ZEE जानकारी: कांग्रेस ने ही रखी थी नागरिकता कानून नींव, अब विरोध क्यों?

आज़ादी के बाद पाकिस्तान में रहने वाले गैर मुस्लिमों को लेकर 25 नवंबर 1947 को आए कांग्रेस ने अपनी एक बैठक में एक प्रस्ताव रखा था. इस कार्यकारिणी प्रस्ताव में पाकिस्तान जाने वाले गैर मुस्लिमों की सुरक्षा का जिक्र किया गया था. 

ZEE जानकारी: कांग्रेस ने ही रखी थी नागरिकता कानून नींव, अब विरोध क्यों?

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जब देशभर से हिंसा की तस्वीरें आ रही थीं, तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक विडियो संदेश आया. सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों की आवाज को कुचल रही है. उन्होंने कहा कि नोटबंदी की तरह अब लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा. लेकिन हैरानी की बात ये है कि ढाई मिनट के अपने संदेश में, एक सेकेंड के लिए भी उन्होंने लोगों से ये नहीं कहा कि प्रदर्शन के नाम पर हिंसा मत कीजिए. सड़कों पर आग लगा रहे,पत्थर चला रहे लोगों से ये नहीं कहा कि देश में अमन शांति बनाकर रखिए .

इस बीच केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ज़ी न्यूज से कहा कि हिंसा से नहीं, बल्कि बातचीत से ही कोई रास्ता निकल सकता है. उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर अफवाह फैलाने और लोगों को भड़काने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. कांग्रेस आज जिस नए नागरिकता कानून का विरोध कर रही है उसकी नींव कांग्रेस सरकार में ही रखी गई थी. सबसे पहले 1947 में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है . और NRC का मसौदा भी सबसे पहले कांग्रेस की सरकार लेकर आई थी.

आज़ादी के बाद पाकिस्तान में रहने वाले गैर मुस्लिमों को लेकर 25 नवंबर 1947 को आए कांग्रेस ने अपनी एक बैठक में एक प्रस्ताव रखा था. इस कार्यकारिणी प्रस्ताव में पाकिस्तान जाने वाले गैर मुस्लिमों की सुरक्षा का जिक्र किया गया था . क्योंकि आजादी के बाद भारत से काफी संख्या में शरणार्थी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पहुंचे थे लेकिन पाकिस्तान में जाने के बाद भी इनके साथ हिंसा होने लगी . इन्हें Refugee Camps में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा .
 
25 नवंबर 1947 को कांग्रेस की कार्यकारिणी में कहा गया था कि वे पाकिस्तान के उन सभी गैर मुस्लिमों को पूरी सुरक्षा देने के लिए बाध्य हैं जो अपनी जान और सम्मान बचाने के लिए सीमा पार करके भारत आए हैं या आने वाले हैं . इस प्रस्तावना का जिक्र जगदीश शरण शर्मा द्वारा लिखी गई किताब India's Struggle For Freedom के Volume-3 और page संख्या -835 में है . मै आपको इसके कुछ हिस्से पढ़कर सुनाना चाहता हूं .

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इतना ही नहीं The Citizenship Act-1955 में वर्ष 2004 में उस समय की केंद्र सरकार ने कई संशोधन किए थे. उस समय इसे The Citizenship (Amendment) Act-2003 कहा गया. इस संशोधन में एक नया सेक्शन 14-A भी जोड़ा गया था . ये नया सेक्शन National Identity Card जारी करने को लेकर था . नागरिकता संशोधन अधिनियम का Section 14(A) कहता है कि भारत सरकार अब अनिवार्य रूप से एक रजिस्टर तैयार करेगी. ये रजिस्टर भारत के सभी नागरिकों के लिए होगा . और इसके जरिए भारत के हर नागरिक को National Identity Card जारी होगा.

इसके अलावा भारत सरकार एक National Register तैयार करने के लिए National Registration Athourity भी बनाएगी. यानी आज जिस National Register of Citizens Of India यानी NRC का लोग विरोध कर रहे हैं . और इसे बीजेपी की साजिश कह रहे हैं. उस NRC का मसौदा कांग्रेस ने ही वर्ष 2004 में तैयार किया था . तब देश में नरेंद्र मोदी की नहीं बल्कि मनमोहन सिंह की सरकार थी. लेकिन आज वही कांग्रेस इसका विरोध कर रही है और इसे देश के मुसलमानों के खिलाफ बता रही है.