों को अपने पद पर रहते हुए भारत रत्न मिला.. जो काफी आश्चर्यजनक है

अब तक 7 प्रधानमंत्रियों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है...जिनमें से 3 प्रधानमंत्री नेहरू-गांधी परिवार के रहे हैं.. यानी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी

अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है...जिनमें से 43 पुरुष और 5 महिलाएं हैं

सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनके निधन के 41 साल बाद भारत रत्न दिया गया...1991 में राजीव गांधी के साथ सरदार पटेल को भारत रत्न दिया गया था

अब ये भी देख लेते हैं कि वो कौन सी हस्तियां हैं जिन्हें अब भी भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का इंतज़ार हैं 

पहला नाम है हॉकी के जादूगर ध्यानचंद का... 

इसके अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोस

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह

स्वामी विवेकानंद

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम

कम्यूनिस्ट नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु

पेंटर मकबूल फिदा हुसैन

शतरंज के चैंपियन विश्वनाथन आनंद

और
भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के .