ZEE जानकारी: महेंद्र सिंह धोनी के दस्ताने पर लगा 'बैज' क्यों है चर्चा में?

आज देश में महेंद्र सिंह धोनी के विकेट कीपिंग Gloves की चर्चा हो रही है. पर इस चर्चा में मुद्दा Gloves नहीं बल्कि उस पर बनी हुई एक आकृति है. जिस पर ICC ने आपत्ति जताई है. 

ZEE जानकारी: महेंद्र सिंह धोनी के दस्ताने पर लगा 'बैज' क्यों है चर्चा में?

आज देश में महेंद्र सिंह धोनी के विकेट कीपिंग Gloves की चर्चा हो रही है. पर इस चर्चा में मुद्दा Gloves नहीं बल्कि उस पर बनी हुई एक आकृति है. जिस पर ICC ने आपत्ति जताई है. 

हम धोनी के Wicket Keeping Gloves पर मौजूद इस आकृति या चिह्न की बात करेंगे, जिसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है. और International Cricket Council ने धोनी के दस्तानों पर मौजूद चिह्न पर आपत्ति जताई है.

धोनी ने 5 जून को दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ मैच में जो Gloves पहने थे, उसमें बलिदान Badge लगाया हुआ था. इस Badge पर विवाद खड़ा करने वालों में भारत का बुद्धिजीवी वर्ग भी है. और इस पर पाकिस्तान में भी एजेंडा चलाया जा रहा है. जिसमें वहां के पत्रकार से लेकर नेता, सभी शामिल हैं. सबसे पहले ये समझिए, कि ये Badge है किस चीज़ का ?

धोनी के दस्तानों पर 'बलिदान Badge' की एक आकृति है. ये भारतीय सेना की Para SF का Badge है. Para SF, भारतीय सेना की Parachute Regiment का हिस्सा है. इसके Logo में Commando Dagger के साथ दो पंख दर्शाए गए हैं. और नीचे लिखा है, 'बलिदान'...हालांकि, धोनी ने जो दस्ताने पहने थे उस में सिर्फ आकृति दिखाई गई है. बलिदान शब्द नहीं लिखा है. 

अब सवाल ये है, कि धोनी ने अपने दस्ताने पर ये Badge क्यों लगाया? इसकी दो मुख्य वजहें हैं. पहली ये, कि महेंद्र सिंह धोनी का भारतीय सेना के प्रति प्यार जगज़ाहिर है. और दूसरी ये, कि उन्हें 8 साल पहले ही, Territorial Army के Parachute Regiment में Honorary लेफ्टिनेंट कर्नल की Rank दी गई थी. 'बलिदान Badge' के प्रतीक को अपने दस्तानों पर जगह देकर, धोनी ने सिर्फ भारतीय सेना के शौर्य का सम्मान किया है. लेकिन, क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था यानी ICC को लगता है, कि ये उसके नियमों के खिलाफ है. 

ICC के नियमों के मुताबिक, खिलाड़ियों और टीम के अधिकारियों को Arm Bands या कपड़ों से कोई भी निजी संदेश देने की अनुमति नहीं है. हालांकि ICC के Cricket Operations Department से अनुमति लेने के बाद ऐसा किया जा सकता
है. 

नियमों के मुताबिक मैच के दौरान किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय संदेश देने की अनुमति नहीं है. 

ICC ने अपने नियमों में ये भी स्पष्ट किया है, कि अगर कोई Cricket Board या टीम, किसी संदेश को लेकर मंजूरी देती है और ICC उससे असहमत है, तो फिर अंतिम निर्णय अंतर्राष्ट्रीय संस्था का ही माना जाएगा. 

अब सवाल ये है, कि क्या इस मामले में महेंद्र सिंह धोनी पर कोई मामला बनता है ? नियमों से साफ है, कि धोनी या BCCI को बलिदान Badge के इस्तेमाल से पहले ICC की मंजूरी लेनी चाहिए थी. लेकिन, ऐसा नहीं किया गया. दूसरी तरफ BCCI की Committee of Administrators के चीफ विनोद राय ने स्पष्ट किया है, कि धोनी ने कोई नियम नहीं तोड़ा है. उनके दस्तानों पर मौजूद चिह्न, सेना का Original बलिदान Badge नहीं है. बल्कि वो उससे मिलता-जुलता भर है. इसिलए, धोनी पर कोई मामला नहीं बनता. भारतीय सेना के सूत्रों ने हमें बताया है, कि धोनी के दस्तानों पर मौजूद बलिदान Badge, सेना का नहीं है. 

हालांकि, ICC की आपत्ति के बाद एक्शन शुरु हो गया है. धोनी के बलिदान Badge की नक्काशी वाले दस्तानों की Clearance के लिए औपचारिक अपील की गई है. इस बीच ICC ने भी आश्वासन दिया है, कि वो BCCI के जवाब पर गौर करेगी. हालांकि, अब ये मामला सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी तक सीमित नहीं रह गया है. बल्कि इस विवाद को भारत में मौजूद पाकिस्तान के भक्तों और पाकिस्तान ने बहुत बड़ा बना दिया है. जिसे एक देश के तौर पर हम बिल्कुल स्वीकार नहीं कर सकते.

ICC, क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था है. भारत के ही शशांक मनोहर, इसके Chairman हैं. लेकिन, जिस प्रकार से धोनी के दस्तानों पर मौजूद बलिदान Badge के नक्काशी को लेकर इतना विवाद खड़ा किया गया है, उस पर वो खामोश हैं. 

सवाल ये उठता है, कि क्या ऐसे नियम सिर्फ एक टीम के लिए बने हैं ? आज हम तस्वीरों और तथ्यों की मदद से ICC की इस सोच को भी Expose करेंगे. और आपको बताएंगे, कि कैसे उसने समय-समय पर पाकिस्तान जैसे देश को नियमों की धज्जियां उड़ाने के बावजूद माफ कर दिया. वो भी ICC Events में. जहां कड़े नियमों की बात होती है. 

2016 में भारत में ICC World T-20 का आयोजन हुआ था. और ICC के नियमों के मुताबिक उसके Events में किसी भी तरह का राजनीतिक संदेश देने की अनुमति नहीं है. लेकिन तीन साल पहले पाकिस्तान के तत्कालीन कप्तान शाहिद अफरीदी ने स्टेडियम में खड़े होकर 'कश्मीर' का ज़िक्र किया था. लेकिन उस वक्त ICC ने ना तो कोई कार्रवाई की...और ना ही अफरीदी के बयान पर कोई आपत्ति जताई थी.

अब ICC के दोहरे मापदंड के कुछ और उदाहरण देखिए. 

वर्ष 2014 में भारत और इंग्लैंड के बीच एक टेस्ट सीरीज़ हुई थी. ये एक Bilateral Series थी. और ऐसे सीरीज़ में भी ICC के नियम लागू होते हैं. क्योंकि, ये मूल रुप से क्रिकेट के नियम होते हैं. और इसी के तहत 5 साल पहले इंग्लैंड के खिलाड़ी Moeen (मोईन) Ali को संदेश देने वाला Wristband पहनने से रोक दिया गया था. Moeen Ali ने उस सीरीज़ के दौरान 'Save Gaza' और 'Free Palestine' वाले Wristbands पहन रखे थे. और उन्होंने एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी. England and Wales Cricket Board ने इसके लिए उन्हें इजाज़त दी थी. लेकिन ICC ने फैसला बदल दिया.

लेकिन, जब पाकिस्तान जैसा देश ऐसे राजनीतिक और सैन्य संदेश देने की कोशिश करता है. तो ICC कुछ नहीं करती. 2016 में पाकिस्तान की टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी. और उस वक्त Lords Test में सेंचुरी लगाने के बाद पाकिस्तान की टेस्ट टीम के तत्कालीन कप्तान मिस्बाह उल हक़ ने ना सिर्फ पाकिस्तानी सेना के लिए Push-Ups लगाए. बल्कि मैच जीतने के बाद पूरी पाकिस्तानी टीम ने सैन्य संदेश देते हुए, Push-Ups किए. लेकिन ICC ने उन पर कोई ऐतराज़ नहीं जताया.

इस बीच पाकिस्तान और उसका समर्थन करने वाले लोगों ने धोनी के Gloves और उसमें मौजूद चिह्न को अपमानित करना शुरु कर दिया है. 

पाकिस्तान के मंत्री फवाद हुसैन तो एक कदम आगे निकल गए हैं. और ये कहा है, कि धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने गए हैं, महाभारत के लिए नहीं. उन्होंने बड़ी आसानी से इस घटना को युद्ध वाली मानसिकता से जोड़ दिया है. और भारत की मीडिया को घेरते हुए कहा है, कि हमें सीरिया, अफगानिस्तान या रवांडा जाकर युद्ध लड़ना चाहिए.

ये एक हारे हुए व्यक्ति और उसके देश की सोच है. जिसका काम ही भारत को बदनाम करना है. और धोनी या भारतीय क्रिकेट टीम के अन्य खिलाड़ियों को लेकर पाकिस्तान से ऐसी प्रतिक्रिया पहले नहीं आई है. बल्कि वो कई वर्षों से एजेंडा चलाते आए हैं. फर्क सिर्फ इतना है, कि अब इस लिस्ट में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी शामिल हो गए हैं.

धोनी के Gloves वाले विवाद के बीच सेना का रुख बिल्कुल साफ़ है. सेना के सूत्रों का कहना है, कि धोनी के दस्ताने पर लगी आकृति पैराशूट रेजीमेंट की है ही नहीं. 

भारतीय सेना का कोई भी Badge, Flag या निशान एक खास पैटर्न, खास तरीक़े के रंग और खास तरह के आकार का होता है. तभी उसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी जाती है. पैराशूट रेजीमेंट की कुल 9 बटालियन स्पेशल फोर्सेज़ हैं. और 5 Airborn कमांडो बटालियन. स्पेशल फोर्सेज़ की बटालियन के नाम के आगे SF लिखा जाता है. जैसे 9 PARA(SF)...सिर्फ इन 9 बटालियनों के सैनिक ही इस Badge को पहनते हैं. इसमें दो पंखों के बीच उल्टा कमांडो Dagger बना होता है और नीचे हिंदी में बलिदान लिखा होता है. इस Badge को Maroon रंग की बैकग्राउंड पर बनाया जाता है. धोनी के दस्ताने पर जिस Badge की आकृति है, उसका रंग या आकार उस Badge जैसा नहीं है. जैसा Para Sf में किया जाता है. धोनी के Gloves में सिर्फ पंख और डैगर बने हैं. उनके नीचे बलिदान नहीं लिखा है.

हमें लगता है कि BCCI को देशहित के बारे में सोचना चाहिए. और ICC पर दबाव बनाना चाहिए. BCCI एक स्वतंत्र संस्था है और दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. 
ICC के World Cup जैसे Events भारत की वजह से ही चलते हैं. ICC के लिए भारतीय क्रिकेट टीम सोने की चिड़िया है. अभी ICC की जो भी कमाई होती है, उसमें से 80 प्रतिशत से ज़्यादा भारतीय दर्शकों और भारतीय टीम के Matches के Media Rights की वजह से होती है. ICC के जिस Tournament में भारतीय क्रिकेट टीम खेलती है, उसकी लोकप्रियता सबसे ज्यादा हो जाती है. और उस Tournament के Broadcasting Rights सबसे महंगे बिकते हैं. और अगर भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हो, तो फिर तो BCCI और ICC दोनों की चांदी हो जाती है. 

इसका एक उदाहरण हम आपको देते हैं. इस बार के World Cup में 16 जून को भारत और पाकिस्तान का मैच होना है.

जानकारी के मुताबिक इस मैच को देखने के लिए 4 लाख लोगों ने टिकट की अर्ज़ी दे रखी है. जबकि स्टेडियम की क्षमता सिर्फ 25 हज़ार लोगों की है. 

और फाइनल के टिकट पाने के लिए भी सिर्फ 2 लाख 70 हज़ार आवेदन आए हैं. 

यानी लोग भारत और पाकिस्तान के मैच का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. वैसे भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी कोई मैच होता है, तो वो BCCI और ICC के लिए किसी सुपरहिट मुकाबले से कम नहीं होता. 

अभी तक ICC के जो 4 मैच सबसे ज्यादा देखे गए हैं, उनमें तीन भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए थे. 

भारत और श्रीलंका के बीच 2011 के वर्ल्ड कप का फ़ाइनल मैच दुनिया भर में 55.8 करोड़ लोगों ने देखा था. 

इसी वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सेमीफाइनल को करीब 50 करोड़ लोगों ने देखा था. 

जबकि 2017 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चैंपियंस ट्रॉफी के मुकाबले को 32.4 करोड़ लोगों ने देखा था. 

और चौथे नंबर पर भी भारत और पाकिस्तान का मैच ही है. ये मैच 2015 के वर्ल्ड कप में खेला गया था. जिसे 31 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा था. 

खेलों की दुनिया में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जब कई देशों ने खेलों का बहिष्कार किया है. लेकिन किसी भी खेल या देश का बहिष्कार करवाने के लिए बहुत बड़ी इच्छाशक्ति की ज़रूरत होती है. और अमेरिका और रूस ऐसा कर चुके हैं. 

1980 में Russia की राजधानी Moscow में Olympics हुए थे. ये दौर Russia और अमेरिका के बीच शीत युद्ध का दौर था. तब मॉस्को, सोवियत संघ की राजधानी थी. 1979 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया था. और इसी के विरोध में अमेरिका ने 1980 के Moscow Olympics का बहिष्कार कर दिया था. अमेरिका की ताकत देखिए... इस ओलंपिक्स में अमेरिका के बहिष्कार के बाद 65 देशों ने हिस्सा नहीं लिया था.

इसके 4 साल के बाद 1984 में अमेरिका के Los Angeles शहर में Olympics हुए. और तब सोवियत संघ ने इसका बहिष्कार किया. लेकिन तब सोवियत संघ के साथ सिर्फ 13 देशों ने ही Olympics का बहिष्कार किया था. 

यहां पर मुद्दा महेंद्र सिंह धोनी के Gloves का नहीं है. बल्कि उस 'बलिदान Badge' का है, जिसके लिए भारतीय सेना के कई सपूतों ने अपना बलिदान दिया है. ICC चाहे कुछ भी दलील दे. भारत को अपना पक्ष मज़बूती से रखना चाहिए. आज क्रिकेट हो या जीवन से जुड़ा कोई भी क्षेत्र, कोई भी भारत को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता. अगर भारत वाकई सुपरपावर बनना चाहता है, तो उसे अपने आक्रोश की पटकथा खुद लिखनी होगी.