ZEE जानकारी: बहकावे में मत आइए! जानिए हकीकत, CAA से नहीं छिनेगी किसी की नागरिकता

नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर. भारत में पिछले 4 दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं. जगह जगह हिंसा और आगजनी हो रही है. फिर भी हमारे देश के कुछ नेताओं और बुद्धीजीवियों को लगता है कि ये सब तो लोकतांत्रिक अधिकार हैं. 

ZEE जानकारी: बहकावे में मत आइए! जानिए हकीकत, CAA से नहीं छिनेगी किसी की नागरिकता

नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर. भारत में पिछले 4 दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं. जगह जगह हिंसा और आगजनी हो रही है. फिर भी हमारे देश के कुछ नेताओं और बुद्धीजीवियों को लगता है कि ये सब तो लोकतांत्रिक अधिकार हैं. लेकिन अधिकारों की आड़ में. देश को सांप्रयादिक दंगों की तरफ धकेला जा रहा है. पहले एक विशेष समुदाय के लोगों को भड़काया जाता है...भीड़ को हिंसा के लिए तैयार किया जाता है..और फिर कुछ लोग संविधान की दुहाई देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं..तो नेता राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति से दखल देन की अपील करने लगते हैं. 

आप इस पैटर्न पर गौर कीजिए...क्योंकि ये एक तरह का भ्रम जाल है..जिसमें आपको उलझाया जा रहा है..एक तरफ अलग अलग पार्टियों के नेता राष्ट्रपति से मिलते हैं..तो दूसरी तरफ नेताओं के नाम हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ दर्ज की गई FIR में भी हैं . ये लोग सांप्रदायिक हिंसा को डिजिटल तरीके से फैला रहे हैं और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके खौफ और डर का माहौल बना रहे हैं..इसिलए आप इन्हें भारत के पहले डिजिटल दंगे भी कह सकते हैं .

रविवार को जामिया इलाके में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ खान और आम आदमी पार्टी की जामिया युनिवर्सिटी छात्र विंग के नेता कासिम उस्मानी के खिलाफ FIR दर्ज की है . इसके अलावा इस FIR में सात और लोगों के नाम हैं .

पुलिस ने जामिया और न्यू फ्रेंड्स कॉलनी में हुई हिंसा के मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. जिनके नाम हैं..दानिश, दिलशाद, मोहम्मद हनीफ, शरीफ अहमद, समीर अहमद, मोहम्मद दानिश, ईनल हुसैन, अनवर काला, युनुस और जुम्मन.

कल दिल्ली के सीलमपुर और जाफराबाद इलाके में भी जबरदस्त हिंसा हुई थी और पुलिस का कहना है कि इस हिंसा से पहले..कांग्रेस के पूर्व विधायक मतीन अहमद और आम आदमी पार्टी के विधायक हाजी इशराक के नेतृत्व में एक रैली निकाली गई थी. इस रैली में नागरिकता कानून के खिलाफ भाषण दिए गए थे..और प्रदर्शन के बाद वहां जाम लग गया और जब पुलिस जाम खुलवाने पहुंची तो भीड़ ने हिंसा शुरु कर दी.

पुलिस वालों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया और स्कूल बसों को भी निशाना बनाया गया. इन बसों में स्कूली छात्र और अध्यापक मौजूद थे. ये पूरी घटना और पुलिस की कार्रवाई इस बात का प्रमाण हैं कि CAA के विरोध के नाम पर शांति पूर्ण प्रदर्शनों की जगह. सोची समझी साजिश के तहत. सांप्रयादिक हिंसा फैलाने की साजिश हो रही है. इसलिए आज आपको ये भी समझना चाहिए कि इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोग कौन हैं ? उनका धर्म क्या है और उन्हें इस नए कानून के बारे में क्या जानकारी है .

हमने आज जब इस विषय पर एक Research किया. तो हमें पता लगा कि दिल्ली से लेकर मुंबई तक..और कोलकाता से लेकर बैंगलुरु तक.. जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं..उनमें से ज्यादातर को ये पता ही नहीं है कि वो किस चीज़ का विरोध कर रहे हैं . कोई इसे NRC का विरोध बता रहा है. तो कोई सिर्फ आज़ादी आज़ादी के नारे लगा रहा है..किसी को हर्जाना चाहिए तो कोई सिर्फ धार्मिक नारेबाज़ी करना चाहता है . हमें ये भी पता लगा कि ज्यादातर प्रदर्शनकारियों को सिर्फ धर्म के नाम पर रैलियों में बुलाया जा रहा है और उन्हें ये कहकर डराया जा रहा है कि कि देश से मुसलमानों को भगाया जा रहा है .

इतना ही नहीं बहुत सारे मुस्लिम छात्र नेता और विपक्षी पार्टियों के कुछ मुस्लिम नेता भी. अपने समुदाय को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR इसी बात का प्रमाण है. लेकिन मुसलमानों को सिर्फ डराया ही नहीं जा रहा..बल्कि उन्हें कानून हाथ में लेने के लिए भी उकसाया जा रहा है.

ऐसा ही VIRAL वीडियो हमने कल भी आपको दिखाया था. जिसमें एक कथित छात्र नेता. मुसलमानों से अपील कर रहा है कि वो मिलकर दिल्ली का चक्का जाम कर दें और दिल्ली वालों का दूध पानी बंद कर दें . ऐसे भड़काऊ भाषण..बाकायदा धार्मिक नारेबाज़ी के बीच दिए जा रहे हैं..आपको वो वीडियो एक बार फिर देखना चाहिए.

CAA नागरिकता संशोधन कानून है और NRC का मतलब है एक ऐसा राष्ट्रीय रजिस्टर जिसमें देश के सभी नागरिकों का ब्योरा होगा. लेकिन हमारे देश में CAA और NRC का नाम एक साथ लेकर. खौफ और अफवाहों की रेसिपी के सहारे.दंगे भड़काने की कोशिश हो रही है. इसलिए आज आपको CAA के बारे में सभी ज़रूरी बातें जान लेनी चाहिए. इसके लिए हमने सवाल-जवाब वाला एक Format तैयार किया है.

पहला सवाल ये है कि क्या इससे भारत का कोई मौजूदा नागरिक प्रभावित होगा .

तो इसका जवाब है. बिल्कुल नहीं. CAA किसी वर्तमान भारतीय नागरिक के मूल भूत अधिकारों को नुकसान नहीं पहुंचाता है. इसमें सभी धर्मों के नागरिक शामिल हैं. मुस्लिम भी.

फिर सवाल ये है कि ये कानून किन पर लागू होता है. तो जवाब ये है कि ये कानून सिर्फ उन हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों पर लागू होता है. जो 31 दिसंबर 2014 से पहले. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए थे. और जिनके पलायन की वजह धर्म के आधार पर होने वाला शोषण था. लेकिन ये कानून भारत में आए दूसरे विदेशियों पर लागू नहीं होता. बाहर से आए मुसलमानों पर भी नहीं .

तीसरा सवाल ये है कि इस कानून से. तीन पड़ोसी देशों से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों को क्या फायदा होगा. और इसका जवाब ये है कि...पासपोर्ट और वीज़ा जैसे दस्तावेज़ ना होने के बावजूद..उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी.

चौथा सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए मुसलमान कभी भारत के नागरिक नहीं बन सकते ?

अब आपको इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब भी जानना चाहिए. भारत के नागरिकता कानून की धारा 6 के नियमों का पालन करके..कोई भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है . मौजूदा कानूनों के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में कई विदेशी मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी गई है. और भविष्य में भी ये व्यवस्था कायम रहेगी.

यानी अगर कोई मुसलमान किसी भी देश से भारत आता है. और भारत का नागरिक बनना चाहता है तो उसे सिर्फ कुछ नियम कायदों का पालन करना होगा और सभी दस्तावेज़ सही पाए जाने पर..उसे भारत की नागरिकता मिल जाएगी .

पांचवा सवाल ये है कि क्या नए नागरिकता कानून के लागू हो जाने के बाद. अवैध रूप से भारत आए मुसलमानों को वापस भेज दिया जाएगा..तो इसका भी जवाब है- नहीं. क्योंकि इस नए कानून में अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का प्रावधान नहीं है. इन लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया पहले से मौजूद कानूनों के तहत पूरी की जाएगी.

और सबसे बड़ी बात ये है कि सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदुओं को ही नए कानून के तहत नागरिकता दी जाएगी. अगर किसी और देश का हिंदू भारत आकर नागरिकता मांगता है तो उसे इस नए कानून से कोई फायदा नहीं होगा.

एक अफवाह ये भी फैलाई जा रही है कि इस नए कानून के तहत भारतीय मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी. लेकिन ये सरासर झूठ है..क्योंकि CAA किसी भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होता है.

कुछ लोग ये भ्रम भी फैला रहे हैं कि नागरिकता कानून के बाद. पूरे देश में NRC लागू कर दिया जाएगा. मुसलमानों को छोड़कर सभी शरणार्थियों को भारत का नागरिक बना दिया जाएगा और मुसलमानों को डिटेंशन Camps में भेज दिया जाएगा . लेकिन ये भी कोरा झूठ है..क्योंकि नागरिकता कानून का NRC से कुछ लेना देना नहीं है . NRC से जुड़े कानूनी प्रावधान 2004 से ही नागरिकता कानून 1955 का हिस्सा हैं. और CAA की वजह से इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.

इन सवालों का जवाब जानने के बाद..आप समझ गए होंगे कि कैसे हमारे देश में डर Plus अफवाह Is Equal To दंगे बनाने की कोशिश की जा रही है .

अब आपको एक वीडियो और देखना चाहिए . ये वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है . इसे देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे इस नए कानून को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं और लोग बिना कुछ जाने समझे इसका शिकार हो रहे हैं.

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी एक कविता में कहा था

क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो
उसको क्या.. जो दंतहीन विषहीन, विनीत, सरल हो.

यानी दूसरों को क्षमा भी वही व्यक्ति कर सकता है. जिसके पास ताकत हो. किसी भी देश को ये ताकत उसकी सेना से मिलती है..क्योंकि सेनाएं ही सीमा पर देश की रक्षा करती हैं और ये सुनिश्चित करती हैं कि घुसपैठिए, आतंकवादी या फिर अवैध प्रवासी देश में प्रवेश ना करें . यानी जब तक कोई देश सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम नहीं होता तबतक वो हमदर्दी के नाम पर दूसरे देशों से आए लोगों को शरण भी नहीं दे सकता .

लेकिन हमारे देश के कई बुद्धीजीवी, Celebreties और पत्रकार चाहते हैं..कि भारत मानवता के नाम पर अपने दरवाज़े हर किसी के लिए खोल दे...फिर चाहे इन दरवाज़ों से कोई आतंकवादी या घुसपैठिया ही अंदर क्यों ना आ जाए . ये सोच भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है और आज आपको इसकी सच्चाई भी जाननी चाहिए.आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव यानी सदगुरु से जब ये पूछा गया कि क्या मानवता के नाम पर दूसरे देशों से आने वाले घुसपैठियों को शरण दी जानी चाहिए..तो उन्होंने इसका क्या जवाब दिया..ये आपको सुनना चाहिए.

इन विरोध प्रदर्शनों के नाम पर भारत को अंतर्राष्ट्रीय तौर पर भी बदनाम करने की कोशिश हो रही है . भारत के अल्पज्ञानी Celebrities और पत्रकार तो अधूरी जानकारी की वजह से अफवाहें फैला रहे हैं..लेकिन समझदार माना जाने वाला विदेशी मीडिया भी इस दुष्प्रचार का शिकार हो गया है . आज आपको अमेरिका के दो बड़े अखबारों The Wall Street Journal और The New York Times की Headlines पर गौर करना चाहिए . The Wall Street Journal लिखता है Muslim Protest Spreads Against India's New Citizenship Law.

जबकि The New York Times में लिखा गया है - India Erupts In protest as Modi Presses Vision For Hindu Nation . यानी मोदी का भारत हिंदू राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और भारत के मुसलमान देश भर में विरोध कर रहे हैं. आप खुद अंदाज़ा लगाइए कि विदेशी मीडिया किस हद तक भारत के प्रति दुराग्रह से ग्रस्त है .