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ZEE जानकारी: पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान किया शुरू

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की धमाकेदार शुरुआत की है . आज उन्होंने मेरठ में अपनी पहली चुनावी रैली की . 

ZEE जानकारी: पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान किया शुरू

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की धमाकेदार शुरुआत की है . आज उन्होंने मेरठ में अपनी पहली चुनावी रैली की . 

आज प्रधानमंत्री मोदी बहुत आक्रमक Mood में थे . और उन्होंने अपने शब्द बाणों की वर्षा करके पूरे विपक्ष को घायल कर दिया है. प्रधानमंत्री ने अपने हर विरोधी पर चुन-चुन कर निशाना साधा . आज उन्होंने तीन राज्यो में तीन रैलियां कीं. उन्होंने पहली रैली उत्तर प्रदेश के मेरठ में की, दूसरी रैली उत्तराखंड के रुद्रपुर में और तीसरी रैली जम्मू-कश्मीर के अखनूर में की . अपने भाषण में उन्होंने देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों का विकास, गरीबी, कांग्रेस के इतिहास, राष्ट्रीय सुरक्षा और महागठबंधन समेत सभी मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी . 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन को एक नया नाम दिया है... सराब . इसमें 'स' का मतलब है समाजवादी पार्टी, 'रा' का मतलब है राष्ट्रीय लोक दल और 'ब' का मतलब है बहुजन समाज पार्टी. नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'सराब' उत्तर प्रदेश की सेहत के लिए हानिकारक है. यानी वो इस गठबंधन को राजनीतिक शराब की संज्ञा दे रहे थे.

विपक्ष इस हमले से बहुत आहत है . समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक Tweet में लिखा है कि 'सराब' का मतलब मृगतृष्णा और भ्रम होता है . सराब वो धुंधला सा सपना है जो बीजेपी 5 साल से दिखा रही है और जो कभी हासिल नहीं होता. अब जब नया चुनाव आ गया तो वो नया सराब दिखा रहे हैं. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की Minimum Income Guarantee योजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि जो लोग 70 सालों में गरीबों के बैंक अकाउंट नहीं खोल पाए क्या वो उसमें रुपए डालेंगे ? 

प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी के गरीबी हटाओ के नारे पर व्यंग्य करते हुए कहा कि जब वो 8-10 साल के थे, तब सुना करते थे कि सरकार गरीबी हटाने के बारे में बात कर रही है. जब 20-22 साल के हुए तो उन्होंने इंदिरा गांधी का 'गरीबी हटाओ' का नारा सुना. प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस हटाओ, गरीबी अपने आप हट जाएगी . 

कल जब भारत ने अंतरिक्ष में ASAT मिसाइल का परीक्षण किया था तब कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक Tweet करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्य किया था . राहुल गांधी ने Tweet में भारत के वैज्ञानिकों को सफल परीक्षण की बधाई दी थी और 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस की बधाई दी थी. आज प्रधानमंत्री ने इसका जवाब देते हुए कहा कि हमने A-SAT की बात की तो उन्होंने उसे थिएटर का Set समझ लिया . 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने सभी क्षेत्रों में यानी पृथ्वी, आकाश और अंतरिक्ष में सर्जिकल स्ट्राइक की है लेकिन विपक्ष उनसे सबूत मांग रहा है. प्रधानमंत्री ने लोगों से सवाल पूछा कि उन्होंने सपूत चाहिए या फिर सबूत चाहिए . उन्हें भारत के वो नेता चाहिएं जो पाकिस्तान में हीरो हैं या वो नेता चाहिए जो भारत में भारत के हीरो हैं ? 

दिलचस्प बात ये है कि रैली शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विरोधी पार्टी... राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह के पिता चौधऱी चरण सिंह को याद किया . उन्होंने चौधरी चरण सिंह के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की . चौधरी चरण सिंह, देश में किसानों के बहुत बड़े नेता माने जाते हैं . खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में उनका बड़ा प्रभाव था . 

वर्ष 2014 में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मेरठ से ही की थी और इसके पीछे एक ख़ास वजह है. आज प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 1857 की क्रांति की शुरुआत मेरठ से हुई थी. कमल और रोटी 1857 की क्रांति का गुप्त संदेश था. और एक बार फिर जनता को कमल के निशान का EVM Button दबाकर क्रांति करनी है. यहां इस बात का मतलब समझना ज़रूरी है. हमने इसके पीछे का सच जानने के लिए गहरा रिसर्च किया.

1857 में क्रांतिकारियों ने सैनिकों के बीच संदेश पहुंचाने के लिए कमल के फूल को माध्यम बनाया और जनता के बीच संदेश पहुंचाने के लिए रोटी को माध्यम बनाया . कमल का फूल.. सिपाहियों की एक पलटन से दूसरी पलटन तक घूमते हुए.. आखिरी सिपाही के हाथों तक जाता था . इसी तरह एक गांव रोटी बनाकर उसका एक टुकड़ा अपने पास रखकर बचा हुआ टुकड़ा दूसरे गांव तक पहुंचाता था . गांव के लोग उस बची हुई रोटी को खा लेते थे . और इसके बाद उस गांव के खेत में पैदा हुए गेहूं से रोटी बनाकर, उसके कुछ टुकड़े अपने पास रखकर, दूसरे गांव तक पहुंचा देते थे . ये रोटियां क्रांति का प्रतीक थीं... और सबसे ख़ास बात ये है कि इन रोटियों का आकार भी निश्चित था .

धीरे-धीरे कमल और रोटी की ये क्रांति बहुत तेज़ी से भारत में फैलने लगी . अंग्रेजों को भी इस गुप्त अभियान पर शक हो गया था लेकिन वो ये नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर इसका मतलब क्या है ? क्योंकि रोटी, बहुत सामान्य वस्तु थी. मथुरा के मजिस्ट्रेट Mark Thornhill ने इस अभियान पर शोध करवाया . उन्हें पता चला कि क्रांति की ये रोटियां हर रात 300 किलोमीटर का सफर तय कर रही थीं . ये रोटियां दक्षिण में नर्मदा नदी तक और उत्तर भारत में नेपाल की सीमाओं तक पहुंच गई थीं . आप ये भी कह सकते हैं कि उस समय क्रांति की ये रोटियां पूरे देश में Viral हो गई थीं . 

ज़रा सोचिए... जब Social Media नहीं था, Youtube, Facebook और Twitter नहीं था . तब कमल और रोटी के माध्यम से क्रांति का गुप्त संदेश पूरे देश में पहुंचाया जा रहा था . 

अब दोबारा आज के दौर में लौटते हैं . 2014 में चुनाव प्रचार का दायित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही था . और इस बार 2019 में भी बीजेपी को जीत दिलाने की ज़िम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही है .

2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर 2013 से मई 2014 में चुनाव प्रचार खत्म होने तक 437 रैलियां और 5 हजार 827 चुनावी कार्यक्रम किए थे. उन्होंने 15 सितंबर 2013 को मेरठ में रैली शुरू करने के बाद 25 राज्यों में करीब 3 लाख किलोमीटर का सफर तय किया था . 

अब नरेंद्र मोदी पर प्रधानमंत्री पद की ज़िम्मेदारी है . इसे निभाते हुए उन्होंने पिछले तीन महीने में उन्होंने 50 से ज्यादा सार्वजनिक सभाएं की हैं . 

इस बार मार्च के आखिरी हफ्ते से लेकर मई तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 125 रैलियां तय की गई हैं .

बीजेपी ने हर राज्य को Blocks में बांटा है. एक Block में 4 संसदीय सीटें हैं और इसे ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री की रैलियों का कार्यक्रम तैयार किया गया है . उत्तर प्रदेश में उनकी 20 रैलियां होंगी, बिहार में 10, पश्चिम बंगाल में 10 और महाराष्ट्र में 12 रैलियां होंगी

24 मार्च से ही बीजेपी ने विजय संकल्प सभाएं शुरू कर दी हैं . बीजेपी हर रोज़ पूरे देश में 200 से 250 सभाएं कर रही है. 

Social Media के नए मैदान में भी बीजेपी ने आक्रामक रणनीति बनाई है . सिर्फ Twitter पर ही बीजेपी के 'मैं भी चौकीदार' अभियान से जुड़े Tweets को 1 हज़ार 680 करोड़ बार देखा जा चुका है . 
2014 में सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से युवाओं को जोड़ा गया था. तब वीडियो स्ट्रीमिंग और Holographic प्रोजेक्शन के ज़रिये प्रचार अभियान को हाईटेक बनाया गया था. इस बार ये प्रचार अभियान Next Level पर पहुंच चुका है. NaMo App के ज़रिए प्रधानमंत्री ने करोड़ों लोगों तक सीधी पहुंच बनाने की कोशिश की है.

31 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मैं भी चौकीदार' अभियान में हिस्सा लेंगे और 500 स्थानों पर लोगों से बात करेंगे . पिछली बार जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को चायवाला कहा था तब उन्होंने चाय पर चर्चा शुरू कर दी थी. इस बार जब विपक्ष ने चौकीदार चोर है के नारे का जवाब.. "मैं भी चौकीदार अभियान" से दिया है.

इस बार के चुनाव अभियान में बीजेपी, Short Films बनाकर भी प्रचार कर रही है. ये एक नया प्रयोग है.

वर्ष 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद, आज तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी पराजय का मुंह नहीं देखा . अगर आप उनके भाषण और प्रचार शैली का अध्ययन करें तो उसमें आपको एक विशेष तत्व मिलेगा. और वो है राष्ट्र का गौरव . 

गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान, नरेंद्र मोदी अक्सर गुजरात के गौरव की बात करते थे . लेकिन वर्ष 2013 में प्रधानमंत्री के पद का उम्मीदवार बनने के बाद उन्होंने राष्ट्र के गौरव को अपने चुनाव प्रचार की सबसे बड़ी खासियत बनाया. आज जम्मू कश्मीर के अखनूर में अपनी रैली में उन्होंने अपने बीते हुए उन दिनों को याद किया... जब उन्होंने वर्ष 1992 में श्रीनगर के लाल चौक पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया था . तिरंगे की वो यादें आज भी उनके मन में ताज़ा हैं.

आज हमने Zee News की विशाल Library से बीजेपी की 27 वर्ष पुरानी एकता यात्रा की तस्वीरें निकली हैं. वो वर्ष 1991 का दौर था . बीजेपी ने कश्मीर के मुद्दे पर पूरे भारत में अपना संदेश पहुंचाने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा निकाली थी . ये यात्रा 11 दिसंबर 1991 को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी और 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लालचौक पर खत्म हुई थी. इस यात्रा के प्रबंधन की पूरी ज़िम्मेदारी नरेंद्र मोदी की थी . जालंधर में इस यात्रा पर आतंकवादी हमला भी हुआ था जिसमें 3 यात्री शहीद हुए थे . तब नरेंद्र मोदी ने आतंकवादियों को ललकारते हुए कहा था कि दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें लाल चौक पर तिरंगा फहराने से रोक नहीं सकती. 

वायुसेना के किसी पायलट के लिये सबसे बडी शान की बात ये होती है कि वो अपने देश में बना विमान उड़ाये. भारत भी आजकल इस गर्व को महसूस कर रहा है. और इसकी वजह है तेजस Fighter Jet.

मलेशिया में लंगकावी इंटरनेशनल maritime and aerospace exhibition चल रही है. 
दुनिया इसे LIMA 2019 एयर शो के नाम से जानती है. लड़ाकू विमान बनाने वाली कई बड़ी कंपनियां इस एयरशो में अपने फाइटर जेट लेकर पहुंचीं हैं. ख़ास बात ये है कि इस बार तेजस ने भी अपना तेज दुनिया को दिखाया है. 

LIMA 2019 एयर शो के दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी तेजस को क़रीब से देखा. उन्हें ये विमान काफ़ी पसंद आया. 2016 में पहली बार तेजस ने Bahrain एयर शो में अपना अंतरराष्ट्रीय debut किया था. आज एक बार फिर वो ख़ुद को दुनिया के सामने साबित कर रहा है.

इसके अलावा अगले कुछ दिनों में Indian Air Force का वो ख़्वाब पूरा हो जाएगा...जो उसने दशकों पहले देखा था. तेजस का उत्पादन करने वाली कंपनी Hindustan Aeronautics Limited ने कहा है कि उसने 16वें तेजस विमान को तैयार कर लिया है. अब इस महीने के अंत तक इसकी उड़ान के सभी टेस्ट पूरे हो जाएंगे और फिर इसे भारतीय वायु सेना को सौंपने की औपचारिकता पूरी की जाएगी.

लड़ाकू विमान की एक squadron में 16 से 18 विमान होते हैं. 16वें तेजस के आने के बाद इसकी squadron नंबर 45 यानी Flying Daggers का परिवार पूरा हो जाएगा. Flying Daggers तेजस की पहली Squadron है जो तमिलनाडु के सुलूर में तैनात है.

यानी Indian Air Force के पास अब तेजस की पूरी squadron है. HAL के मुताबिक़ उसे अभी वायु सेना से 40 तेजस विमानों का ऑर्डर मिला है. इनमें 8 ट्रेनर विमान भी शामिल हैं. तेजस का उत्पादन 2014 में शुरू हुआ था. HAL का दावा है कि अब वो हर साल 8 विमान बनाने की क्षमता तक पहुंच गया है. तेजस, एक Made in India लड़ाकू विमान है और इसकी वजह से भारत की Aviation Engineering की तारीफ़ पूरी दुनिया में हो रही है.