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ZEE जानकारी: राजनीति में किसी की बीमारी भी बन जाती है मुद्दा

इस समय भारतीय राजनीति के कई बड़े नेता बीमार हैं . आज हम आपको बताएंगे कि नेताओं के स्वास्थ्य का राजनीति पर कितना असर पड़ता है . 

ZEE जानकारी: राजनीति में किसी की बीमारी भी बन जाती है मुद्दा

अब हम देश के बड़े बड़े नेताओं के स्वास्थ्य के बारे में बात करेंगे . इस समय भारतीय राजनीति के कई बड़े नेता बीमार हैं . आज हम आपको बताएंगे कि नेताओं के स्वास्थ्य का राजनीति पर कितना असर पड़ता है . क्योंकि बड़े नेताओं के छोटे छोटे फैसलों से करोड़ों लोगों की ज़िंदगी पर फर्क पड़ता है. देश के भविष्य की योजनाओं पर फर्क पड़ता है. देश में होने वाले अरबों रुपये के निवेश पर फर्क पड़ता है. इसलिए देश के नेताओं का स्वास्थ्य ठीक रहना चाहिए. और खास तौर पर तब जब नेता Ruling Party यानी सत्ताधारी दल के हों. 

अगर किसी पार्टी के बड़े नेता, या मंत्री अस्वस्थ हों, तो उस पार्टी की रणनीति पर भी फर्क पड़ता है. जैसे इन दिनों बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह बीमार हैं. और दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं. अब अगर अमित शाह बीमार है, तो बीजेपी की चुनाव जीतने की पूरी रणनीति पर फर्क पड़ेगा. क्योंकि सिर्फ 3 महीने के अंदर देश में आम चुनाव होने हैं . और बीजेपी पहले से ही चुनावी Mode में आ चुकी है. 

हमारे देश में किसी की बीमारी का मज़ाक उड़ाना बहुत अनैतिक माना जाता है . लेकिन राजनीति में बीमारी को भी निशाना बना लिया जाता है . 

बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह Swine Flu से पीड़ित हैं और इस वक्त दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं . लेकिन उनकी बीमारी पर कई राजनेता विवादित टिप्पणियां कर रहे हैं . 

कर्नाटक से कांग्रेस के राज्य सभा सांसद BK हरिप्रसाद ने अमित शाह को लेकर अभद्र टिप्पणी की है. और कहा है कि अगर अमित शाह ने कर्नाटक में कांग्रेस और JDS की सरकार गिराने की कोशिश की तो वो और ज़्यादा बीमार हो जाएंगे . 

बी के हरिप्रसाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं . वो चौथी बार राज्यसभा से सांसद हैं और कांग्रेस के संगठन में 4 राज्यों के महासचिव रह चुके हैं . लेकिन ऐसा बयान देकर उन्होंने अपनी गरिमा खुद ही घटाई है . 

लेकिन राजनीति में गरिमा का ख्याल अब कोई नहीं रखता है . TMC के एक नेता और बंगाल के पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने अमित शाह से ये पूछा है कि आखिर Swin Flu सिर्फ उन्हें ही क्यों हुआ ? इस सवाल के बाद बयानों का राजनीतिक युद्ध शुरू हो गया.

वित्त मंत्री अरुण जेटली चुनाव से करीब तीन महीने पहले अमेरिका गए हैं . और माना जा रहा है कि वो अपने इलाज के लिए ही अमेरिका में हैं .
अभी कुछ महीने पहले ही AIIMS में उनकी किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ था. और लगभग चार महीने से वो Media और सार्वजनिक जीवन से दूर थे . 
ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद जब वो घर आए तो कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने घर से ही Video Conferencing के ज़रिए अपना काम काज शुरू कर दिया था . लेकिन ऑपरेशन से पहले और कुछ समय बाद तक उनके मंत्रालय का काम काज रेल मंत्री पीयूष गोयल संभाल रहे थे. 

इसी हफ़्ते केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी एम्स में भर्ती हो गए थे. उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. लेकिन आज उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. उन्हें सोमवार को एम्स में भर्ती करवाया गया था.

इससे पहले केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की बेहोश होने की भी तस्वीरें आई थीं. 7 दिसंबर 2018 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी स्टेज पर ही बेहोश हो गए थे. उनके साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल भी मौजूद थे. नितिन गडकरी ने खुद Tweet करके ये जानकारी दी कि कम Sugar Level की वजह से उनकी तबीयत खराब हुई थी. 

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट के एक अहम सदस्य और बीजेपी के नेता मनोहर पर्रिकर की बीमारी पर भी लगातार चर्चा होती रही. फरवरी 2018 में ये ख़बर आई थी, कि मनोहर पर्रिकर को Pancreatic ailment है. और उसके बाद वो इसका इलाज करवाने अमेरिका भी गए. अब वो वापस तो आ गए हैं, लेकिन उनकी ऐसी तस्वीरें सामने आती रहती हैँ. जिनमें उनकी नाक में Nasal Tube लगी हुई है, और इन तस्वीरों में वो बेहद कमज़ोर नज़र आते हैं. 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट की एक और अहम सदस्य सुषमा स्वराज का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है. दिसंबर 2016 में उनका भी दिल्ली के एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है. और सुषमा स्वराज ये भी ऐलान कर चुकी हैं कि वो अब अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. और इसके पीछे उन्होंने अपनी खराब सेहत का हवाला दिया था. 

देश को अपने नेताओं की सेहत की चिंता करनी चाहिए . लोगों को अपने नेताओं की बीमारियों के बारे में पता होना चाहिए . लेकिन ये भी याद रखना चाहिए कि किसी व्यक्ति की बीमारी उसका निजी मामला होता है . और निजी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए . 

UPA की chairperson सोनिया गांधी की इस बात के लिए कई बार आलोचना की गई कि उन्होंने देश में वर्षों तक सरकार चलाई लेकिन अपनी बीमारी को सार्वजनिक नहीं किया . 

अगस्त 2013 में सोनिया गांधी की तबीयत संसद में ही ख़राब हो गई थी. जिसके बाद उन्हें सीधे अस्पताल ले जाना पड़ा था. वो अपने इलाज के लिए अक्सर अमेरिका जाती रहती हैं. 

पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की भी दिल्ली के एम्स में जनवरी 2009 में बाइपास सर्जरी हुई थी. 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के घुटने का ऑपरेशन भी उस वक्त हुआ था... जब वो प्रधानमंत्री थे . जून 2001 में मुंबई में अटल बिहारी वाजपेयी के घुटनों का ऑपरेशन हुआ था . 

घुटनों के ऑपरेशन के बाद उनका स्वास्थ्य कुछ दिन तक ठीक रहा . लेकिन वर्ष 2008 के बाद उनकी सेहत बिगड़ती चली गई और वो सक्रिय राजनीति से दूर हो गए . लंबी बीमारी के बाद पिछले वर्ष ही उनका निधन हुआ था . 

हमारे देश के बाकी नेता भले ही अस्वस्थ नज़र आते हों, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काफी फिट हैं. वो 68 साल के हैं. लेकिन इस उम्र में भी वो बहुत फिट हैं. अपने कई Interviews में उन्होंने ये बताया है कि वो रोज़ाना योग करते हैं. और योग की वजह से वो इतने फिट रहते हैं. 

नरेंद्र मोदी की तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी बहुत फिट है. वैसे हमारे देश के नेता चाहें तो उनसे प्रेरणा ले सकते हैं. 

एक मज़बूत देश को चलाने के लिए फिट होना कितना ज़रूरी है ये 66 साल के व्लादिमीर पुतिन से सीखना चाहिए. आमतौर पर लोगों का मानना है कि फिटनेस के लिए सुबह जल्दी उठना और रात के वक्त जल्दी सोना जरूरी है. पर पुतिन के मामले में ये बिल्कुल उलटा है. एक अंतर्राष्ट्रीय मैग्ज़ीन ने 3 साल की रिसर्च के बाद पुतिन के रूटिन के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी. पुतिन सुबह काफी देर से सोकर उठते हैं और नाश्ता करने में उन्हें तकरीबन दोपहर हो जाती है. नाश्ते के बाद वो हल्का व्यायाम करते हैं. पुतिन हर रोज़ पूरे दो घंटे स्विमिंग करते हैं. स्विमिंग खत्म करने के बाद वो जिम का रूख करते हैं, वर्कआउट करते हैं. वो काफी देर रात कर काम करते हैं. उनकी ऐसी तस्वीरें अक्सर सामने आती रहती हैं. 

पुतिन का स्वास्थ्य कैसा है और उनका हर रोज़ का Routine क्या है ये कोई राज़ की बात नहीं है. ये कोई छुपी हुई बात नहीं है. इसके बारे में वो खुद पूरी दुनिया को समय समय पर बताते रहते हैं.

कई बार नेता अपनी कमज़ोरियों को छुपाने के लिए भी बीमारी को छुपाने की कोशिश करते हैं . 
पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना को Tuberculosis था . कुछ इतिहासकार और विद्वान ये कहते हैं कि उन्होंने अपनी बीमारी की बात छुपा कर रखी थी . अगर देश को उनकी बीमारी के बारे में पता होता... और ये जानकारी होती कि अब वो सिर्फ चंद महीनों के मेहमान हैं तो शायद भारत का बंटवारा रुक सकता था . 

14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान का निर्माण हुआ था और अगले ही वर्ष 11 सितंबर 1948 को मुहम्मद अली जिन्ना का Tuberculosis की वजह से निधन हो गया था . बंटवारे के सिर्फ एक साल बाद जिन्ना का निधन हो गया था . 

Larry Collins और डौमिनीक लैपियर ने अपनी किताब Freedom at Midnight में लिखा है कि अगर जिन्ना की इस बीमारी के बारे में देश को पता होता तो भारत के बंटवारे को रोका जा सकता था .