ZEE जानकारी: अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका!

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा सूचकांक आपने देखा. अब देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े सूचकांक के बारे में जान लीजिए. पिछले कुछ समय से आपने सुना होगा कि देश में मंदी आ गई है. 

ZEE जानकारी: अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका!

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा सूचकांक आपने देखा. अब देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े सूचकांक के बारे में जान लीजिए. पिछले कुछ समय से आपने सुना होगा कि देश में मंदी आ गई है. अर्थव्यवस्था की विकास की रफ्तार धीमी हो गई है... इसे समझाने के लिए आपको अर्थव्यवस्था से जुड़े कई भारी भरकम आंकड़े बताए गए होंगे. और लगातार ऐसी बातें सुनकर आपको भी लगता होगा कि. इसी वजह से आपकी जेब में भी आजकल पैसे नहीं बच रहे हैं . आज सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था की सेहत के नए आंकड़े जारी किए हैं. इसके मुताबिक वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में GDP की रफ्तार 4.5 प्रतिशत हो गई है. 

और पिछले 6 वर्षों में ये भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे धीमी विकास दर है.  अर्थव्यवस्था के आंकड़ों से जुड़ी भाषा इतनी मुश्किल होती है कि आम आदमी को अक्सर ये समझ में नहीं आते हैं.  इसलिए आज आपको आसान भाषा में बताएंगे कि इसका आपके जीवन पर क्या असर होगा?

सबसे पहले आज की खबर जान लीजिए .  देश की विकास दर, वर्ष 2019 की पहली तिमाही के 5 प्रतिशत से घटकर... दूसरी तिमाही में साढ़े 4 प्रतिशत हो गई है.  अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा गिरावट Manufacturing, Industry और Construction के क्षेत्र में हुई है. और इन क्षेत्रों में विकास दर कम होने का मतलब है कि नौकरियां कम हुई हैं.

नई नौकरी के अवसर कम हुए हैं. लोग पैसा कम खर्च कर रहे हैं और बाजार में सामान की बिक्री कम हो रही है. मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यन के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है और तीसरी तिमाही से GDP की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है. 

GDP क्या है अब सबसे पहला सवाल है GDP का ये आंकड़ा क्या बताता है और इसकी रफ्तार कम या ज्यादा होने का मतलब क्या है? GDP का मतलब है Gross Domestic Product... ये एक थर्मामीटर है जिसके आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था की सेहत बताते हैं.  अगर ये आंकड़ा नीचे जाए तो आपकी आर्थिक हालत बिगड़ रही है और ऊपर जाए तो बेहतर हो रही है. 

देश में बनने वाली सभी चीजों के उत्पादन और खपत से ही GDP की विकास दर तय होती है. अगर ये विकास दर तेज है तो इसका मतलब है कि देश में लोगों की आमदनी बढ़ रही है...उनकी जेब में पर्याप्त पैसे हैं... उन्हें नई नौकरियां मिल रही हैं... और कंपनियों के बनाए सामान भी बाजार में बिक रहे हैं.  वैसे अर्थव्यवस्था की विकास दर कम होने का ये मतलब नहीं है कि देश आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ रहा है. ये विकास दर अर्थव्यवस्था के कुछ Sector में ज्यादा है... और कुछ में थोड़ी कम है.  यही वजह है कि 4.5 प्रतिशत की विकास दर होने के बावजूद Stock मार्केट रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है. 

अगला सवाल है कि... क्या अर्थव्यवस्था की रफ्तार कम होने से आपके आर्थिक भविष्य पर कोई खतरा है? और देश और समाज पर इसका क्या कोई गलत असर होगा ? GDP की रफ्तार कम होने से नई नौकरी मिलने के मौके कम हो सकते हैं...और महंगाई बढ़ सकती है.  ये हालात चिंताजनक हैं लेकिन आपको इससे निराश होने की जरूरत नहीं है.

 क्योंकि पिछले कुछ महीनों में सरकार ने निवेश को बढ़ाने के लिए Real Estate, ऑटो सेक्टर और बैंक को Booster पैकेज दिए हैं... और सरकार के मुताबिक इसका सकारात्मक असर, अर्थव्यवस्था पर आने वाले कुछ महीनों में दिखाई देगा .  यानी GDP की कम रफ्तार से देश के आर्थिक भविष्य पर अभी कोई खतरा नहीं दिख रहा है. 

अब ये जान लीजिए कि देश में मंदी का आपके ऊपर क्या असर होगा.  GDP की रफ्तार में कमी का असर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ेगा....  सरकार के पास टैक्स कलेक्शन कम हो गया है... क्योंकि उत्पादन की रफ्तार कम हुई है.  इसलिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क से जुड़ी योजनाओं के लिए सरकार के पास पैसे की कमी हो सकती है. वर्ष 2019 में देश में GDP की रफ्तार पिछले 6 वर्षों में सबसे कम है. 

वर्ष 2016 की शुरुआत में GDP की विकास दर 9.4 प्रतिशत थी... लेकिन 2019 की दूसरी तिमाही में ये सिर्फ 4.5 प्रतिशत है.  यानी पिछले तीन वर्षों में ही ये घटकर आधा हो गया है. और इसकी एक वजह है जुलाई 2017 में GST यानी Goods and Services Tax को लागू करना.  इससे पहले ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में जब GST लागू किया गया... तो उसके बाद के वर्षों में वहां पर GDP की विकास दर कम हुई .  अब सरकार भी यही दावा कर रही है...देश में मंदी का माहौल नहीं है... बल्कि विकास दर की रफ्तार कम हुई है. 

वैसे GDP की विकास दर कम होने का मतलब ये नहीं है कि हम दुनिया में सबसे पीछे हैं. भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2019 से पहले तक दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था थी .  और अब विकास की रफ्तार में कमी के बावजूद... भारत दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों से आगे है. 

इस वक्त दुनिया के कई देशों में Economy की रफ्तार सिर्फ 3 प्रतिशत है... जो भारत से भी काफी कम है.  हमारे देश की अर्थव्यवस्था के सुनहरे भविष्य को लेकर देश की जनता को बड़ी उम्मीदें हैं.  और International Monetary Fund यानी IMF के मुताबिक वर्ष 2020 में भारत फिर से दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करनेवाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा .  और जीडीपी की रफ्तार 7 प्रतिशत होगी.  IMF दुनिया के 189 देशों की आर्थिक स्थिति पर नजर रखने का काम करता है. 

किसी भी समस्या के समाधान का पहला तरीका ये है कि समस्या को समझा जाए और फिर उसे हल करने की कोशिश की जाए.  लेकिन हमारे देश में ये माना जा रहा है कि अर्थव्यवस्था में कोई समस्या ही नहीं है.  कई सेक्टर को पैकेज देकर हालात सुधारने की कोशिश की गई है लेकिन अब Band Aid लगाने से काम नहीं चलेगा.ऐसा लगता है सुधार के लिए अब Surgery की जरूरत है. 

- सबसे पहले देश के लोगों में पैसा खर्च करने के लिए विश्वास जगाने की जरूरत है... क्योंकि जेब में पैसे होने के बाद भी लोग खर्च नहीं कर रहे हैं
- लोगों को टैक्स में और छूट दिया जाए, ताकि लोगों को ज्यादा पैसा मिले... सरकार ने Corporates को टैक्स में छूट दी है... तो आम जनता को भी इसका फायदा दिया जा सकता है . 
- सरकार अगर अपना खर्च बढ़ाए तो बाजार में ज्यादा पैसा आएगा और इससे नए रोजगार भी बढ़ेंगे
- और निवेश बढ़ाने के लिए देश और विदेश के Investors को नए मौके दिए जाएं...
अगर सरकार ये कदम उठाए... तो देश की अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिल सकती है... और वो फिर से दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ सकती है.