ZEE जानकारी: इन 3 गलतियों को सुधार बीजेपी देश में फिर बजा सकती है डंका!

अब हम आपको एक मैप दिखाएंगे. इस मैप को देखकर आप समझ जाएंगे कि राज्यों में बीजेपी का प्रभाव कैसे कम हो रहा है. मार्च 2018 में देश के 21 राज्यों में बीजेपी का शासन था. और देश की 69 प्रतिशत आबादी पर उसकी पकड़ थी. लेकिन महज़ डेढ़ साल में बीजेपी झारखंड समेत 5 राज्य गंवा चुकी है .

ZEE जानकारी: इन 3 गलतियों को सुधार बीजेपी देश में फिर बजा सकती है डंका!

अब हम आपको एक मैप दिखाएंगे. इस मैप को देखकर आप समझ जाएंगे कि राज्यों में बीजेपी का प्रभाव कैसे कम हो रहा है. मार्च 2018 में देश के 21 राज्यों में बीजेपी का शासन था. और देश की 69 प्रतिशत आबादी पर उसकी पकड़ थी. लेकिन महज़ डेढ़ साल में बीजेपी झारखंड समेत 5 राज्य गंवा चुकी है . 2018 में जिस बीजेपी के पास 21 राज्य थे..वो अब 15 राज्यों में सिमट चुकी है . अब राज्यों के आधार पर बीजेपी की पकड़ देश की सिर्फ 43 प्रतिशत आबादी पर रह गई है .इस दौरान महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश औऱ राजस्थान जैसे बड़े राज्य बीजेपी के हाथ से निकल चुके हैं . यानी अब बीजेपी का केसरिया रंग देश के नक्शे पर फीका पड़ रहा है .

आने वाले दिनों में दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव होने वाले हैं . ऐसे में झारखंड का चुनाव राजनीतिक दलों को क्या संदेश देता है .पहले हम आपको बताएंगे कि ये जनादेश बीजेपी को क्या सिखाता है .

पहली बात ये कि राज्यों के चुनाव लोकसभा मॉडल पर नहीं लड़ना चाहिए, यानी स्थानीय मुद्दों को महत्व देना चाहिए .

दूसरी बात- चुनाव से पहले गठबंधन नहीं तोड़ना चाहिए. उदाहरण के तौर पर AJSU से अलग होकर चुनाव लड़ने का बीजेपी को कोई फायदा नहीं मिला.

और तीसरी बात- पार्टी के क्षेत्रीय नेताओं को नाराज़ नहीं करना चाहिए ...क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है .

इसी तरह...झारखंड चुनाव नतीजों से विपक्ष के लिए भी कुछ संदेश हैं. पहला संदेश ये कि...एकजुट विपक्ष बीजेपी को हरा सकता है . दूसरा संदेश ये कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार ना करें, तो फायदा मिलता है

और तीसरा संदेश ये...कि स्थानीय नेताओं के हाथ में नेतृत्व सौंपने का फायदा मिलता है . 

झारखंड के नतीजों से आज अगर कोई सबसे ज्यादा खुश होगा, तो वो हैं, हेमंत सोरेन . हेमंत सोरेन भले ही Engineering की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके, लेकिन Social और Political Engineering में वो पास हो गए ...इसी का नतीजा है कि कांग्रेस और RJD के साथ मिलकर उन्होंने बीजेपी को सत्ता से बाहर कर दिया ...और मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में आसानी से स्वीकार कर लिए गए .

आज झारखंड के नतीजे आने के बाद हेमंत सोरेन साइकिल की सवारी करते दिखे . आमतौर पर चुनावों में बड़ी जीत के बाद नेता चुनावी रथ की सवारी करते दिखते हैं...फूल-मालाओं से लदे दिखते हैं...लेकिन हेमंत सोरेन साइकिल पर बैठकर धीमी रफ्तार में आगे बढ़ते हुए दिखाई दिए .

हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के बेटे हैं . उन्होंने राजनीति में आने से पहले इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था, लेकिन वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. आज नतीजों के बाद वो अपने पिता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन से भी मिले.

हेमंत सोरेन 2013 में भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं . तब वो सिर्फ 38 साल की उम्र में, झारखंड के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने थे. ये भी इत्तेफाक है कि 2014 में 23 दिसंबर को हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद से हटे थे. और अब ठीक 5 साल बाद ...23 दिसंबर को ही उन्हें जीत की खुशी मिली है .जल्द ही वो दोबारा झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे . 

अब समझिए कि इस चुनाव के स्टार प्रचारकों का स्ट्राइक रेट क्या रहा?यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कितनी रैलियां करके कितनी सीटों पर जीत दिलाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस चुनाव में 9 रैलियां कीं . और कुल 81 में से 37 सीटों के लिए चुनाव प्रचार किया. इनमें से 16 सीटों पर बीजेपी रुझानों में आगे चल रही है. यानी प्रधानमंत्री मोदी का स्ट्राइक रेट 43 प्रतिशत है. जबकि राहुल गांधी ने सिर्फ 5 रैलियां करके 19 सीटों पर चुनाव प्रचार किया था. कांग्रेस इनमें से 5 सीटों पर आगे चल रही है. और राहुल गांधी का स्ट्राइक रेट 26 प्रतिशत है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने झारखंड में आए जनादेश का सम्मान किया है . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने JMM के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को बधाई दी . प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि ...वो झारखंड की जनता को धन्यवाद देते हैं...उन्होंने ये भी कहा कि झारखंड और वहां के लोगों के लिए बीजेपी हमेशा काम करती रहेगी . बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी ट्वीट किया कि ... झारखंड की जनता ने 5 वर्षों तक सेवा करने का जो मौका दिया था उसके लिए वो आभारी हैं .

राजनीतिक दलों को हर हाल में जनता का आभारी होना चाहिए क्योंकि राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होतीं...और जनता का फैसला सबसे बड़ा होता है . वैसे आज का एक और अहम संदेश ये है कि...EVM पर कोई आंच नहीं आई . झारखंड के चुनाव में EVM की भी जीत हुई है.